'महिलाएं कभी भी पुलिस स्टेशन या टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर पर फोन कर सकती हैं।'
'महिलाएं कभी भी पुलिस स्टेशन या टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर पर फोन कर सकती हैं।' |एएनआई, ट्विटर
दक्षिण भारत

रात 10 से सुबह 6 बजे के बीच महिलाओं को घर छोड़ेगी कर्नाटक पुलिस

कर्नाटक के गडग जिले में स्थानीय पुलिस ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए एक सराहनीय कदम उठाया है। 'महिलाएं कभी भी पुलिस स्टेशन या टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर पर फोन कर सकती हैं। पुलिस उनकी मदद करेगी।'

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राज एक्सप्रेस। हैदराबाद में पशु चिकित्सक के साथ हुए बलात्कार और उसे ज़िन्दा जलाने की घटना के बाद देश में महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराधों के खिलाफ गुस्सा है। पूरे भारत में कई जगह इन अपराधों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए। इस ही के मद्देनजर कर्नाटक की गडग जिले की पुलिस ने एक अनोखी पहल शुरू की है।

"रात में सफर करने वाली महिलाओं को गडग जिले की पुलिस उनके घर छोड़ने जा रही है। रात के 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच पुलिस महिलाओं को उनके घर पहुंचाने का कार्य कर रही है और वे यह काम मुफ्त में कर रहे हैं।"

कर्नाटक के गडग जिले की पुलिस ने इस पहल की शुरूआत की है। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, गडग के एसपी श्रीनाथ जोशी का कहना है, 'महिलाएं कभी भी पुलिस स्टेशन या टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर पर फोन कर सकती हैं। पुलिस उनकी मदद करेगी और निर्धारित स्थान तक उन्हें पहुंचा देगी।'

भारत में लगभग हर 20 मिनिट में एक बलात्कार होता है। तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में एक 27 वर्षीय पशु चिकित्सक का सामूहिक बलात्कार कर जला दिया गया था। वह घर लौट रही थीं और लिफ्ट देने का नाटक कर 4 आरोपियों ने उनका बलात्कार किया और बाद में जला कर मार डाला।

इसके बाद हरियाणा में एक 17 साल की लड़की का पिछले पांच महीनों में दो बार सामूहिक बलात्कार हुआ। वहीं उड़ीसा में एक सातवीं कक्षा की लड़की का विद्यालय की हैडमिस्ट्रेस के पति ने बलात्कार किया। मामला लड़की के 3 माह गर्भवती होने के बाद सामने आया। केरल में एक लड़के ने 12 साल की नाबालिग लड़की का बलात्कार किया। झारखण्ड में कानून की पढ़ाई कर रही एक लड़की को सामूहिक बलात्कार कर मार दिया गया।

दिल्ली के गुलाबी बाग में एक 55 साल की महिला को बलात्कार कर मार डाला। वहीं बिहार में एक टीनेजर का सामूहिक बलात्कार हुआ, उसे मार डाला और बाद में जला दिया। राजस्थान के खेरली गांव में एक छह साल की लड़की का स्कूल से लौटते वक्त पड़ोस में रहने वाले व्यक्ति ने बलात्कार किया और फिर उस ही के बेल्ट से गला दबाकर उसे मार डाला।

आज से 6 साल पहले दिल्ली में एक बस में हुए बलात्कार ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। निर्भया कहे जाने वाले इस केस ने भारत में बलात्कार के विरूद्ध सख्त कानून बनाने को मजबूर किया। महिलाओं की सुरक्षा पर काम करने के लिए 'निर्भया फंड' बनाया गया लेकिन हाल ही में सामने आया कि, निर्भया फंड का लगभग 90 फीसदी हिस्सा वैसा ही पड़ा हुआ है। भारत की राजधानी दिल्ली में तक इस फंड का केवल पांच प्रतिशत हिस्सा इस्तेमाल किया गया।

वहीं एनसीआरबी द्वारा जारी 2017 की रिपोर्ट में सामने आया कि, महिलाओं के खिलाफ अपराधों का क्राइम रेट 13.9 फीसदी है। इस वर्ष उनके खिलाफ 86,001 अपराध हुए। इनमें से 32,334 केस बलात्कार के हैं। यहां यह बात भी ध्यान रखने योग्य है कि, भारत के न्यायालयों में 1 लाख से अधिक बलात्कार के केस विचाराधीन हैं। उस पर पुलिस और प्रशासन की लापरवाही के कारण इन मामलों में पीड़ित और उसका परिवार न्याय की आस में इधर-उधर की ठोकरें खाता फिरता है।

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