उप्र सरकार का दावा : नहीं करनी होगी मरीजों को इमरजेंसी में भागादौड़, बदलाव की तैयारी
उप्र सरकार का दावा : नहीं करनी होगी मरीजों को इमरजेंसी में भागादौड़, बदलाव की तैयारीSocial Media

उप्र सरकार का दावा : नहीं करनी होगी मरीजों को इमरजेंसी में भागदौड़, बदलाव की तैयारी

उत्तर प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर बनाने के लिये मौजूदा व्यवस्था मे व्यापक पैमाने पर बदलाव करने की तैयारी कर ली है। सरकार का दावा अस्पतालों मे 'लाईव इमरजेंसी मॉनिटरिंग सिस्टम' लागू करेंगे।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर बनाने के लिये मौजूदा व्यवस्था में व्यापक पैमाने पर बदलाव करने की तैयारी कर ली है। सरकार का दावा है कि इसके तहत देश में पहली बार अस्पतालों में 'लाईव इमरजेंसी मॉनिटरिंग सिस्टम' लागू किया जायेगा। साथ ही कोविड कमांड सेंटर की तर्ज पर 'इंटीग्रेटेड ट्रामा और इमरजेंसी सेंटर' की स्थापना होगी।

आधिकारिक सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि अब प्रदेश के सभी जिलों में हर स्थान पर महज एक फोन कॉल पर एंबुलेंस आएगी। मरीजों का हास्पिटल में तुरंत इलाज शुरू होगा। इलाज में देरी की समस्या से निपटने के लिये राज्य सरकार ने विश्व स्वास्थ्य संगठन और एम्स की ओर से स्वास्थ्यकर्मियों को दिशा में खास तौर पर प्रशिक्षित किया जायेगा जिससे अस्पताल में मरीज के पहुंचने के बाद भी इलाज शुरु होने में देरी होने का विश्लेषण (गैप एनालिसिस) कर इस समस्या को दूर किया जा सके।

स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि मरीजों को समय पर अस्पताल भेजने और समय पर इलाज शुरु करने के लिये एंबुलेंस और टेक्निकल स्टाफ में इजाफा कर इन्हें प्रशिक्षित किया जायेगा। 'इंटीग्रेटेड ट्रामा और इमरजेंसी सेंटर' की स्थापना के बारे में उन्होंने बताया कि इसकी क्षमता रोजाना 40 हजार कॉल अटेंड करने की होगी। इससे औसतन हर वर्ष तीन लाख मरीजों का इलाज होगा। सरकार ने इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए दो चरण वाली रणनीति बनायी है। इसके तहत मध्यावधि रणनीति को दिसंबर 2023 तक और दिसंबर 2026 तक दीर्घकालिक रणनीति लागू करने का लक्ष्य तय किया गया है। मध्यावधि योजना के तहत अगले दो वर्षों में कॉल सेंटर और मोबाइल ऐप तैयार होगा। साथ ही पहले, दूसरे और तीसरे दर्जे के चार-चार चिकित्सा केंद्रों को क्रियाशील किया जाएगा।

दीर्घकालिक योजना के तहत करीब चार हजार एंबुलेंस क्रियाशील की जायेंगी। साथ ही पहले दर्जे केे नौ आकस्मिक चिकित्सा केंद्र, दूसरे दर्जे के 10 और तीसरे दर्जे के 27 आकस्मिक चिकित्सा केंद्र क्रियाशील किए जायेंगे। पूरी योजना को लागू करने के लिए 47 मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों में ट्रामा सेंटर खोले जाएंगे। इसमें तीसरे और दूसरे दर्ज के मेडिकल कॉलेजों को पहले दर्जे के मेडिकल कॉलेज में अपग्रेड किया जाएगा। जिन चिकित्सा संस्थानों और मेडिकल कॉलेजों का होगा अपग्रेडेशन के लिये चिन्हित किया गया है, उनमें दिसंबर 2023 तक एसजीपीजीआई गोरखपुर, कानपुर, मेरठ, कन्नौज, बदायूं, अयोध्या, जिम्स नोएडा, बस्ती, शाहजहांपुर, फिरोजाबाद और बहराइच शामिल हैं। जबकि दिसंबर 2026 तक यूपीएमएस सैफई, आरएमएलआईएमएस आगरा, झांसी, प्रयागराज, चाइल्ड पीजीआई, बांदा, सहारनपुर, जालौन, आजमगढ़, अंबेडकरनगर, प्रतापगढ़, सिद्धार्थनगर, हरदोई, एटा, फतेहपुर, देवरिया, जौनपुर, मिर्जापुर, गाजीपुर और 14 अन्य मेडिकल कॉलेजों को अपग्रेड किया जाएगा।

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