शिक्षक भर्ती घोटाला : जानिए कौन है अर्पिता मुखर्जी और कैसे हुआ मामले का खुलासा?

ईडी ने अर्पिता मुखर्जी के फ्लैट से 29 करोड़ कैश और 5 किलो सोना बरामद किया है। इससे पहले 23 जुलाई को भी 21 करोड़ रुपए कैश और 1 करोड़ रुपए की ज्वेलरी मिली थी।
कौन है अर्पिता मुखर्जी
कौन है अर्पिता मुखर्जीSocial Media

राज एक्सप्रेस। पश्चिम बंगाल के शिक्षक घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) लगातार कार्रवाई कर रहा है। बुधवार को भी ईडी ने इस मामले को लेकर तीन जगहों पर छापेमारी की थी। इस दौरान ईडी को अर्पिता मुखर्जी के बेलघरिया स्थित एक और फ्लैट से 29 करोड़ कैश और 5 किलो सोना सहित अन्य चीजें मिली है। बता दें कि इससे पहले 23 जुलाई को भी ईडी ने इस मामले में छापेमारी की थी और उस दौरान भी ईडी को अर्पिता के घर से 21 करोड़ रुपए कैश और 1 करोड़ रुपए की ज्वेलरी मिली थी।

कौन हैं अर्पिता मुखर्जी?

बता दें कि अर्पिता मुखर्जी कुछ समय के लिए बांग्ला फिल्मों की एक्ट्रेस रही हैं। उन्होंने कई फिल्मों में साइड रोल किए हैं। इसके अलावा वह ओडिया और तमिल फिल्मों में भी काम कर चुकी हैं। अर्पिता मुखर्जी को पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री रहे पार्थ चटर्जी का अति करीबी माना जाता है। अर्पिता मुखर्जी साल 2019 और साल 2020 में पार्थ चटर्जी द्वारा आयोजित दुर्गा पूजा का चेहरा भी रह चुकी हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अर्पिता मुखर्जी ने खुलासा किया है कि, ‘उनके घर में मिला सारा पैसा पार्थ चटर्जी का है।’

शिक्षक घोटाला क्या है?

कथित तौर पर यह घोटाला साल 2014 से साल 2021 के बीच हुआ है। इस दौरान पार्थ चटर्जी पश्चिम बंगाल सरकार में शिक्षा मंत्री थे। उन पर आरोप है कि उन्होंने रिश्वत लेकर शिक्षकों की भर्ती की थी।

ऐसे हुआ खुलासा?

20 शिक्षकों की भर्ती के लिए साल 2016 में स्कूल सेवा आयोग की परीक्षा आयोजित की गई थी। इस परीक्षा में बबीता सरकार नाम की उम्मीदवार 20वें नंबर पर आई थी। इसके बाद स्कूल सेवा आयोग ने वह सूची रद्द करके नई सूची जारी कर दी, जिसमें बबीता सरकार 21वें नंबर पर चली गई और TMC के विधायक परेश अधिकारी की बेटी अंकिता पहले नंबर पर आ गई। इसके बाद बबीता कोर्ट चली गई। कोर्ट ने जब अंकिता और बबीता की मार्कशीट देखी तो पता चला कि बबीता के मुकाबले अंकिता को 16 नंबर कम मिले हैं, इसके बावजूद उसे उसका नाम टॉप पर आ गया। इसके बाद कोर्ट ने अंकिता को हटाकर बबीता को नौकरी देने का आदेश दिया और साथ ही इस मामले की जांच के लिए रिटायर्ड न्यायमूर्ति रंजीत कुमार बाग की अध्यक्षता में एक समिति बना दी। इस समिति ने अपनी रिपोर्ट में शिक्षक घोटाले की पुष्टि की थी। जिसके बाद मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई।

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