Raj Express
www.rajexpress.co
online games
online games|social media
लाइफस्टाइल

ऑनलाइन गेम्स की लत-बच्चों और समाज पर प्रभाव एवं पेरेंटिंग टिप्स

दुनिया भर के युवाओं और बच्चों के लिए समय बिताने के सबसे पसंदीदा विकल्पों में से एक है, ऑनलाइन गेमिंग, जो कि अब विकल्प से लत में बदल गयी है जिसके परिणाम बहुत घातक साबित हो रहें हैं।

Rishabh Jat

आखिर क्या है ऑनलाइन गेम्स की लत?

जब लगतार हमें किसी ऑनलाइन गेम को खेलने की खुमारी रहे और उस खेल को खेलते वक़्त हम उस खेल में कुछ इस तरह डूब जाये कि असल जिंदगी की चीज़े भी हमारे लिए कोई महत्व ना रखें तो इस खुमारी को हम ऑनलाइन गेम्स की लत कहते हैं।

अगर सही समय पर बच्चों को इस खतरनाक लत से ना बचाया गया तो ये उनके एवं समाज के भविष्य के लिए बहुत अधिक हानिकारक हो सकती है ।

समाज में बाल अपराध की बढ़ती दर कहीं ना कहीं इसकी ओर इशारा कर रही है।

बच्चो में बढ़ता चिड़चिड़ापन और छोटी-छोटी बात पर गुस्सा आजाना इन ऑनलाइन गेम्स की लत का ही परिणाम है।

ऑनलाइन गेम्स के नुकसान

नींद की समस्या होना

हर वक्त ऑनलाइन गेम खेलने से हमारे रोजमर्रा के काम बहुत हद तक प्रभावित होते हैं खाने के समय खाना नहीं खापाते ,सोने के वक़्त सो नहीं पाते हैं एवं बच्चे अपनी पढ़ाई करने का वक्त भी ऑनलाइन गेमिंग को दे रहे हैं।

लोग देर रात तक गेम खेलते हैं जिससे उनकी दिनचर्या प्रभावित होती है। लगातार वर्चुअल दुनिया में होने के कारण हमारा दिमाग स्थिर नहीं हो पाता है और रात में नींद नहीं आती जो एक जटिल समस्या बनकर हमारे सामने खड़ी हो जाती है।

सामाजिक जीवन से दूरी

अगर आप डिजिटल दुनिया में डूबे रहेंगे तो कहीं ना कहीं आप समाज से कट जाएंगे, संचार जो कि हमारे जीवन का एक बहुत महत्वपूर्ण अंग है खत्म होने लगता है। जब हम किसी से संचार करते हैं तो उस वक़्त हम अपने विचार सामने वाले को पहुंचाते हैं एवं उसके विचार भी हमारे मस्तिष्क में आते हैं। अगर हम लगातार डिजिटल मीडिया से जुड़े रहते हैं, ऑनलाइन गेम खेलते हैं, सोशल मीडिया का अतिरिक्त प्रयोग करते हैं तो समाज की मुख्यधारा से कट जाते हैं एवं हमारी संवाद करने की कुशलता और विचार शक्ति भी कम हो जाती है।

एकाग्रता का कम हो जाना

ऑनलाइन गेम्स हमारी एकाग्रता को भी घटा देते हैं। असल जिंदगी में हमारी सोचने-समझने की शक्ति की क्षमता को कम कर देते हैं एवं इससे हमें पढ़ाई करने में या किसी एक जगह अपने ध्यान को साधने में भी समस्या होने लगती है।

कैसे बचायें बच्चों को इस लत से

रियल लाइफ गेम्स बच्चों के लिए बहुत मददगार साबित होते हैं। मनोरंजन के साथ सेहत में सुधार आये इसलिए क्रिकेट ,फुटबाल, बैडमिंटन जैसे खेल, खेलने के लिए बच्चों को कहें और हो सके तो उनके साथ माता-पिता स्वयं भी खेलें।

ऐसे बच्चों से जितना अधिक हो सके, मेल-जोल बढायें। इसके लिए विभिन्न अवसरों पर पार्टी आदि का आयोजन करते रहें। अपने परिवार व दोस्तों के लिए समय निकालें।

एकाग्रता बढ़ाने के लिए जरूरी व दिमागी कार्यों के बीच कुछ समय का ब्रेक लेते रहें। हो सके तो इन ब्रेक्स में फोन व लैपटॉप का कम से कम इस्तेमाल करें।

बच्चों को मोबाइल, लैपटॉप व इंटरनेट का ज्यादा इस्तेमाल न करने दें और उन पर नजर भी रखें रहें। अगर तमाम कोशिशों के बावजूद इन डिजिटल गेम्स से दूरी न बन पा रही हो, तो किसी मनोवैज्ञानिक सलाहकार की मदद लेने में हिचकिचाएँ नहीं।

योग करने से हमारी ध्यान शक्ति बढ़ती है एवं समय पर नींद भी आती है इसलिए बच्चों को प्रतिदिन योग अभ्यास की आदत भी डालें ।

इन्हीं कुछ छोटी-छोटी बातों को ध्यान में रख कर आप बच्चो को ऑनलाइन गेम्स की लत लगने से बचा सकते हैं।