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WHO साउथ-ईस्ट एशिया
WHO साउथ-ईस्ट एशिया|Syed Dabeer Hussain - RE
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WHO साउथ-ईस्ट एशिया के सदस्य ने आपातकाल व्यवस्था का संकल्प लिया

डब्ल्यूएचओ (WHO) साउथ-ईस्ट एशिया रीजन के सदस्य देश में कई प्रकार की आपदाओं को लेकर संवेदनशील हैं, इसलिये उन्होंने आपातकालीन तैयारियों की क्षमता मजबूत करने का संकल्प लिया है।

Sushil Dev

राज एक्सप्रेस। डब्ल्यूएचओ (WHO) साउथ-ईस्ट एशिया रीजन के सदस्य देश कई प्रकार की आपदाओं को लेकर संवेदनशील हैं, इसलिये उन्होंने आपातकालीन तैयारियों की क्षमता मजबूत करने का संकल्प लिया है, जिसके लिये जोखिम प्रबंधन का विस्तार, निवेश में बढ़त, और बहुक्षेत्रीय योजनाओं का क्रियान्वयन बढ़ाने का काम किया जाएगा। सदस्य देशों ने नई दिल्ली में मंत्रीस्‍तरीय राउंड टेबल पर "दिल्ली डिक्लेरेशन- इमरजेंसी प्रीपेयर्डनेस इन द साउथ-ईस्ट एशिया रीजन को अपनाया और क्षेत्रीय निदेशक डॉ.पूनम खेत्रपाल सिंह ने यह कहकर तैयारियों के महत्व को रेखांकित किया कि, 'देशों की क्षमता मजबूत होने से क्षेत्र के साथ-साथ विश्व भी मजबूत होगा।"

डब्ल्यूएचओ साउथ-ईस्ट एशिया रीजनल कमिटी का 72 वां सत्र:

डब्ल्यूएचओ साउथ-ईस्ट एशिया रीजनल कमिटी के 72वें सत्र में जेनेवा से जुड़ने वाले डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घीब्रीयेसुस ने कहा, ‘‘तैयारियों से जीवन और धन की बचत होगी। आपातकालीन तैयारियों पर दिल्ली की घोषणा इस क्षेत्र को सभी लोगों के लिये सुरक्षित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण चरण है।’’

दिल्ली की घोषणा में चार प्रमुख पहल :

दिल्ली की घोषणा में चार प्रमुख पहल हैं- प्रमाण-आधारित योजना के लिये संवेदनशीलताओं के मापन और मूल्यांकन द्वारा जोखिमों की पहचान, आपदा का जोखिम कम करने के लिए उपाय, तैयारी को परिचालन में लाना। आईएचआर कोर क्षमताओं की मजबूती, सुदृढ़ स्वास्थ्य प्रणालियों और अवसंरचना का निर्माण, राष्ट्रीय आपातकालीन चिकित्सा दलों और रैपिड रेस्पॉन्स टीमों द्वारा क्षमता विस्तार से लोगों और जोखिम प्रबंधन की प्रणालियों में निवेश होना चाहिये। अधिक निवेश की प्रतिबद्धता साउथ-ईस्ट एशिया रीजनल हेल्थ इमरजेंसी फंड (एसईएआरएचईएफ) की तैयारी को सतत् और अधिक सहयोग पर भी जोर देती है। यह घोषणा आपदा जोखिम प्रबंधन, आपातकालीन तैयारी और प्रतिक्रिया पर राष्ट्रीय कार्य योजनाओं के क्रियान्वयन, निगरानी, परीक्षण और पर्याप्त फंडिंग की बात भी करती है। अंत में यह क्षेत्रों और नेटवर्कों को जोड़ने पर जोर देती है- जैसे मानव, पशु, पर्यावरण समेत विभिन्न क्षेत्रों के बीच दूरी कम करने के लिए ‘वन हेल्थ’, ताकि उभरते और बढ़ते रोगों की रोकथाम और नियंत्रण हो सके।

स्वास्थ्य जोखिमों पर अनुभव साझा किये :

राउंड टेबल में भाग लेते हुए, विश्व की जनसंख्या का एक चैथाई भाग रखने वाले 11 सदस्य देशों के स्वास्थ्य मंत्रियों और प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों ने उन कई स्वास्थ्य जोखिमों पर अनुभव साझा किये, जिन्होंने पिछले एक दशक में इस क्षेत्र को प्रभावित किया है। क्षेत्रीय निदेशक ने कहा, ‘‘हमारे पास एक-दूसरे से साझा करने और सीखने के लिये बहुत कुछ है।"

आपातकालीन स्थितियों में मदद की :

भारतीय महासागर में आई सुनामी ने सभी का ध्यान खींचा था, जिसमें लगभग दो लाख लोग मारे गए थे और क्षेत्र के छह देशों को बहुत क्षति हुई थी। इसके बाद आपदा की तैयारियों और प्रतिक्रिया के मापदंड निर्धारित किये गए और क्षेत्रीय स्वास्थ्य आपातकाल फंड एसईएआरएचईएफ बना, जिसने 9 देशों में 39 आपातकालीन स्थितियों में मदद की और 6.07 मिलियन अमेरिकी डॉलर दिए।

क्षेत्रीय निदेशक के प्रथम कार्यकाल की शुरूआत :

स्वास्थ्य जोखिमों पर बेहतर क्षमता और प्रतिक्रिया के बावजूद डब्ल्यूएचओ साउथ-ईस्ट एशिया अब भी उभरते और बढ़ते रोगों, जलवायु परिवर्तन से जुड़े रोगों, तीव्र और बिना सोचे-समझे किये गए शहरीकरण और प्राकृतिक आपदाओं, जैसे बाढ़, तूफान, भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट के लिए सबसे संवदेनशील क्षेत्रों में से एक है। वर्ष 2014 में क्षेत्रीय निदेशक के प्रथम कार्यकाल की शुरूआत हुई थी और आपातकालीन जोखिम से निपटने की क्षमताओं का विस्तार बड़ी प्राथमिकता रहा। फरवरी 2019 से शुरू हुए उनके दूसरे कार्यकाल में क्षेत्रीय निदेशक से आपातकालीन तैयारी और प्रतिक्रिया को मजबूत करने के प्रयास जारी रखने, राष्ट्रीय और उपराष्ट्रीय स्तर पर अभावों को दूर करने के लिए निवेश बढ़ाने और तैयारी तथा प्रतिक्रिया प्रणाली की सतत् बेहतरी हेतु नवोन्मेष के लिए कहा गया।