Dev Uthani Ekadashi 2020 : अधिक मास के चलते पांच माह बाद श्री हरि जागेंगे
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Dev Uthani Ekadashi 2020 : अधिक मास के चलते पांच माह बाद श्री हरि जागेंगे

Dev Uthani Ekadashi 2020 : 59 वर्षों बाद बना शनि, गुरु संयोग भी बना। लोग जीवन जीने की सीखेंगे कला, होंगे आत्मनिर्भर। विवाहादि मंगल कार्य होंगे शुरू, प्रदोष बेला में होगा तुलसी विवाह।

Dev Uthani Ekadashi 2020। कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी देवउठनी, विष्णु प्रबोधिनी व देवोत्थान एकादशी के नाम से प्रसिद्ध है। इस वर्ष आश्विन अधिक मास के चलते देवशयन काल चार नहीं पांच माह का अर्थात 148 दिनों का रहा। इस वर्ष श्री हरि एक माह बाद जाग रहे हैं। बुधवार को ब्रह्म मुहूर्त में मंगल वाद्य व वैदिक मंगलाचरण, उत्तिष्ठो तिष्ठ गोविंद उत्तिष्ठ गरुड़ ध्वज,उत्तिष्ठ कमलाकांत त्रैलोकयम मंगल कुरु के साथ श्री हरि का तीनो लोकों के मंगल करने हेतु जागरण होगा।

भगवान नारायण के जागते ही विवाहादि मंगल कार्यों का सिलसिला प्रारम्भ हो जाएगा। आचार्य पण्डित रामचन्द्र शर्मा वैदिक ने बताया कि देवउठनी ग्यारस पर इस वर्ष कतिपय विशेष ज्योतिषीय संयोग निर्मित हो रहे है, उत्तराभाद्रपद व रेवती नक्षत्र का संयोग, सिद्धि योग, ब्रहस्पति प्रधान मीन राशि का चन्द्रमा, इस पर्व की शोभा बढ़ा रहे है। गोधूलि बेला व प्रदोषकाल में बुध प्रधान नक्षत्र, अहर्निश सिद्धि योगके साथ अमृत योग तुलसी विवाह को भी सुख, समृद्धि कारक बना रहे हैं।

होगा तुलसी विवाह भी :

सुख, शांति व समृद्धि प्रदान करेगा, इस दिन तुलसी विवाह का आयोजन भी किया जाता है। तुलसी वैष्णव सम्प्रदाय की परम आराध्या व प्रकृति स्वरूपा भी मानी जाती है। ठाकुरजी के भोग में जब तक तुलसीदल नहीं डल जाता वह अधूरा माना जाता है। देवउठनी ग्यारस को सायंकाल प्रदोष वेला में भगवान शलग्रामजी/श्री नारायण के श्री विग्रह के साथ धार्मिक मान्यता व परम्परा अनुसार विधिवत तुलसी विवाह किया जाता है। गन्ने से मंडप सजाया जाता है। मंडप पर ओढऩी व चुनरी चढ़ाई जाती है। तुलसी के गमले को सजाया जाता है। सुहाग वस्तुऐं भी धारण कराई जाती हैं। मांडने मांडे जाते हैं, मंगलगीतों का गायन होता है। तुलसी व शालेग्रामजी की विविध पूजा उपचारों से पूजा अर्चना होती है विभन्न नैवेद्य समर्पित किये जाते हैं। साथही तिलक व टीका में श्रीफल व दक्षिणा भी रखी जाती है। इसके बाद मंगलगीतों व मंत्रों के साथ शालग्रामजी की मूर्ती को लेकर सात परिक्रमा के साथ यह तुलसी, शालेग्राम विवाह की रस्म पूर्ण होती है। आचार्य पण्डित रामचन्द्र शर्मा वैदिक ने बताया कि देवशयनी एकादशी को भगवन्नाम संकीर्तन का विशेष महत्व है। नमो भगवते वासुदेवाय इस महामंत्र का रात्रि में जागरण कर जप करने से चारों पुरुषार्थों, धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष की प्राप्ति होती है। गोधूलिबेला में दीपदान का भी विशेष महत्व है।

आज रहेगी विवाहों की धूम :

लाक डाउन के दौरान लंबे समय तक विवाह नहीं होने और लाक डाउन खुलने के शुभ मुहूर्त न होने के कारण इस बार देव उठनी ग्यारस पर शहरभर में विवाह की धूम रहेगी। रात में 8 बाजार बंद होने और विवाह समारोह में सीमित लोगों को बुलाने के प्रशासन के फरमान से लोगों की परेशानियां बढ़ गई थीं। इस दिन अबूझ मुहूर्त में विवाह होते हैं, इसलिए सैकड़ों की संख्या में इंदौर में शादियां हैं। सुबह से लेकर रात तक शादी समारोह है। माना जा रहा है कि देव उठनी ग्यारस के चलते ही रात्रि कर्फ्यू नहीं लगाया गया और केवल बाजार बंद किए जा रहे हैं। वहीं शादी समारोह के लिए भी रात्रि 10 बजे तक समय देने के साथ ही लोगों की आवाजाही पर रोक नहीं लगाई गई है।

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