UP के CM योगी ने बागपत को 311 विकास परियोजनाओं की दी सौगात
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UP के CM योगी ने बागपत को 311 विकास परियोजनाओं की दी सौगात

उत्‍तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज जनपद बागपत में ₹351 करोड़ की 311 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास किया। साथ ही विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को टैबलेट/प्रमाण पत्र वितरित किए।

हाइलाइट्स :

  • बागपत में CM योगी ने 311 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास किया

  • CM योगी ने विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को टैबलेट/प्रमाण पत्र वितरित किए

  • बागपत में CM योगी ने सभा को भी किया संबोधित

उत्‍तर प्रदेश, भारत। उत्‍तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज गुरुवार को जनपद बागपत को बड़ी सौगात दी। यहां उन्‍होंने ₹351 करोड़ की 311 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास किया। साथ ही विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को टैबलेट/स्मार्टफोन/प्रमाण पत्र वितरित किए। तो वहीं, इससे पहले CM योगी आदित्यनाथ ने बागपत के नांगल भगवानपुर गांव पहुंचक श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ भी किया।

CM योगी ने सभा को किया संबोधित :

दरअसल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा आज बागपत में सड़कों, स्कूल भवनों की मरम्मत, ओवरब्रिज, रोडवेज बस स्टैंड, अस्पताल व अन्य विकास कार्यों का शिलान्यास और लोकार्पण किया गया है। इस मौके पर उन्‍होंने यहा सभा को संबोधित करते हुए कहा- "सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है, किसी बेटी की सुरक्षा के साथ किसी उचक्के को खिलवाड़ करने की छूट नहीं देंगे... जो भी खिलवाड़ करेगा, इसकी कीमत चुकाएगा। किसी किसान की संपत्ति पर कोई जबरन कब्जा नहीं कर पाएगा, किसी व्यापारी का कोई जबरन उत्पीड़न नहीं कर पाएगा और जो करेगा उसे ब्याज समेत इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी... ये युवा ऊर्जा से भरपूर है और प्रतिभा संपन्न है। इसकी ऊर्जा और प्रतिभा का लाभ हमें प्रदेश और देश के विकास के लिए लेना है। इसलिए उस युवा को अवसर मिलने चाहिए।''

बागपत की धरती महाभारत कालीन कही जाती है, ऐसा माना जाता है पांडवो को जो 5  गांव जमीन मिली थी,उसमे एक बागपत भी था। भारत में पर्व त्योहार हर्ष उल्लास के होते है, इसमे दुख की कोई जगह नही, शोक की कोई जगह नही है। वहीं अच्छा सोचने अच्छा करने से परिणाम अच्छा ही होता है, सत्य न्याय का दोतक विजयदशमी है।

उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ

आगे उन्‍होंने कहा, इस धरती का सौभाग्य है, जिसने भारत के इतिहास को बनते हुए देखा, ये वही धरती है जहां महाभारत हुआ था। उस महायुद्ध के बाद मानवता लहू लुहान हो चुकी थी, तब भगवान वेदव्यास ने महाभारत रूपी महाकाव्य की रचना की थी।

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