भूमि अधिग्रहण पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
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भूमि अधिग्रहण पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

भूमि अधिग्रहण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। जानिए क्या है इस नए फैसले का सार।

Rishabh Jat

राज एक्सप्रेस। सुप्रीम कोर्ट न कहा है कि, भूमि अधिग्रहण कानून के तहत वही अधिग्रहण प्रक्रिया रद्द होगी जहां सरकार ने 5 साल के अंदर न तो भूमि पर कब्जा किया हो और न ही मुआवजा दिया हो। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, अगर 5 साल के अंदर ज़मीन पर कब्जा कर लिया लेकिन मुआवजा नहीं दिया गया इस सूरत में जमीन अधिग्रहण रद्द नहीं होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने भूमि अधिग्रहण पर कहा कि, मुआवजा लेने से इंकार वाले जमीनों के मालिक अधिग्रहण रद्द करने का दबाव नहीं बना सकते। ये फैसला जस्टिस अरूण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच जजों की पीठ ने सुनाया। बता दें कि, ये फैसला इससे पहले अलग-अलग सरकारों द्वारा किए गए भूमि अधिग्रहण पर प्रभाव डालेगा। भूमि अधिग्रहण कानून 1894 के पुराने कानून में किसी भी सरकारी उद्देश्य के लिए अर्जेंसी क्लॉज का इस्तेमाल कर सरकार भूमि अधिग्रहित कर लेती थी। नए कानून में इसे सीमित कर दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी माना है कि अगर अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होने के बाद सरकार ने अपनी तरफ से मुआवजे का ऐलान कर दिया है और उसे सरकारी कोष में जमा करा दिया गया है, तो यह जरूरी नहीं होगा की उसे कोर्ट में जमा कराया जाए। एक पुराने फैसले के तहत इस बात का प्रावधान किया गया था कि, अगर किसान मुआवजा नहीं ले रहा है तो सरकार को उसे कोर्ट में जमा करवाना चाहिए, नहीं तो अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी नहीं मानी जाएगी। अब संविधान पीठ ने कहा है कि अगर सरकार ने मुआवजे के लिए स्वीकृत राशि अपने कोष में जमा करा रखी है तो फिर भूमि मालिक की तरफ से वहां से पैसा नहीं उठाना सरकार की गलती नहीं मानी जाएगी।

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