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दिव्यांगों के लिए जल्द खुलेगा असिस्टिव टेक्नोलॉजी पर आधारित नेशनल सेंटर
दिव्यांगों के लिए जल्द खुलेगा असिस्टिव टेक्नोलॉजी पर आधारित नेशनल सेंटर|Sushil Dev
भारत

क्या दिव्यांगों के लिए खुल पायेगा असिस्टिव टेक्नोलॉजी सेंटर?

नई दिल्ली : श्रीमती अनिला भेंडिया ने शारीरिक रूप से अक्षम लोगों के सशक्तिकरण के लिए प्रदेश में चलाई जा रही योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी दी।

Sushil Dev

हाइलाइट्स

  • दिव्यांगों के लिए जल्द खुलेगा असिस्टिव टेक्नोलॉजी पर आधारित नेशनल सेंटर

  • केंद्रीय दिव्यांगता सलाहकार बोर्ड की बैठक में मंत्री अनिला भेड़िया हुईं शामिल

  • शारीरिक रूप से अक्षम लोगों के सशक्तिकरण के लिए प्रदेश में चलाई जा रही योजना

  • सरकारी सेवाओं में निःशक्जनों का आरक्षण 6 से बढ़ाकर 7% किया गया है

  • श्रीमती अनिला भेड़िया ने प्रदेश में दिव्यांग की शीघ्र पहचान हेतु केन्द्रों की मांग रखी

राज एक्सप्रेस। छत्तीसगढ़ की महिला बाल विकास और सामाजिक कल्याण मंत्री श्रीमती अनिला भेड़िया ने गुरुवार को दिल्ली के विज्ञान भवन में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा आयोजित केंद्रीय दिव्यांगता सलाहकार बोर्ड की बैठक में भाग लिया। इस दौरान श्रीमती अनिला भेड़िया ने शारीरिक रूप से अक्षम लोगों के सशक्तिकरण के लिए प्रदेश में चलाई जा रही योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी दी।

दिव्यांग की शीघ्र पहचान के लिए केंद्र की मांग :

कार्यक्रम में मंत्री ने बताया कि, छत्तीसगढ़ में सरकारी सेवाओं में निःशक्तजनों का आरक्षण 6% से बढ़ाकर 7% किया गया है, जो की देश में सर्वाधिक है। इस पर केंद्रीय मंत्री ने सराहना करते हुए अन्य राज्यों को भी इसके अनुसरण की बात कही। श्रीमती भेड़िया ने प्रदेश में मूक-बधिरों के कल्याण और सामाजिक उत्थान के लिए रायपुर में नेशनल सेंटर फॉर असिस्टीव टेक्नोलॉजी सपोर्ट सेंटर खोलने तथा दिव्यांग की शीघ्र पहचान हेतु केन्द्रों की मांग रखी, जिस पर श्री गहलोत ने अपनी सहमति व्यक्त की है।

कौशल विकास और स्वरोजगार से जुड़ी कई योजनायें :

केंद्रीय सलाहकार बोर्ड की बैठक में सामाजिक कल्याण मंत्री ने प्रदेश में चलाई जा रही योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए कहा कि, छत्तीसगढ़ सरकार निशक्तजनों के सशक्तिकरण के लिए संकल्पित है। उन्होंने कहा दिव्यांगों के आर्थिक और सामाजिक मजबूती के लिए कौशल विकास और स्वरोजगार से जुड़ी कई योजनायें प्रदेश में चलाई जा रही हैं, वहीं निशक्त बच्चों की शिक्षा और व्यक्तित्व विकास के लिए कार्य योजनाएं बनाई गयी हैं।