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स्कूलों में फेक न्यूज़ जागरूकता कार्यक्रम
स्कूलों में फेक न्यूज़ जागरूकता कार्यक्रम|BBC
दक्षिण भारत

केरल: किताबों के इतर स्कूलों में फेक न्यूज़ पर दिए जाते हैं लेक्चर

फेक न्यूज़ के खिलाफ केरल राज्य ने अहम कदम उठाया है। फेक न्यूज़ के इस दौर का खत्म करने के अभियान में बच्चे भी भाग ले रहे हैं।

रवीना शशि मिंज

राज एक्सप्रेस। ये काल सोशल मीडिया का है और फेक न्यूज का भी। सोशल मीडिया का उपयोग तीव्रता से बढ़ता जा रहा है। साथ ही देश में फेक न्यूज का सिलसिला भी उसी तीव्रता से बढ़ रहा है।

अक्सर देखा जाता है वॉट्सअप पर आने वाली हर खबर को हम हकीकत मान लेते हैं। जाँच पड़ताल किए बिना ही फॉर्वर्ड कर देते हैं। हमारी ही तरह कई लोग भी ऐसा ही कर रहे हैं। असली तथ्यों से दूर भ्रामक तथ्यों को पढ़कर हम उसमें ही भरोसा करने लगे हैं। बता दें कि, फेक न्यूज ने कई हिंसात्मक गतिविधियों को जन्म दिया है।

हर वर्ग को असली और फेक न्यूज की समझ होना बेहद जरूरी है। फेक न्यूज़ संबंधित कई जागरूक कार्यक्रम आयोजित हो भी रहे हैं, लेकिन इन कार्यक्रम में 18 से अधिक उम्र वाले टारगेट लोग हैं। बच्चों को कहीं न कहीं दरकिनार ही रखा जाता है।

बच्चों में भी फेक न्यूज का प्रभाव देखा गया है इसलिए केरल राज्य ने एक बड़ा कदम उठाया है। केरल के एक जिले के 150 स्कूल में बच्चों में फेक न्यूज को पहचाने के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाया जा रहा है।

बीबीसी की खबर के अनुसार केरला के कन्नूर जिले में कुल 600 सरकारी स्कूल हैं उनमें से आज 150 स्कूलों में फेक न्यूज के प्रति अवेयरनेस प्रोग्राम 'फेक न्यूज क्लासेस' संचालित की जा रही हैं।

'फेक न्यूज क्लासेस' 40 मिनट की होती हैं। यह क्लासेस अंग्रेजी और मलयालम दोनों भाषाओं में ली जाती हैं। वाट्सअप पर सर्कुलेट हो रही फेक न्यूज के बारे में बताया जा रहा है।

"फेक न्यूज पूरी तरह से गलत सूचना हैं। ऐसे फोटो और वीडियो जानबूझकर जनता को भ्रमित करने, सामूहिक आतंक फैलाने, हिंसा भड़काने और ध्यान आकर्षित करने के लिए बनाए जाते हैं।''

अमृता विद्यालयं

इसके अलावा टीचर्स अपने विद्यार्थियों को वाट्सअप में आने वाले मैसेज पर सवाल पूछने और क्रोस चेक करने की सलाह दे रहे हैं।

फेक न्यूज से लाखों बच्चों की जान खतरे में

दरअसल पिछले साल सोशल मीडिया पर एक न्यूज फैलाई जा रही थी कि, टीकाकरण से बच्चों के स्वास्थ पर दुष्प्रभाव होगा। इस वायरल मैसेज के कारण 2.4 लाख बच्चों के अभिभावकों ने टीकाकरण का बहिष्कार किया। जिसके कारण टीकाकरण का काम 2 महीने के लिए रूक गया और इसका भुगतान हज़ारों बच्चों को भुगतना पड़ा।

इस घटना के बाद कन्नौर और भारत के कई क्षेत्रों में फेक न्यूज़ स्कूलों में भी पढ़ाने का निर्णय लिया गया।

"मुझे विश्वास है कि, यदि हम अपने बच्चों में जाँच पड़ताल करने की जिज्ञासा बढ़ाएं तो हम जरूर फेक न्यूज की जंग से जीत सकते हैं।"

मीर मोहम्मद अली (अधिकारी)

कन्नौर जिले के वरिष्ठ अधिकारी मीर मोहम्मद अली का कहना है टीकाकरण वाले इस हादसे के बाद जिला प्रशासन हरकत में आई। हमें लगा कि, फेक न्यूज के खिलाफ बच्चों को स्कूलों में जागरूक करना चाहिए क्योंकि, अभिभावकों को वाट्सअप पर मिलने वाले मैसेज ही अंतिम सत्य लगता है।

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