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90 से ज़्यादा देशों में प्लास्टिक पर प्रतिबंध है।
90 से ज़्यादा देशों में प्लास्टिक पर प्रतिबंध है।|ट्विटर
भारत

पॉलीथिन नहीं तो फिर क्या?

2 अक्टूबर से पॉलीथिन (Single use plastic) बंद हो रही है। विश्व के 90 से ज़्यादा देशों में प्लास्टिक पर प्रतिबंध है, अब भारत में भी ये होने जा रहा है। इसके विकल्प क्या हो सकते हैं?

प्रज्ञा

प्रज्ञा

राज एक्सप्रेस। भारत में इस साल 2 अक्टूबर से एक बार इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक (Single use plastic) बंद होने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 11 सितंबर को मथुरा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए इस बात का ऐलान किया और लोगों से अपील की कि, वो प्लास्टिक का इस्तेमाल न करें। उन्होंने कहा कि, हमें ये कोशिश करनी है कि इस वर्ष 2 अक्टूबर तक अपने घरों को, अपने दफ्तरों को, अपने कार्यक्षेत्रों को सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्त करें।

"मैं देश भर में, गांव-गांव में काम कर रहे हर सेल्फ हेल्प ग्रुप से, सिविल सोसायटी से, सामाजिक संगठनों से, युवक मंडलों से, महिला मंडलों से, क्लबों से, स्कूल और कॉलेज से, सरकारी और निजी संस्थानों से, हर व्यक्ति, हर संगठन से इस अभियान से जुड़ने का आग्रह करता हूँ।"

नरेन्द्र मोदी, प्रधानमंत्री (भारत)

प्लास्टिक पर्यावरण के लिए बेहद नुकसानदायक है। ये बात अलग-अलग अध्ययनों में कई बार सामने आ चुकी है। आईयूसीएन (International Union for Conservation of Nature) के मुताबिक दुनिया में हर साल 300 मिलियन टन प्लास्टिक का निर्माण होता है। इसमें से 8 मिलियन टन प्लास्टिक समुद्रों में पहुंच जाती है। ये कुल समुद्री कचरे का 80% है। ऐसा अनुमान लगाया गया है कि साल 2030 तक समुद्रों में मछलियों से ज़्यादा पॉलीथिन होंगी। जलवायु परिवर्तन का भी एक प्रमुख कारण प्लास्टिक है। विश्व के 90 से ज़्यादा देशों में प्लास्टिक पर प्रतिबंध है और 36 से ज़्यादा देशों में इसका विनियमन कर और फीस के माध्यम से होता है।