क्या टॉयलेट का ढक्कन खोलकर या बंद करके फ्लश करना चाहिए ? जानिए क्‍या कहती है स्‍टडी

हाल ही में सामने आई एक स्टडी के अनुसार, टॉयलेट का ढक्कन बंद या खुला रखकर फ्लश करने से कीटाणुओं के प्रसार पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
क्या टॉयलेट का ढक्कन खोलकर या बंद करके फ्लश करना चाहिए ?
क्या टॉयलेट का ढक्कन खोलकर या बंद करके फ्लश करना चाहिए ?Raj Express
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हाइलाइट्स :

  • फ्लश करते समय बंद करें टॉयलेट सीट का ढक्‍कन।

  • खुले या बंद टॉयलेट लिड से भी हवा में फैलते हैं बैक्‍टीरिया।

  • ढक्‍कन बंद करने से गंध नहीं फैलती।

  • नियमित रूप से टॉयलेट सीट को साफ करने से बनी रहेगी स्‍वच्‍छता।

राज एक्सप्रेस। कोरोना महामारी ने न केवल लोगों को अपना ख्‍याल रखना सिखाया है, बल्कि स्‍वच्‍छता के प्रति जागरूक भी किया है। यही वजह है कि अब लोग घर में हों या घर के बाहर हाइजीन का बेहद ख्‍याल रखते हैं। हम सभी जानते हैं कि किचन से ज्‍यादा जर्म्स और बैक्‍टीरिया घर के टॉयलेट में होते हैं। इनके संपर्क में आने से संक्रमण का खतरा भी रहता है। शायद इसी वजह से अब लोग घरों में इंडियन के बजाय वेस्‍टर्न टॉयलेट का यूज कर रहे हैं। कई लोग फ्लश करते समय टॉयलेट का ढक्‍कन बंद कर देते हैं। यह सोचकर कि वे वायरस के कणों से बच जाएंगे। अगर आप भी ऐसा ही करते हैं, तो ध्‍यान दें। अमेरिकन जर्नल ऑफ इंफेक्शन कंट्रोल में प्रकाशित एक एक स्‍टडी के अनुसार, एरिज़ोना यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने पाया कि टॉयलेट का ढक्कन बंद या खुला रखकर फ्लश करने से तेजी से बाहर आने वाले कीटाणुओं के प्रसार पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

क्‍या मानते हैं रिसर्चर

रिसर्चर मानते हैं कि जब कोई टॉयलेट में फ्लश करता है, ताे चाहे ढक्‍कन खुला हो या बंद छोटे-छोटे वायरल कण फर्श और टॉयलेट सीट के आसपास फैल जाते हैं। यह सच है कि ढक्‍कन बंद करने से बैक्‍टीरिया का प्रसार कम हो जाता है, लेकिन यह तरीका इन्‍हें पूरी तरह से खत्‍म करने के लिए पर्याप्‍त नहीं है।

तो क्‍या टॉयलेट लिड को बंद रखना चाहिए

हालांकि , डॉक्‍टर्स इस बात से सहमत हैं कि फ्लश करने के दौरान ढक्कन को बंद रखना हाइजीन की दृष्टि से अच्‍छा है, लेकिन फिर भी वायरल कणों से बचा जा सकता है, इसकी कोई गारंटी नहीं है। 2013 में हुई एक रिसर्च के अनुसार, ढक्‍कन के बिना टॉयलेट में मल पदार्थ फ्लश करने से पानी के कण हवा और सतहों पर फैल सकते हैं। ये कण ज्‍यादातर ऊपर की ओर बढ़ते हुए, पीछे की ओर दीवार पर और बाहर की ओर बढ़ते हुए कमरे में फैल सकते हैं। हालांकि, ऐसा देखा गया कि ढक्कन बंद करने से बैक्टीरिया में कमी आई लेकिन ये हवा से पूरी तरह खत्म नहीं हुए, जिससे पता चलता है कि टॉयलेट कवर और सीट के बीच से पानी की बूंदों के जरिए बैक्‍टीरिया बाहर निकल सकता है।

खुले या बंद ढक्कन के साथ- कैसे फ्लश करें

ढक्‍कन को बंद कर फ्लश करने से स्‍वच्‍छता बनी रहती है और इससे गंधाें को फैलने से रोकने में भी मदद मिलती है। कई रिसर्च बताती हैं कि घरों में नोरोवायरस जैसी बीमारियों की रेट कम है, जिससे फ्लश करने से पहले हमेशा टॉयलेट का ढक्कन बंद करना जरूरी हो जाता है। ढक्कन बंद करने से स्प्रे को फैलने की बजाय इन सूक्ष्म बूंदों को रोकने में मदद मिलती है।

ढक्कन खुला रखकर फ्लश करने के फायदे

  • अगर आप खुले ढक्‍कन के साथ फलश करते हैं, तो आप देख सकते हैं कि सब कुछ ठीक से फ्लश हो गया है या नहीं। कोई अपशिष्ट शेष नहीं है जो टॉयलेट को ब्‍लॉक कर दे।

  • अगर बाथरूम में कोई खिड़की या वेंटिलेशन नहीं है, तो खुला ढक्कन ज्‍यादा एयर सर्कुलेट करता है, जिससे गंध तेजी से फैलकर बाहर निकल जाती है।

  • देर रात जब घर के सदस्य सो रहे हों तो खुले ढक्‍कन के साथ फ्लश करने से तेज आवाज नहीं होती।

बाथरूम के कीटाणुओं को कम करने के उपाय

माइक्रोबायोलॉजिस्ट चार्ल्‍स गेरबा ने बाथरूम में मौजूद कीटाणुओं को कम करने के उपाय बताए हैं।

  • नियमित रूप से टॉयलेट सीट और उसके आसपास की सतहों को साफ करना चाहिए।

  • टॉयलेट के पास एक डिस्‍इंफेक्‍टेंट जरूर रखें।

  • टॉयलेट के हैंडल को साफ करने के लिए डिस्‍इंफेक्‍टेंट वाइप्‍स का भी इस्तेमाल करें।

  • गेरबा के अनुसार, लोगों को हमेशा अपने हाथ अच्छी तरह से धोने चाहिए और हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करना चाहिए, खासकर अगर घर में कोई व्यक्ति वायरस से संक्रमित हो।

  • अगर घर के किसी सदस्य को दस्त हैं , तो टॉयलेट सीट, फ्लश हैंडल को दिन में दो बार बैक्‍टीरिया फ्री करना चाहिए।

  • नियमित रूप से हाथ धोने और बाथरूम को साफ करने के अलावा टूथब्रश और चेहरे पर लगाए गए ब्‍यूटी प्रोडक्‍ट्स को हटा देना चाहिए या किसी अलमारी में बंद करके रखना चाहिए।

  • गेरबा, लोगों को टॉयलेट का उपयोग करते समय अपने फोन को छूने से भी बचने की सलाह देते हैं।

कुल मिलाकर फ्लशिंग के दाैरान ढक्‍कन को बंद करना ज्‍यादा हाइजेनिक है। इससे आप कई बीमारियों से बचे रह सकते हैं। जबकि फ्लशिंग के दौरान ढक्‍कन को खुला रखने पर निकलने वाला धुआं वातावरण में कीटाणुओं का प्रसार कर देता है।

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