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सबरीमाला मंदिर में प्रेवश करने की कोशिश में एक महिला पर मिर्च स्प्रे से हमला किया गया।
सबरीमाला मंदिर में प्रेवश करने की कोशिश में एक महिला पर मिर्च स्प्रे से हमला किया गया।|Social Media
दक्षिण भारत

सबरीमाला: संविधान दिवस पर 'असमानता', महिला पर मिर्च स्प्रे से हमला

संविधान की प्रस्तावना में ही समानता का ज़िक्र लेकिन संविधान दिवस की 70वीं वर्षगांठ पर, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद सबरीमाला मंदिर में एक महिला को मंदिर में नहीं मिला प्रवेश।

रवीना शशि मिंज

राज एक्सप्रेस। केरल के सबरीमाला मंदिर में प्रवेश करने की कोशिश कर रही एक महिला कार्यकर्ता पर मिर्च स्प्रे से हमला किया गया। महिला कार्यकर्ता का नाम बिंदू अम्मिनी है, अम्मिनी जब सबरीमाला मंदिर में घुसने की कोशिश कर रहीं थीं तब उन पर मिर्च स्प्रे से हमला किया गया।

यह घटना पुलिस कमिश्नर के ऑफिस के बाहर की है। पूरा घटनाक्रम मोबाइल फोन में रिकॉर्ड भी हुआ है, जिसमें देखा जा सकता है कि, अम्मिनी अपने चेहरे को छुपाकर उस युवक से दूर भाग रही है। घटना के बाद महिला कार्यकर्ता बिंदू को अस्पताल ले जाया गया।

महिला अधिकार कार्यकर्ता तुप्ति देसाई और कुछ अन्य कार्यकर्ता मंगलावर सुबह सबरीमाला मंदिर दर्शन के लिए कोच्चि अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरी जहाँ से उन्हें कोच्चि शहर के पुलिस आयुक्तालय ले जाया गया।

कार्यकर्ता तृप्ती देसाई ने कहा 'संविधान दिवस के अवसर पर 26 नवम्बर को वे लोग मंदिर में पूजा करना चाहेंगी।'

‘मैं मंदिर में पूजा करने के बाद ही केरल से जाऊंगी।'

तुप्ति देसाई ( महिला अधिकार कार्यकर्ता)

महिला कार्यकर्ता देसाई ने कहा उच्चतम न्यायालय के 2018 में सभी आयुवर्ग की महिलाओं को सबरीमाला मंदिर में प्रवेश की अनुमति देने के आदेश के साथ वह यहां पहुंची हैं। देसाई पिछले साल नवंबर में भी मंदिर में प्रवेश करने की असफल कोशिश कर चुकी हैं।

कोर्ट में है मामला

  • साल 1990 में 10-50 साल के बीच उम्र की महिलाओं को मंदिर परिसर में प्रवेश नहीं दिए जाने का मामला सामने आया था। इसे रोकने के लिए केरल हाईकोर्ट में याचिका लगाई गई थी। कोर्ट ने भी इस परंपरा को सही ठहराया था।

  • 2006 में इस निर्णय को चुनौती मिली और तब से सबरीमाला बार-बार सुर्खियों में आने लगा।

  • 2007 में केरल की लेफ्ट की सरकार ने हाईकोर्ट के निर्णय के खिलाफ दायर यंग लॉयर एसोसिएशन की याचिका के समर्थन में हलफनामा दाखिल किया।

  • 2016 फरवरी में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट की सरकार आने के बाद महिलाओं को प्रेवश देने की मांग पलट गई।

  • 2017 में यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा। 28 सिंतबर को सुनवाई के बाद संविधान पीठ ने महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति दे दी थी।

  • सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद केरल के राजपरिवार और मंदिर के मुख्य पुजारियों समेत कई हिंदू संगठनों ने पुर्नविचार याचिका दायर की थी।

  • 14 नवंबर 2019 को पुर्नविचार याचिका पर फिर सुनवाई होने के बाद सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले का 3 जजों ने समर्थन किया, जबकि 2 विपक्ष में थे। जिसके बाद मामला सात जजों की बेंच के पास भेज दिया गया। कोर्ट ने ये भी कहा कि अंतिम फैसले तक उसका पिछला आदेश बरकरार रहेगा।

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