सुप्रीम कोर्ट ने IIT में हो रहे SC, ST से भेदभाव मामले में केंद्र सरकार को भेजा नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने भेदभाव मामले में केंद्र सरकार को भेजा नोटिसSocial Media

सुप्रीम कोर्ट ने IIT में हो रहे SC, ST से भेदभाव मामले में केंद्र सरकार को भेजा नोटिस

पिछले दिनों IIT संस्थानों में आरक्षण नियमों की कथित अनदेखी एवं विद्यार्थियों को प्रताड़ित करने की ख़बरें सामने आई थी। इस मामले में अब सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी IIT संस्थानों को नोटिस जारी किया है।

नई दिल्ली, भारत। आज देश में लगभग हर जगह लोग अपनी म्हणत के डैम पर ही पद प्राप्त करते है। हालांकि, कुछ लोगों को आरक्षण का लाभ भी मिलता है, लेकिन इस पर भेदभाव करना एक प्रकार का अपराध है, लेकिन पिछले दिनों भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IIT) में आरक्षण नियमों की कथित अनदेखी एवं विद्यार्थियों को प्रताड़ित करने की ख़बरें सामने आई थी। इस मामले में अब सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी IIT संस्थानों को नोटिस जारी किया है।

सुप्रीम कोर्ट का केंद्र को नोटिस :

दरअसल, पिछले दिनों भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IIT) में आरक्षण नियमों की कथित अनदेखी एवं विद्यार्थियों को प्रताड़ति करने की ख़बरें सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट तुरंत एक्शन में नजर आई। इसी कड़ी में SC ने देश के सभी भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IIT) में आरक्षण नियमों की अनदेखी करने और विद्यार्थियों को प्रताड़ित करने के आरोपों को लेकर केंद्र सरकार को बुधवार को नोटिस जारी किया है। साथ ही उन्हें इस पर जबाव देने को कहा है।

रिट याचिका पर सुनवाई :

बताते चलें, इस मामले में एक रिट याचिका पर सुनवाई जस्टिस एल. एन. राव, जस्टिस बी. आर. गवई और जस्टिस बी. वी. नागरत्ना की पीठ ने की। इसके बाद केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया गया। इस मुद्दे पर याचिका दायर करने वाले याचिकाकर्ता डॉ सच्चिदानंद पांडेय की सभी 23 IIT में भर्ती एवं दाखिले में समुचित तरीके से आरक्षण की नीति लागू करने के लिए केंद्र को निर्देश देने की मांग पर केंद्र सरकार को अपना जवाब देने को कहा है। वकील अश्वनी कुमार दुबे ने डॉ पांडेय की ओर से दायर याचिका में आरक्षण लागू करने में भेदभाव के अलावा प्रताड़ित और इसकी वजह से बड़ी संख्या में होनहार विद्यार्थियों के खुदकुशी करने जैसे कई गंभीर आरोप लगाये गये हैं।

याचिकाकर्ता ने लगाए आरोप :

याचिकाकर्ता ने अनुसूचित जाति (आरोप), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछली जातियों के संकाय सदस्यों की भर्ती और शोध विद्यार्थियों के दाखिले में कथित तौर पर कानून की अनदेखी तथा प्रताड़ित करने के आरोप लगाये गए हैं। याचिकाकर्ता ने विभिन्न माध्यमों की खबरों का हवाला देते हुए आरोप लगाया है कि करीब 2400 विद्यार्थी जातीय आधार पर प्रताड़ित करने एवं अन्य अज्ञात कारणों से बिना डिग्री लिये आईआईटी छोड़कर भागने को मजबूर हुए हैं, जबकि 50 की मौत हुई है। आश्चर्य यह कि इस मामले में देश के इन प्रतिष्ठित संस्थाओं की ओर से कभी भी वास्तविक कारण नहीं बताये गये।

याचिका में कहा गया :

गौरतलब है कि, संसद में 2018 में आंकड़े पेश किये गये थे। उन आंकड़ों का हवाला देते हुए याचिका में कहा गया है कि, 'विभिन्न IIT में 6043 संकाय सदस्य हैं, जिनमें मात्र 21 ST और 149 SC से आते हैं। याचिकाकर्ता ने संकाय सदस्यों के कामकाज के मूल्यांकन तथा तय मानकों के मुताबिक काम नहीं करने वालों को हटाने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की एक कमेटी गठित करने का आदेश केंद्र को देने की मांग की गई है।

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