Supreme Court Decision On Lawyers-Prisoners
Supreme Court Decision On Lawyers-Prisoners|Priyanka Sahu -RE
भारत

कोविड-19: सुप्रीम कोर्ट का वकीलों-कैदियों को लेकर अहम फैसला

कोरोना वायरस के खतरे के कारण अब देश की सर्वोच्च न्यायालय ने भी अहम मामलों की सुनवाई, वकीलों और कैदियों को लेकर कुछ अहम फैसले लिए हैं । जानें क्‍या हैं कोर्ट के आदेश?

Priyanka Sahu

Priyanka Sahu

हाइलाइट्स :

  • कोविड-19 के संक्रमण के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

  • सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों के चैंबर सील करने के दिए आदेश

  • भीड़ कम करने हेतु रिहा किए जा सकते हैं कुछ कैदी

  • अब वीडियो कांफ्रेंसिंग के ज़रिए की जाएगी सुनवाई

राज एक्‍सप्रेस। भारत में दिन प्रति दिन पैर पसारते जा रहे जानलेवा 'कोरोना वायरस' के खतरे को देखते हुए अब देश की सर्वोच्च न्यायालय ने कुछ अहम फैसले लिए हैं और ये आदेश जारी किए हैं। जानिए सुप्रीम कोर्ट ने क्‍या-क्‍या आदेश व निर्देश जारी किए हैं...

वकीलों के चैंबर सील :

सुप्रीम कोर्ट द्वारा वकीलों को लेकर ये आदेश जारी किए हैं कि, ''उनके (वकीलों) चैंबर कल शाम 5 बजे से सील कर दिए जाएंगे। सभी वकीलों को अपने घर से ही काम करना है।'' साथ ही सुप्रीम कोर्ट का ये कहना भी है कि, अब बेहद ज़रूरी मामलों की सुनवाई वीडियो कांफ्रेंसिंग के ज़रिए की जाएगी।

सजायाफ्ता/विचाराधीन कैदी रिहा :

कोरोना वायरस (COVID-19) के चलते जेलों में भीड़ कम करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का एक अहम निर्णय ये भी है कि, कई कैदी रिहा हो सकते हैं। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों से फैसला लेने के लिए कहा है कि, ''किन सजायाफ्ता /विचाराधीन कैदियों को कुछ समय के लिए रिहा कर सकते हैं। इसके लिए देश की शीर्ष अदालत ने सुझाव भी दिया है।''

कोर्ट द्वारा दिए गए सुझाव :

  • 7 साल से कम की सज़ा पाए और छोटे अपराधों में विचाराधीन कैदियों को 6 हफ्ते की पैरोल दी जा सकती है।

  • इस तरह जेलों में मौजूद कैदियों की भीड़ भी कम हो सकेगी और जेलों पर बोझ कम होगा।

SC ने सरकार की कोशिशों की तारीफ की:

इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना के खिलाफ सरकार की कोशिशों की तारीफ भी की है व सरकार को सुविधाएं बढ़ाने का निर्देश देने वाली याचिका पर CJI ने कहा, “सरकार बहुत अच्छा काम कर रही है। उसके आलोचक तक यही कह रहे हैं। उन्हें काम करने दीजिए।“ कोर्ट ने याचिका सरकार को सौंपी और कहा, इन बिंदुओं पर भी गौर कर लिया जाए।

वहीं दूसरी ओर दिल्ली उच्च न्यायालय ने भी 27 मार्च तक कोविड-19 के संक्रमण के मद्देनजर हवाई यातायात नियंत्रकों के लिए ट्यूब प्रक्रिया के जरिए ‘ब्रेथ एनेलाइजर टेस्ट’ को सस्पेंड किया है। साथ ही अधिकारियों को ‘ब्रेथ एनेलाइजर टेस्ट’ का वैकल्पिक तरीका खोजने के लिए मंगलवार को तत्काल बैठक आयोजित करने का निर्देश दिया है।

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