Myth Related to Brain
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सोते वक्‍त दिमाग काम करना बंद कर देता है, आपको भी हैं ऐसे भ्रम तो जानिए इनकी सच्‍चाई

नींद से जुड़े कई भ्रम सोशल मीडिया पर फैले हैं, जिन पर लोग बड़ी आसानी से भरोसा कर लेते हैं। गलत धारणा आपकी सेहत को नुकसान पहुंचाती है, इसलिए इनकी सच्‍चाई जानना जरूरी है।

हाइलाइट्स :

  • नींद जीवन का जरूरी हिस्‍सा है।

  • नींद की कमी मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य के लिए नुकसानदायक।

  • 8 घंटे की नींद लेना जरूरी नहीं।

  • लाइट जलाकर सोने से सर्केडियन रिदम होती है प्रभावित।

राज एक्सप्रेस। नींद हमारे जीवन का महत्‍वपूर्ण हिस्‍सा है। दिनभर फ्रेश और एनर्जेटिक बने रहने के लिए अच्‍छी नींद बहुत जरूरी है। जो लोग ठीक से नींद नहीं ले पाते, उन्हें कई स्‍वास्‍थ्‍य सबंंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा नींद की कमी वर्क परफॉर्मेंस को भी प्रभावित करती है। नींद को लेकर भी इंटरनेट पर कई तरह के भ्रम फैले हैं, जिस पर लोग आंख मूंद कर भरोसा कर लेते हैं और इनके आधार पर नींद लेने की कोशिश करते हैं। लेकिन इसका सीधा असर उनके स्‍वास्‍थ्‍य पर पड़ता है। अगर आपके मन में भी नींद को लेकर गलत धारणाएं हैं, तो इन्‍हें दूर करना जरूरी है। यहां नींद से जुड़े कुछ मिथ और फैक्‍ट बताए गए हैं, जिन्‍हें जान लेंगे, तो सेहत को नुकसान होने से बचा सकते हैं।

मिथ

अगर आप कम सोते हैं, तो शरीर इसका आदी हो जाता है।

फैक्‍ट

हर किसी को पर्याप्त नींद की जरूरत होती है। अगर आपको भरपूर नींद नहीं मिल रही, तो आप अगले दिन अच्‍छा फील नहीं करेंगे। लगातार नींद की कमी न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक तौर पर आपको अस्‍वस्‍थ बना सकती है।

मिथ

नींद के दौरान दिमाग काम करना बंद कर देता है।

फैक्‍ट

अगर आप भी इस तरह की धारण मन में बनाए हुए हैं, तो आप गलत है। हमारा मास्तिष्‍क कभी भी काम करना बंद नहीं करता। मास्तिष्‍क के लगातार काम करने के कारण ही आप नींद में सपने देख पाते हैं।

मिथ

क्‍या 8 घंटे की नींद लेना जरूरी है।

फैक्‍ट

आमतौर पर 7-8 घंटे सोने की सलाह दी जाती है। लेकिन यह पूरी तरह सच नहीं है। अगर आप 5 घंटे की नींद भी लेते हैं, तो कोई परेशानी नहीं होती। बशर्ते जागने के बाद आप फ्रेश फील करें।

मिथ

उम्र बढ़ने के साथ नींद का समय भी बढ़ जाता है।

फैक्‍ट

जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ती है, सर्कैडियन रिदम में बदलाव होता है। बुजुर्ग लोग आमतौर पर युवाओं की तुलना में कम सोते हैं।

मिथ

झपकी लेने से रात की अपर्याप्त नींद की भरपाई हो जाती है।

फैक्‍ट

झपकी लेने से रात की कम नींद की भरपाई कभी नहीं हो सकती। वहीं, अगर आप लंबे समय तक झपकी लेते हैं तो यह आपके मन को विचलित कर देती है। इसलिए, दोपहर में झपकी आधे घंटे से भी कम की होनी चाहिए।

मिथ

कमरे की लाइट जलाकर सोने से कोई नुकसान नहीं होता।

फैक्‍ट

सर्कैडियन रिदम रोशनी से प्रभावित होती है। अगर आप अच्‍छी नींद चाहते हैं, तो हमेशा कमरे में अंधेरा करके ही सोएं। क्योंकि लाइट चालू र‍हेगी, तो नींद से अचानक जागने की संभावना बढ़ जाती है।

मिथ

अगर आप नींद के दौरान हिलते-डुलते हैं, तो आप अच्छी नींद नहीं ले सकते

फैक्‍ट

यह धारणा पूरी तरह से गलत है, क्योंकि शरीर की एक्टिविटी का नींद के पैटर्न से कोई खास संबंध नहीं है। एक अच्छी नींद वाला व्यक्ति भी नींद में चल सकता है। हालांकि, जब ये हरकतें अचानक हिंसक हो जाएं तो यह चिंता का विषय है।

मिथ

सोते वक्‍त खर्राटे लेने से कोई नुकसान नहीं है

फैक्‍ट

खर्राटे लेना जानलेवा हो सकता है। तेज़ खर्राटे ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया से जुड़े हैं। वहीं, खर्राटे आपके बेड पार्टनर के लिए असहज स्थिति पैदा कर देते हैं।

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