प. बंगाल के राज्यपाल के रूप में सीवी आनंद ने ली शपथ
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प. बंगाल के राज्यपाल के रूप में सीवी आनंद ने ली शपथ, CM ममता बनर्जी भी रहीं मौजूद

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में सीवी आनंद बोस (CV Anand Bose) ने आज शपथ ग्रहण की। इस दौरान प्रदेश की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी व अन्य नेताओं से मुलाकात की।

पश्चिम बंगाल, भारत। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में सीवी आनंद बोस (CV Anand Bose) ने आज बुधवार को शपथ ग्रहण की। कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश प्रकाश श्रीवास्तव ने राजभवन में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्हें पद की शपथ दिलाई। इस मौके पर राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamta Banerjee) मौजूद रहीं। सीवी आनंद ने कोलकाता में राज्य के राज्यपाल के रूप में शपथ ग्रहण के बाद प्रदेश की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी व अन्य नेताओं से मुलाकात की।

ये नेता रहे मौजूद:

बता दें कि, सीवी आनंद बोस ने बुधवार को पश्चिम बंगाल के नए राज्यपाल के रूप में शपथ ली। राजभवन में एक कार्यक्रम में कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश प्रकाश श्रीवास्तव ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, राज्य के अन्य मंत्रियों और विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी की उपस्थिति में उन्हें पद की शपथ दिलाई। राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी हालांकि कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए।

जानकारी के लिए बता दें कि, बोस भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के 1977 बैच के केरल कैडर के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। उन्हें 17 नवंबर को पश्चिम बंगाल के नए राज्यपाल के तौर पर नामित किया गया था। उन्होंने इस पद पर ला गणेशन की जगह ली है।

विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने मामले पर कही यह बात:

प. बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने इस बारे में कहा कि, "राज्यपाल को बधाई देते हुए मैं कहना चाहता हूं कि, आज मैं और बंगाल के भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार राजभवन में शपथ समारोह के लिए पहुंचे थे लेकिन हमें दरवाज़े से लौटना पड़ा।"

नेता सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि, "पश्चिम बंगाल सरकार ने शपथ ग्रहण समारोह में बैठने के लिए राज्य के मंत्रियों के हिसाब से इंतज़ाम किए, अगर TMC सांसदों को आमंत्रित किया जा सकता है और वे सबसे आगे बैठ सकते हैं, तो सुकांत मजूमदार को क्यों नहीं आमंत्रित किया गया? वह भी सांसद हैं।"

नेता सुवेंदु अधिकारी ने आगे कहा कि, "यह एक अभद्र राजनीति का शर्मनाक उदाहरण कि, विपक्ष के नेता यानि मेरी कुर्सी विधायक कृष्णा कल्याणी और विश्वजीत दास जोकि BJP के टिकट पर चुने गए थे और बाद में TMC में चले गए थे उनके बगल में लगाई गई।"

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