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Sujith Wilson
Sujith Wilson|Social Media
दक्षिण भारत

तमाम कोशिशों व दुआओं के बाद भी सुजीत को बचाने की कोशिशें नाकाम

तमिलनाडु के एक गांव में 2 साल का मासूम सुजीत विल्सन 3-4 दिन बाद बोरवेल से बाहर निकाला, लेकिन इन वजहों से बच्‍चे को बचाए जाने की कोशिशें नाकाम रहीं, वह जिंदगी की जंग हार गया।

Priyanka Sahu

Priyanka Sahu

राज एक्‍सप्रेस। तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली जिले के एक गांव में 2 साल का मासूम बच्‍चा सुजीत विल्सन (Sujith Wilson) खेलते-खेलते बोरवेल में गिर गया था। मासूम बच्‍चा लगभग 3-4 दिनों तक धीरे-धीरे नीचे सरकते गया और 100 फीट की गहराई में जाकर फंस गया, हालांकि बच्चे को बचाने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) का बचाव अभियान लगातार उसी दिन से जारी था, लेकिन जब आज तड़के बच्‍चे को बाहर निकाला, तब तक बच्‍चा अपनी जिंदगी की जंग हार गया एवं आखिरकार उसने दम तोड़ दिया।

राजस्व प्रशासन के आयुक्त द्वारा मीडिया को सुजीत की मौत की सूचना दी गई, तमाम कोशिशों व दुआओं के बाद भी सुजीत काे नहीं बचाया जा सका। बोरवेल से बच्चे की लाश बाहर निकालने के बाद उसे मनाप्पराई सरकारी अस्पताल ले जाया गया।

मनाप्पराई सरकारी अस्पताल में शव को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया है।

इन वजहों से नाकाम हुईं कोशिशें :

मौके पर मौजूद सरकारी अधिकारियों का कहना- ''ये मशीनें नीचे जाकर बच्‍चे की कमर के आस-पास रस्‍सी लपेट देतीं और बच्‍चे को बाहर खींच लिया जाता, लेकिन लगातार होने वाली बारिश और गीली मिट्टी की वजह से ऐसा मुमकिन नहीं हो पाया, दूसरी वजह यह थी कि, बच्‍चा खुद इतना छोटा था कि रस्सियां पकड़ नहीं सकता था।''

बच्चों को निकालने में देरी खराब मौसम और भूगर्भीय स्थिति की वजह से हुई। बच्चे की बॉडी गली-सड़ी अवस्था में है, बॉडी इतनी बुरी तरह गल गई थी कि, कुछ हिस्से को दोबारा निकाला गया। सभी वरिष्ठ अधिकारी और मंत्री यहां डेरा डाले हुए थे, हमें ओएनजीसी अधिकारी और एलएंडटी अधिकारियों से भी सुझाव मिले थे, जो गहरे कुएं खोदने में विशेषज्ञ हैं।
एनडीआरएफ कमांडर जितेश टीएम