Vijayadashami पर मोहन भागवत ने की शस्त्र पूजा और संबोधन में कहीं ये बातें...
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Vijayadashami पर मोहन भागवत ने की शस्त्र पूजा और संबोधन में कहीं ये बातें...

Vijayadashami पर RSS मुख्यालय में मोहन भागवत ने 'शस्त्र पूजन' किया। इसके बाद अपने संबोधन में कहा-15 अगस्त 1947 को हम स्वाधीन हुए। हमने अपने देश के सूत्र देश को आगे चलाने के लिए स्वयं के हाथों में लिए।

महाराष्ट्र, भारत। शारदीय नवरात्र का आज 15 अक्‍टूबर को 10वां दिन है, जिसे विजय दशमी कहा जाता है। Vijayadashami के अवसर पर नागपुर में RSS मुख्यालय में RSS प्रमुख मोहन भागवत ने "शस्त्र पूजन" किया। इस दौरान RSS ने नागपुर में अपने मुख्यालय में परेड भी की।

यह वर्ष हमारी स्वाधीनता का 75वां वर्ष है :

इस दौरान RSS मुख्यालय में RSS प्रमुख मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कहा- यह वर्ष हमारी स्वाधीनता का 75वां वर्ष है। 15 अगस्त 1947 को हम स्वाधीन हुए। हमने अपने देश के सूत्र देश को आगे चलाने के लिए स्वयं के हाथों में लिए। स्वाधीनता से स्वतंत्रता की ओर हमारी यात्रा का वह प्रारंभ बिंदु था। हमें यह स्वाधीनता रातों-रात नहीं मिली। स्वतंत्र भारत का चित्र कैसा हो इसकी, भारत की परंपरा के अनुसार समान सी कल्पनाएँ मन में लेकर, देश के सभी क्षेत्रों से सभी जातिवर्गों से निकले वीरों ने तपस्या त्याग और बलिदान के हिमालय खड़े किये। समाज की आत्मीयता व समता आधारित रचना चाहने वाले सभी को प्रयास करने पड़ेंगे। सामाजिक समरसता के वातावरण को निर्माण करने का कार्य संघ के स्वयंसेवक सामाजिक समरसता गतिविधियों के माध्यम से कर रहे हैं।

मोहन भागवत ने बताया, ''जिस दिन हम स्वतंत्र हुए उस दिन स्वतंत्रता के आनंद के साथ हमने एक अत्यंत दुर्धर वेदना भी अपने मन में अनुभव की ,वो दर्द अभी तक गया नहीं है। अपने देश का विभाजन हुआ, अत्यंत दुखद इतिहास है वो, परन्तु उस इतिहास के सत्य का सामना करना चाहिए, उसे जानना चाहिए। जिस शत्रुता और अलगाव के कारण विभाजन हुआ उसकी पुनरावृत्ति नहीं करनी है। पुनरावृत्ति टालने के लिए, खोई हुई हमारे अखंडता और एकात्मता को वापस लाने के लिए उस इतिहास को सबको जानना चाहिए। खासकर नई पीढ़ी को जानना चाहिए। खोया हुआ वापस आ सके खोए हुए बिछड़े हुए वापस गले लगा सकें।''

विश्व को खोया हुआ संतुलन व परस्पर मैत्री की भावना देने वाला धर्म का प्रभाव ही भारत को प्रभावी करता है। यह न हो पाए इसीलिए भारत की जनता, इतिहास, संस्कृति इन सबके विरुद्ध असत्य कुत्सित प्रचार करते हुए, विश्व को तथा भारत के जनों को भी भ्रमित करने का काम चल रहा है।

RSS प्रमुख मोहन भागवत

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा- इस वर्ष श्री गुरु तेग बहादुर जी महाराज का 400वां प्रकाश पर्व है। वह धार्मिक कट्टरता के खिलाफ खड़े होने के लिए शहीद हो गए थे, जो भारत में बहुत प्रचलित था। उन्हें "हिंद की चादर" या "हिंद की ढाल" शीर्षक से सराहा गया। संत ज्ञानेश्वर महाराज जी ने अपने पसायदान के माध्यम से और सदियों बाद गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर ने अपनी प्रसिद्ध कविता "व्हेयर द माइंड इज विदाउट फियर" में हमारे स्व पर मुक्त जीवन की हमारी अवधारणा के बारे में बात की।

मोहन भागवत द्वारा कही गईं बातें-

  • इस वर्ष श्री अरबिंदो की 150वीं जयंती है। उन्होंने हमारे "स्व" के आधार पर भारत के निर्माण पर विस्तार से लिखा। यह श्री धर्मपाल का शताब्दी वर्ष भी है। उन्होंने गांधीजी से संकेत लिया और अंग्रेजों के सामने भारत के इतिहास के साक्ष्य प्रस्तुत करने का काम किया।

  • यदि सनातन मूल्य-व्यवस्था पर आधारित विश्व की कल्पना करने वाला धर्म भारत में प्रबल होता है तो स्वार्थी शक्तियों का कुकृत्य स्वतः ही निष्प्रभावी हो जाएगा।

  • “महामारी की पृष्ठभूमि में, ऑनलाइन शिक्षा शुरू की गई थी। स्कूल जाने वाले बच्चे अब एक नियम के रूप में मोबाइल फोन से जुड़े हुए हैं। सरकार को ओ.टी.टी. के लिए सामग्री नियामक ढांचा तैयार करने के प्रयास करने चाहिए। प्लेटफॉर्म।"

  • "गुप्त, बिटकॉइन जैसी अनियंत्रित मुद्रा में सभी देशों की अर्थव्यवस्था को अस्थिर करने और गंभीर चुनौतियों का सामना करने की क्षमता है।

  • मन का ब्रेक, उत्तम ब्रेक” (ब्रेक ऑन द माइंड सबसे अच्छा ब्रेक है)। यह ज्ञान ही भारतीय मूल्य प्रणाली पर कई तरह के हमलों की चुनौतियों का समाधान होगा जो हमारे विश्वास को कमजोर कर रहे हैं और लापरवाही को बढ़ावा दे रहे हैं।

  • अपने मत, पंथ, जाति, भाषा, प्रान्त आदि छोटी पहचानों के संकुचित अहंकार को हमें भूलना होगा।

  • COVID-19 की दूसरी लहर पहली की तुलना में कहीं अधिक विनाशकारी थी। इसने युवाओं को भी नहीं बख्शा। महामारी से उत्पन्न गंभीर स्वास्थ्य खतरों के बावजूद मानव जाति की सेवा में निस्वार्थ भाव से समर्पित नागरिकों के प्रयास प्रशंसनीय हैं।

  • सर्वांगीण प्रयासों से हमारे समाज में भी एक नया आत्मविश्वास और हमारे 'स्वयं' का जागरण होता है। श्री राम जन्मभूमि मंदिर के लिए योगदान अभियान में जबरदस्त और भक्तिपूर्ण प्रतिक्रिया देखी गई जो इस जागृति का प्रमाण है।

  • महामारी के अपने अनुभवों से सीखना बुद्धिमानी होगी और सब कुछ सामान्य होने पर भी फिजूलखर्ची और तामझाम को रोकने के लिए एक प्रकृति के अनुकूल जीवन शैली को अपनाने का प्रयास करना होगा।

  • कोविड महामारी ने हमारी पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों की उपयोगिता और 'स्वार्थ' से निकलने वाली दृष्टि को सुदृढ़ किया है। हमने कोरोना वायरस से लड़ने और उससे निपटने में अपनी पारंपरिक जीवन शैली प्रथाओं और आयुर्वेदिक औषधीय प्रणाली की प्रभावकारिता का अनुभव किया।

  • यदि हम माध्यमिक स्वास्थ्य प्रणाली को जोनल स्तर पर व्यवस्थित करने की योजना बनाते हैं तो जिला स्तर पर तृतीयक स्वास्थ्य केंद्रों की उपलब्धता और शहरी केंद्रों में सुपर स्पेशियलिटी दवा का प्रचलन संभव है।

  • हमारे भौगोलिक रूप से विशाल और घनी आबादी वाले देश में, हमें स्वास्थ्य देखभाल की फिर से कल्पना करने की आवश्यकता होगी जो न केवल एक निवारक से बल्कि एक स्वस्थ दृष्टिकोण से भी है, जैसा कि आयुर्वेद के विज्ञान द्वारा प्रकाशित किया गया है।

  • हिन्दू मन्दिरों का संचालन हिन्दू भक्तों के ही हाथों में रहे तथा हिन्दू मन्दिरों की सम्पत्ति का विनियोग भगवान की पूजा तथा हिन्दू समाज की सेवा तथा कल्याण के लिए ही हो, यह भी उचित व आवश्यक है।

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