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पटाखे जलाते समय
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हेल्थ एंड फिटनेस

पटाखे जलाते समय विशेष तौर पर रखें आंखों का ख्याल

सावधान! दिवाली पर पटाखे जलाते समय विशेष तौर पर अपनी आंखों का रखें ख्याल, कहीं पटाखें की कोई चिंगारी आपकी आँखो में न चली जाए।

Umesh Kumar Singh

राज एक्सप्रेस। दिवाली हिंदुओं का सबसे बड़ा त्यौहार माना जाता है। दिवाली का त्यौहार प्रकाश और उजाले का प्रतीक माना जाता है। इसे बड़ी ही खुशी और उत्साह के साथ मनाया जाता है। दिवाली वैसे पांच दिनों का त्यौहार माना जाता है। ये कार्तिक महीने के पंद्रहवें दिन से शुरू होता है। दिवाली की शुरूआत धनतेरस से होती है। उस दिन सोना खरीदने का सबसे शुभ अवसर माना जाता है। उस दिन लोग अपने लिए नई-नई चीजें बर्तन, सोना चांदी अवश्य खरीदते हैं। धनतेरस के बाद आती है-छोटी दिवाली, जो कि आश्विन मास की चौदहवें दिन पर होता है। फिर मुख्य दिवाली का दिन आता है। इस दिन घरों में दिवाली की परंपरा के अनुसार हम सभी लोग घर के हर कोने में चारों ओर दीपक और मोमबत्तियां जलाते हैं।

सभी दोस्तों और रिश्तेदारों को मुबारकबाद देते हैं। मिठाइयां और तोहफे बांटते हैं। इस दिन का बच्चे खास तौर पर इसलिए भी बेसब्री से इंतजार करते हैं, क्योंकि उन्हें पटाखे जलाने को मिलते हैं। नई दिल्ली स्थित सेंटर फॉर साइट के निदेशक डा.महिपाल सचदेव का कहना है कि पटाखे हमेशा अच्छी लाइसेंस धारक दुकान से ही खरीदने चाहिए। हमेशा बंद बाक्स में ही आतिशबाजी खरीदें। पटाखों को गैस स्टोव या किसी भी ज्वलनशील पदार्थ से दूर रखना चाहिए। पटाखों को खुली जगह पर ही जलाएं। बड़े पटाखों को जलाते समय अधिक सावधान रहें। पटाखे जलाने के बाद बची हुई राख या फुलझड़ियों को एक पानी से भरी हुई बाल्टी में रखें ताकि वह आपके पैरों के नीचे न लगें और न ही आप को नुकसान पहुंचाए।