आदित्य-एल1 उपग्रह पृथ्वी की निचली कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित
आदित्य-एल1 उपग्रह पृथ्वी की निचली कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापितRaj Express

आदित्य-एल1 उपग्रह पृथ्वी की निचली कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित, प्रधानमंत्री मोदी ने इसरो को दी बधाई

सफल प्रक्षेपण के साथ ही सभी चार चरणों के प्रज्वलन और पृथक्करण के बाद रॉकेट को करीब 600 किलोमीटर की ऊंचाई पर निर्धारित कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित किया गया।

हाइलाइट्स :

  • आदित्य-एल1 अंतरिक्ष यान को पृथ्वी की कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया।

  • 125 दिनों की लंबे सफर में सूर्य के बाहरी वातावरण का अध्ययन करने का सिलसिला शुरू हो गया।

  • मिशन नियंत्रण केंद्र के वैज्ञानिक पूरे अभियान पर नजर रखे हुए है।

श्रीहरिकोटा, आंध्र प्रदेश। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने देश के पहले सूर्य मिशन के तहत आदित्य-एल1 अंतरिक्ष यान को शनिवार को पृथ्वी की कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया।

इसरो सूत्रों के मुताबिक 23 घंटे 40 मिनट की उल्टी गिनती समाप्त होने के साथ ही पूर्वाह्न 11:50 बजे पीएसएलवी-सी57 के जरिए शार रेंज से प्रक्षेपित आदित्य एल-1 को अब पृथ्वी की निचली कक्ष में स्थापित कर दिया गया है। इसी के साथ ही 125 दिनों की लंबे सफर में सूर्य के बाहरी वातावरण का अध्ययन करने का सिलसिला शुरू हो गया। उन्होंने बताया कि मिशन नियंत्रण केंद्र के वैज्ञानिक पूरे अभियान पर नजर रखे हुए है।

इसरो अध्यक्ष एस सोमनाथ ने कहा कि आदित्य-एल1 सूर्य का अध्ययन करने वाला पहला अंतरिक्ष आधारित भारतीय मिशन है। सफल प्रक्षेपण के साथ ही सभी चार चरणों के प्रज्वलन और पृथक्करण के बाद रॉकेट को करीब 600 किलोमीटर की ऊंचाई पर निर्धारित कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित किया गया।

उन्होंने कहा कि 15 लाख किलोमीटर की यात्रा करने के बाद अंतरिक्ष यान आदित्य-एल1 जनवरी 2024 के पहले सप्ताह में सूर्य के क्षेत्र में प्रवेश करेगा। करीब 1,475 किलोग्राम वजनी अंतरिक्ष यान को सूर्य-पृथ्वी प्रणाली के लैग्रेंज प्वाइंट-1 (एल1) के चारों ओर एक प्रभामंडल कक्षा में रखा जाएगा जो पृथ्वी से लगभग 15 लाख किमी दूर है।

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श्री सोमनाथ ने कहा कि अंतरिक्ष यान को पृथ्वी की निचली कक्षा में रखे जाने के बाद कक्षा को और अधिक अण्डाकार बनाया जाएगा और बाद में अंतरिक्ष यान को ऑन-बोर्ड प्रोपल्शन थ्रस्टर्स का उपयोग करके लैग्रेंज बिंदु एल1 की ओर प्रक्षेपित किया जाएगा। जैसे ही अंतरिक्ष यान एल1 की ओर बढ़ेगा यह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र (एसओआई) से बाहर निकल जाएगा। एसओआई से बाहर निकलने के बाद, क्रूज चरण शुरू हो जाएगा और बाद में अंतरिक्ष यान को एल1 के चारों ओर एक बड़ी प्रभामंडल कक्षा में स्थापित किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि यू आर राव सैटेलाइट सेंटर (यूआरएससी), बेंगलुरु में तैयार आदित्य-एल 1 अंतरिक्ष यान को सूर्य-पृथ्वी प्रणाली के लैग्रेंज बिंदु 1 (एल 1) के चारों ओर एक प्रभामंडल कक्षा में रखा जाएगा, जो पृथ्वी से लगभग 15 लाख किमी दूर है।

आदित्य-एल1 के सफल लॉन्च पर प्रधानमंत्री मोदी ने इसरो के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों को दी बधाई

प्रधानमंत्री मोदी ने इसरो के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों को दी बधाई
प्रधानमंत्री मोदी ने इसरो के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों को दी बधाईRaj Express

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को देश के पहले सौर मिशन आदित्य-एल1 को सफलतापूर्वक लॉन्च करने पर बधाई एवं शुभकामनांए दी।

प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “ चंद्रयान-3 की सफलता के बाद भारत ने अपनी अंतरिक्ष यात्रा जारी रखी है। भारत के पहले सौर मिशन आदित्य-एल1 के सफल प्रक्षेपण के लिए इसरो के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई।
बेहतर विकास के लिए हमारे अथक वैज्ञानिक प्रयास जारी रहेंगे।”

उल्लेखनीय है कि आज इसरो ने 23 घंटे 40 मिनट की उलटी गिनती समाप्त होने के साथ ही पूर्वाह्न 11 बजर 50 मिनट पर पीएसएलवी-सी57 के जरिए शार रेंज से प्रक्षेपित आदित्य एल-1 को अब पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित कर दिया गया है।

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