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प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर|नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड
भारत

क्या दूसरा नर्मदा बचाओ आंदोलन साबित होगी 'बुलेट ट्रेन परियोजना'?

गुजरात के एक वकील ने उच्च न्यायालय में दायर कीं 173 याचिकाएं और 1200 एफेडेबिट्स। क्या परेशानी है इस मेगा प्रोजेक्ट में?

प्रज्ञा

प्रज्ञा

राज एक्सप्रेस। भारत में बुलेट ट्रेन चलने के चर्चे काफी सालों से हैं। तत्कालीन भारत सरकार ने 'मेक इन इंडिया' के अन्तर्गत इस प्रोजेक्ट को पूरा करने की घोषणा की। गुजरात राज्य के अहमदाबाद शहर से लेकर मुम्बई तक पहली बुलेट ट्रेन चलाने पर काम चल रहा है। जिसके बाद 10 और रूट्स पर इन्हें चलाने का प्लॉन है।

एक ओर भौतिक तरक्की के रूप में इसे काफी अहम समझा जा रहा है। वहीं गुजरात के एक वकील आनंद याग्निक ने गुजरात उच्च न्यायालय में 1200 एफेडेबिट्स और 173 याचिकाएं इसके खिलाफ दायर की हैं।

मिडडे डॉट कॉम के अनुसार, आनंद याग्निक का कहना है कि, ये परियोजना भले ही मेक इन इंडिया के तहत चल रही हो लेकिन इसका सारा काम जापान से हो रहा है।

वो कहते हैं कि, "जापानी बहुत चालाक हैं, उन्होंने हमें 0.1 प्रतिशत पर लोन दिया है लेकिन इस शर्त पर कि, ट्रेन्स उनकी कम्पनी बनाएगी। यह भारत की ज़मीन पर चलेगी लेकिन इसका एक स्क्रू तक जापान का होगा। तब, यह मेक इन इंडिया की परियोजना कैसे होगी?"

आनंद ने किसानों की तरफ से उच्च न्यायालय में 173 याचिकाएं दायर की हैं। उन्होंने बताया कि, बुलेट ट्रेन बनाने के लिए 27 मन्दिरों को तोड़ना पड़ेगा तो वहीं 14,000 परिवार इससे प्रभावित होंगे। इन परिवारों की औसतन कमाई 5000 प्रतिमा है, ऐसे में इनका गुज़ारा कैसे होगा?

याग्निक सवाल करते हैं कि, सरकार नर्मदा वैली प्रोजेक्ट से सीख क्यों नहीं लेती? इस परियोजना का बजट 3,000 करोड़ था, जो कि बढ़कर 1,27,000 करोड़ हो गया लेकिन अब तक यह पूरी नहीं हुई है।

नर्मदा वैली प्रोजेक्ट के तहत नर्मदा नदी पर कई बांध बनाए जाने थे, जिनमें से सबसे बड़ा बांध सरदार सरोवर बांध है। इसके कारण अभी तक 32,000 लोगों का विस्थापन नहीं हुआ है। ये लोग या तो सरकारी राहत शिवरों या किराए के घरों में रहने को मजबूर हैं। कई लोगों का व्यापार तक छिन गया है लेकिन सरकार ने इन्हें मुआवज़ा राशि नहीं दी है।

बुलेट ट्रेन परियोजना कहीं ऐसी ही परिस्थिति को जन्म तो नहीं देगी? जहां हज़ारों-लाखों लोग अपने घरों से बेघर हो जाएं।

इस साल सितंबर में उच्च न्यायालय ने इस तरह की लगभग 100 याचिकाओं को खारिज कर दिया था। अब यह मुद्दा सर्वोच्च न्यायालय जा सकता है।

बुलेट ट्रेन्स परियोजना का बजट 18,000 करोड़ है और इसके लिए केन्द्र सरकार ने नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड का गठन किया है। यह ट्रेन 320 से 350 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी।

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