उत्तरायणी कौथिग में राजनाथ सिंह
उत्तरायणी कौथिग में राजनाथ सिंहRaj Express

उत्तरायणी कौथिग में राजनाथ सिंह का संबोधन- समान नागरिक संहिता लागू करने वाला पहला राज्य बनने जा रहा उत्तराखंड

उत्तरायण के अवसर पर आज लखनऊ में आयोजित ‘उत्तरायणी कौथिग’ में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा, उत्तराखंड समान नागरिक संहिता लागू करने वाला पहला राज्य बनने जा रहा है।

हाइलाइट्स :

  • लखनऊ में आयोजित ‘उत्तरायणी कौथिग’ में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

  • उत्तराखंड समान नागरिक संहिता लागू करने वाला पहला राज्य बनने जा रहा: राजनाथ सिंह

  • राजनाथ सिंह ने कहा, राज्य में कनेक्टिविटी बढ़ाने का काम तेजी से चल रहा है

उत्तर प्रदेश, भारत। उत्तरायण के अवसर पर आज रविवार को लखनऊ में आयोजित ‘उत्तरायणी कौथिग’ में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शामिल हुए। इस दौरान राजनाथ सिंह ने कार्यक्रम को संबोधित कर अपने संबोधन में कहा कि, उत्तराखंड समान नागरिक संहिता लागू करने वाला पहला राज्य बनने जा रहा है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 'उत्तरायण' के अवसर पर आयोजित 'उत्तरायणी कौथिग' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, "उत्तरायणी कौथिग से मेरा अब एक अटूट रिश्ता जुड़ चुका है। मुझे कई बार इस मेले में आने का अवसर मिला है और हर बार मुझे उत्तराखंडी समाज के जिस समृद्ध स्वरूप के दर्शन होते है, वह मेरे लिए अविस्मरणीय है। वैसे तो मकर संक्रांति के अवसर पर पूरे देश में अलग-अलग नाम से यह पर्व मनाया जाता है, मगर जिस उत्साह और ऊर्जा के साथ आप लोग उत्तरायणी कौथिग में हिस्सा लेते है, उसके दर्शन कम से कम उत्तर प्रदेश और आस-पास के प्रदेशों में कम ही होते है।"

यह संयोग मात्र नही है कि उत्तराखण्ड को जहां देवभूमि माना गया है वहीं उसे वीर भूमि भी कहा जाता है। इतना ही नही अब उत्तराखण्ड ‘विकास भूमि’ के रूप में भी इस देश में स्थापित हो रहा है। विशेषरूप से पिछले लगभग सात वर्षों में उत्तराखण्ड ने उल्लेखनीय प्रगति की है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

  • उत्तराखण्ड समाज के साथ तो मेरा व्यवहारिक, कार्यकारी और आध्यात्मिक रिश्ता तो है ही, साथ ही पारिवारिक रिश्ता भी है। आप सब लोग मेरे बड़े परिवार का ही हिस्सा है।

  • उत्तर प्रदेश और उत्तराखण्ड के बीच भी एक पारिवारिक रिश्ता है। उत्तर प्रदेश के पर्वतीय इलाकों को अलग करके 2000 में ही उत्तराखण्ड नया राज्य बना। दोनों प्रदेशों के बीच काफ़ी आत्मीयता है। आप जानते ही है कि विभाजन के बाद कैसे राज्यों के बीच रिश्तों में कड़वाहट भर जाती है।

  • आप दक्षिण में आन्ध्र प्रदेश और तेलंगाना का ही उदाहरण देख लीजिए। विभाजन को दस साल बीत चुके हैं] मगर बहुत सारे मुद्दे लंबित होने के कारण दोनों राज्यों के बीच रस्साकशी चलती रहती है। इसके ठीक उलट उत्तर प्रदेश और उत्तराखण्ड के बीच हमेशा संबंध मधुर बने रहे।

  • आज उत्तराखण्ड समृद्ध विरासत और सशक्त विकास के बल पर भारत के तेजी से विकसित होते राज्यों की कतार में शामिल हो चुका है। उत्तराखण्ड के विकास का स्वरूप कितना भव्य और कितना दिव्य होने जा रहा है, इसका अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि उत्तराखण्ड में हर तरह की कनेक्टीविटी देने के लिए बहुत बड़े स्केल पर काम हो रहा है।

  • चार धाम महामार्ग की चर्चा आपने सुनी होगी। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस वे के माध्यम से दिल्ली से देहरादून की दूरी मात्र दो ढ़ाई घंटे की होने जा रही है। रेल कनेक्टीविटी की दृष्टि से ऋषिकेश-कर्ण प्रयाग रेल लाईन पर काम चल रहा है। एयर कनेक्टीविटी की दृष्टि से देराहदून और पंत नगर दोनों एयरपोर्टस को Expand किया जा रहा है। प्रदेश में हेलीकॉप्टर टैक्सियों का नेटवर्क बढ़ाया जा रहा है। यही स्थिति उत्तर प्रदेश में भी है। पूरे देश में सबसे अधिक एक्सप्रेस वे यदि कही है तो उत्तर प्रदेश में है। कानून एवं व्यवस्था की दृष्टि से दोनों राज्य बहुत अच्छी स्थिति में हैं।

  • उत्तर प्रदेश में रहने वाला उत्तराखंडी समाज उत्तर प्रदेश और उत्तराखण्ड के बीच का ‘मानवीय सेतु’ है जो दोनों को जोड़ कर रख रहा है।

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