कोविड हुआ तो कूल्हे या जांघ में होने वाले दर्द को नजरअंदाज न करें
कोविड हुआ तो कूल्हे या जांघ में होने वाले दर्द को नजरअंदाज न करेंसांकेतिक चित्र

कोविड हुआ तो कूल्हे या जांघ में होने वाले दर्द को नजरअंदाज न करें

डॉ. तिवारी ने बताया की एवैस्कुलर नेक्रोसिस हड्डियों में होने वाली ही एक समस्या है जिसमें बोन टिशू यानी हड्डियों के ऊतक मरने लगते हैं। सीधी भाषा में कहा जाए तो हड्डियां गलने लगती हैं।

इंदौर, मध्यप्रदेश। एवैस्कुलर नेक्रोसिस विषय पर ऑनलाइन परिचर्चा का आयोजन क्रिएट स्टोरीज सोशल वेलफेयर सोसाइटी द्वारा किया गया। इस ऑनलाइन सेमिनार में फिज़ियोथेरेपिस्ट डॉ. प्रियंका तिवारी ने चर्चा की।

डॉ. तिवारी ने बताया की एवैस्कुलर नेक्रोसिस हड्डियों में होने वाली ही एक समस्या है जिसमें बोन टिशू यानी हड्डियों के ऊतक मरने लगते हैं। सीधी भाषा में कहा जाए तो हड्डियां गलने लगती हैं। यह बीमारी होने का कारण रक्त प्रवाह में बाधा होने के कारण टिशू तक पर्याप्त मात्रा में खून का नहीं पहुंच पाना है।

हड्डी की कोशिकाएं मरने लगती हैं :

बहुत ही प्रारंभिक अवस्था में इसके कोई लक्षण नहीं नजर आते हैं। हालांकि आपको दर्द महसूस हो सकता है। इससे आपको चलने और मूवमेंट करने में परेशानी हो सकती है। इससे सबसे ज्यादा कूल्हे यानि हिप्स प्रभावित होते हैं। अवस्कुलर नेक्रोसिस (एवीएन) एक जटिल प्रक्रिया है। एवीएन का प्रमुख कारण हड्डी में खून की आपूर्ति कम होना है। जब रक्त वाहिकाएं बहुत छोटी हो जाती हैं या क्षतिग्रस्त हो जाती हैं या बंद हो जाती हैं, तब पोषक तत्व और ऑक्सीजन हड्डी तक नहीं पहुंच पाते और हड्डी की कोशिकाएं मरने लगती हैं। एवीएन की प्रगति का पूर्वानुमान लगाना कठिन है। घाव दूर हो सकते हैं, स्थिर रह सकते हैं या और खराब हो सकते हैं। रोग की प्रगति धीमी या तीव्र हो सकती है।

लगातार बना रहता है दर्द :

इसके सामान्य कारण में शराब का अधिक सेवन, स्टेरॉयड, स्मोकिंग, चोट, स्थिति है जहां ब्लड वेसेल्स डैमेज होती हैं, ऑटोइम्यून डिजीज, रेडिएशन थेरेपी आदि हैं। एवैस्कुलर नेक्रोसिस के लक्षणों में जांघ और कूल्हे की हड्डियों में तेज दर्द उठना। चलने में दिक्कत होना। सोते या जागते लगातार दर्द रहना। कंधे, घुटने, हाथ और पैरों में भी दर्द, जोड़ों में लगातार दर्द। जोड़ निपात की संभावना अधिक हो सकती है यदि घाव, उस हड्डी में होता है जो जोड़ की सतह के निकट स्थित है या बड़ा है, 30 प्रतिशत या उससे अधिक सतह को कवर कर रहा है या वजन को ढोने वाले जोड़ (कूल्हे, घुटने) में होता है।

तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं :

डॉ प्रियंका तिवारी ने बताया की अभी इस बारे में कुछ भी नहीं कहा जा सकता है कि कोविड से ठीक हुए मरीजों में एवैस्कुलर नेक्रोसिस का जोखिम हो सकता है या इसके बढ़ने का अधिक खतरा है। फिलहाल कोविड से ठीक होने वाले मरीजों को हम सलाह दे रहे हैं कि कूल्हे या जांघ में होने वाले दर्द को नजरअंदाज न करें। जिन लोगों को भी ये समस्या है वे तुरंत डॉक्टर या थेरेपिस्ट को दिखाए, एमआरआई करवाएं ताकि समय रहते समस्या का निदान किया जा सके। दिक्कत होने पर ब्रिजिंग एक्सरसाइज, प्राणायाम करें। डीप ब्रीथिंग एक्सरसाइज करिए।शरीर के हर पार्ट का मूवमेंट करते रहिये जैसे घुटने, पंजो, हिप्स, हाथों, कंधो का मूवमेंट, संतुलित आहार लें, खुद को हाइड्रेटेड रखें।

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