जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ और डोडा में महसूस किए गए भूकंप के झटके, मापी गई इतनी तीव्रता

जम्मू कश्मीर (Jammu and Kashmir) से आज गुरुवार को बड़ी खबर सामने आई है। बता दें, जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ और डोडा में भूकंप के झटके (Earthquake) महसूस किए गए हैं।
जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ और डोडा में महसूस किए गए भूकंप के झटके
जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ और डोडा में महसूस किए गए भूकंप के झटकेSocial Media

श्रीनगर, भारत। जम्मू कश्मीर (Jammu and Kashmir) से आज गुरुवार को बड़ी खबर सामने आई है। बता दें, जम्मू कश्मीर में भूकंप के झटके (Earthquake) महसूस किए गए हैं। खबरों के अनुसार, जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ और डोडा में भूकंप के झटके महसूस किए गए है। भूकंप के तेज झटकों से यहां की धरती कांप उठी। इसकी जानकारी नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (National Center for Seismology) ने दी है।

मिली जानकारी के अनुसार, भूकंप के ये झटके आज सुबह 7 बजकर 52 मिनट पर महसूस किए गए। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के मुताबिक भूकंप की गहराई जमीन से 10 किमी नीचे थी। ये झटके कटरा से 62 किलोमीटर उत्तर पूर्व के तरफ आए। बताया जा रहा है कि, जम्मू कश्मीर के डोडा (Doda) और किश्तवाड़ (Kishtwar) में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं।

मापी गई इतनी तीव्रता:

नेशनल सिस्मोलॉजी के मुताबित, रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 3.5 की स्पीड रही। यह झटका सुबह 7.52 मिनट के आसपास महसूस किया गया है। हाल के दिनों में जम्मू-कश्मीर में भूकंप आने की रफ्तार काफी बढ़ गई है। करीब दो हफ्ते पहले डोडा जिले में भूकंप के दो हल्के झटके महसूस किए गए थे, हालांकि इनकी तीव्रता काफी कम थी।

भूकंप की स्थिति में क्या करें, क्या न करें:

  • भूकंप आने पर आप घर से बाहर हैं तो ऊंची इमारतों, बिजली के खंभों आदि से दूर रहें।

  • भूकंप के झटके महसूस बंद होने तक बाहर ही रहें।

  • यदि आप गाड़ी चला रहे हो तो, गाड़ी को रोक लें और गाड़ी में ही बैठे रहें।

  • पुल या सड़क पर जाने से बचें।

  • भूकंप आने के वक्त यदि आप घर में हैं तो फर्श पर बैठ जाएं।

  • यदि आप घर से बाहर नहीं निकल सकते तो, घर के किसी कोने में चले जाएं।

  • घर में कांच, खिड़कियों, दरवाज़ों और दीवारों से दूर रहें।

  • भूकंप के समय लिफ्ट का इस्तेमाल करने से बचें।

क्यों आता है भूकंप:

वहीं, अगर भूकंप आने के कारणों के बारे में बात करे, तो धरती मुख्य तौर पर चार परतों से बनी होती है। इनर कोर, आउटर कोर, मैन्टल और क्रस्ट। क्रस्ट और ऊपरी मैन्टल कोर को लिथोस्फेयर कहते हैं। ये 50 किलोमीटर की मोटी परत कई वर्गों में बंटी हुई है, जिसे टैक्टोनिक प्लेट्स कहते हैं। ये टैक्टोनिक प्लेट्स अपनी जगह पर कंपन करती रहती हैं और जब इस प्लेट में बहुत ज्यादा कंपित हो जाती हैं, तो भूकंप के झटके महसूस होते हैं।

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