क्या विपक्ष के सहारे मोदी सरकार को मात दे पाएंगे केजरीवाल
क्या विपक्ष के सहारे मोदी सरकार को मात दे पाएंगे केजरीवालRaj Express

क्या विपक्ष के सहारे राज्यसभा में मोदी सरकार को मात दे पाएंगे केजरीवाल? जानिए क्या कहते हैं आंकड़े?

केंद्र सरकार को 6 महीने के अंदर संसद के दोनों सदनों में इस अध्यादेश को पारित कराना जरूरी है। वहीं दूसरी तरफ केजरीवाल विपक्ष के साथ मिलकर इस अध्यादेश को पारित होने से रोकना चाहते हैं।

राज एक्सप्रेस। दिल्ली में अफसरों की ट्रांसफर-पोस्टिंग के मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार (Central Government) और दिल्ली सरकार (Delhi Government) के बीच काफी समय से विवाद बना हुआ है। इस मामले को लेकर केजरीवाल सरकार (Kejriwal Government) सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का रुख कर चुकी है। कोर्ट ने अफसरों की ट्रांसफर-पोस्टिंग के मुद्दे पर केजरीवाल सरकार के हक में फैसला सुनाया था। लेकिन केंद्र सरकार ने एक अध्यादेश के जरिए उस फैसले को पलट दिया। हालांकि अब केंद्र सरकार को 6 महीने के अंदर संसद के दोनों सदनों में इस अध्यादेश को पारित कराना जरूरी है। वहीं दूसरी तरफ केजरीवाल विपक्ष के साथ मिलकर इस अध्यादेश को पारित होने से रोकना चाहते हैं। तो चलिए जानते हैं कि क्या केजरीवाल विपक्ष के साथ मिलकर संसद में सरकार को रोक पाएंगे।

लोकसभा के आंकड़े

सरकार इस अध्यादेश (Ordinance) को पारित कराने के लिए पहले लोकसभा का रुख कर सकती है। लोकसभा में अध्यादेश को पारित कराने के लिए 272 सांसदों की आवश्यकता होगी। वर्तमान में भाजपा के ही अकेले 300 सांसद हैं। वहीं सहयोगी दलों को मिला लिया जाए तो यह संख्या 328 के करीब पहुंच जाती है। ऐसे में मोदी सरकार इस अध्यादेश को पारित लोकसभा में आसानी से पास करवा सकती है।

राज्यसभा के आंकड़े

लोकसभा के बाद इस अध्यादेश को राज्यसभा में पेश किया जाएगा। केजरीवाल सरकार राज्यसभा में ही इस अध्यादेश को पारित होने से रोकना चाहती है। इसका कारण यह है कि राज्यसभा में सरकार के पास बहुमत नहीं है। हालांकि इस समय राज्यसभा में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है। उसके पास 93 सदस्य है। वहीं सहयोगी सदस्यों को मिला ले तो यह संख्या 110 पर पहुंच जाती है। वर्तमान में राज्यसभा सदस्यों की कुल संख्या 238 है, ऐसे में मोदी सरकार के पास बहुमत से 8 सदस्य कम है। माना जा रहा है कि मोदी सरकार नवीन पटनायक की बीजेडी और जगनमोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस से समर्थन मांग सकती है। दोनों ही दल एनडीए में शामिल है और ना ही यूपीए में। हालांकि यह दल अक्सर अहम मौकों पर राज्यसभा में मोदी सरकार का समर्थन कर चुके हैं।

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