बुद्ध पूर्णिमा सर्वार्थ सिद्धि योग में, साल का पहला चंद्रग्रहण
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बुद्ध पूर्णिमा सर्वार्थ सिद्धि योग में, साल का पहला चंद्रग्रहण

वैशाख माह की पूर्णिमा इस बार 16 मई सोमवार को रहेगी।इसे पीपल पूर्णिमा और बुद्ध पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस साल पूर्णिमा कुमार और सर्वार्थ सिद्धि योग में मनाई जाएगी।

भोपाल, मध्यप्रदेश। वैशाख माह की पूर्णिमा इस बार 16 मई सोमवार को रहेगी। इसे पीपल पूर्णिमा और बुद्ध पूर्णिमा भी कहा जाता हैं। इस साल पूर्णिमा कुमार और सर्वार्थ सिद्धि योग में मनाई जाएगी। इसी दिन साल का पहला चंद्र ग्रहण रहेगा। लेकिन भोपाल, मप्र सहित भारत में कहीं भी ग्रहण दिखाई नहीं देगा और धार्मिक प्रभाव व सूतक भी मान्य नहीं होगा। यह चंद्र ग्रहण सुबह 8:59 से 10:23 तक रहेगा। पंडित रामजीवन दुबे ने बताया कि बुद्ध पूर्णिमा पर कुमार योग सुबह 9:44 से दोपहर 1:18 बजे तक और सर्वार्थ सिद्धि योग दोपहर 1:18 से सूर्यास्त तक रहेगा। नारद पुराण के अनुसार इस दिन व्रती जितने द्रव्य दान करता है, उसको उतने ही शुभ फल प्राप्त होते हैं। पंडित श्री दुबे ने बताया कि पूर्णिमा पर श्रद्धा-भक्ति के साथ व्रत रखना चाहिए, इस दिन धर्मराज युधिष्ठिर की कथा सुनकर और उसके निमित्त दान करना चाहिए। जल से भरा कलश, छाता, जूते, पंखा, पकवान आदि दान करने से कई गुना पुण्य मिलता हैं। इस दिन पीपल के वृक्ष की पूजा करने के कारण इस पूर्णिमा को पीपल पूर्णिमा भी कहा जाता हैं। वैशाख की पूर्णिमा को अबूझ मुहूर्त माना जाता हैं, इसलिए इस दिन विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन संस्कार करना शुभ रहता है, और वाहन, भूमि -भवन आदि को खरीदना और बेचना लाभदायक रहता है।

बुद्ध विहारों में होगी वंदना :

बुद्ध पूर्णिमा पर कोलार बुद्ध भूमि बुद्ध विहार में सुबह बुद्ध वंदना व परित्राण पाठ होगा। तो वहीं शाम को दीप जलाकर विश्व शांति के लिए प्रार्थना की जाएगी। तुलसी नगर सहित अन्य बोद्ध विहारों में धम्मदेशना व अन्य धार्मिक आयोजन किए जाएंगे।

बुद्ध पूर्णिमा का महत्व :

वैशाख मास की पूर्णिमा को वैशाखी पूर्णिमा,पीपल पूर्णिमा या बुद्ध पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। शास्त्रों के अनुसार वैशाख पूर्णिमा सबसे अधिक श्रेष्ठ मानी गई है। प्रत्येक माह की पूर्णिमा जगत के पालनकर्ता श्री हरि विष्णु भगवान को समर्पित होती है। भगवान बुद्ध को भगवान विष्णु का नौवां अवतार माना गया है। जिन्हें इसी पावन तिथि के दिन बिहार के पवित्र तीर्थ स्थान बोधगया में बोधि वृक्ष के नीचे बुद्धत्व की प्राप्ति हुई थी।

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