राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर सुरजेवाला ने बयान साझा कर गिनाई खामियां
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर सुरजेवाला ने बयान साझा कर गिनाई खामियां|Social Media
भारत

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर सुरजेवाला ने बयान साझा कर गिनाई खामियां

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने साझा बयान जारी कर मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा- 'न परामर्श, न चर्चा, न विचार विमर्श और न पारदर्शिता!'

Priyanka Sahu

Priyanka Sahu

दिल्ली, भारत। देश में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के खिलाफ कांग्रेस नेताओं का केंद्र की मोदी सरकार पर हमला किये जाने का दौर शुरू हो चला है, हाल ही में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर सुरजेवाला का बयान सामने आया है, जिसमे उन्होंने यह बात कही है।

शिक्षा नीति पर सुरजेवाला का बयान :

दरअसल, केंद्र सरकार ने शिक्षा नीति में बहुत बड़ा बदलाव कर देश में एक नई शिक्षा नीति लागू की है, इसी को लेकर कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला अपने इस बयान को अपने ट्विटर अकाउंट पर साझा करते हुए लिखा- राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 - मानवीय विकास, ज्ञान प्राप्ति, क्रिटिकल थिंकिंग एवं जिज्ञासा की भावना हुई दरकिनार। न परामर्श, न चर्चा, न विचार विमर्श और न पारदर्शिता!

बयान के अनुसार, नई शिक्षा नीति से मानवीय विकास, ज्ञान प्राप्ति, क्रिटिकल थिंकिंग और जिज्ञासा की भावना दरकिनार हुई है, इस दौरान उन्होंने इसकी खामियां गिनाते हुए यह बातें भी कहीं-

  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 का उद्देश्य ‘स्कूल एवं उच्च शिक्षा’ में परिवर्तनकारी सुधार लाना होना चाहिए था, लेकिन वह केवल शब्दों, चमक-दमक, दिखावे और आडंबर के आवरण तक सीमित रही है।

  • इस नीति में तर्कसंगत कार्ययोजना व रणनीति और स्पष्ट रूप से परिभाषित लक्ष्य की कमी नजर आ रही है।

  • यह अपने आप में बड़ा सवाल है कि, शिक्षा नीति 2020 की घोषणा कोरोना महामारी के संकट के बीचों-बीच क्यों की गई और वो भी तब, जब सभी शैक्षणिक संस्थान बंद पड़े हैं।

  • उन्होंने कहा कि सिवाय भाजपा-आरएसएस से जुड़े लोगों के, पूरे शैक्षणिक समुदाय ने इसका आगे बढ़कर विरोध जताया है, शिक्षा नीति 2020 बारे कोई व्यापक परामर्श, वार्ता या चर्चा हुई ही नहीं।

  • हमारे आज और कल की पीढ़ियों के भविष्य का निर्धारण करने वाली इस महत्वपूर्ण शिक्षा नीति को पारित करने से पहले मोदी सरकार ने संसदीय चर्चा या परामर्श की जरूरत भी नहीं समझी। उन्होंने शिक्षा के कानून के अधिकार को याद दिलाते हुए कहा कि, जब कांग्रेस ‘शिक्षा का अधिकार कानून' लाई, तो संसद के अंदर व बाहर हर पहलू पर व्यापक चर्चा हुई थी।

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