कब मनाई जा रही है देवउठनी एकादशी
कब मनाई जा रही है देवउठनी एकादशीSyed Dabeer Hussain - RE

जानें कब मनाई जा रही है देवउठनी एकादशी ? क्या है विवाह का शुभ मुहूर्त?

हिन्दू धर्म में मांगलिक कार्यों की दृष्टि से देवउठनी एकादशी का अत्यधिक महत्व है। इस दिन एकादशी का व्रत करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।

राज एक्सप्रेस। प्रतिवर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी मनाई जाती है। हिन्दू धर्म में मांगलिक कार्यों को शुरू करने की दृष्टि से इस दिन का काफी महत्व है। एकादशी का व्रत करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। जबकि इसके अगले दिन भगवान विष्णु के शालीग्राम स्वरूप और माता तुलसी का विवाह करवाया जाता है। जिसे तुलसी विवाह कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि भगवान चार माह के बाद योग निद्रा से जागते हैं। इस वर्ष में एकादशी दो तिथि में होने के कारण लोगों के बीच देवउठनी एकादशी और तुलसी विवाह को लेकर उलझन बनी हुई है। चलिए जानते हैं इस बारे में।

देवउठनी एकादशी कब मनाई जाएगी?

हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष यह तिथि 03 नवंबर, गुरुवार की शाम 7:30 बजे से शुरू होकर अगले दिन 4 नवंबर, शुक्रवार को शाम 6:08 बजे तक रहने वाली है। इस लिहाज से इस वर्ष देवउठनी एकादशी 4 नवंबर को मनाई जाएगी।

तुलसी विवाह कब है?

हर वर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी को तुलसी विवाह का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष के दौरान यह शुभ तिथि 5 नवंबर, शुक्रवार की शाम 6:08 बजे से शुरू होकर 6 नवंबर, रविवार की शाम 5:06 बजे तक रहने वाली है। ऐसे में तुलसी विवाह 5 नवंबर को मनाया जाने वाला है।

कब करें देवउठनी एकादशी का पारण?

देवउठनी एकादशी का व्रत रखने वाले श्रद्धालु 5 नवंबर, शनिवार के दिन सुबह 6:36 बजे से लेकर 8:47 बजे तक व्रत का पारण कर सकते हैं।

क्या है देवउठनी एकादशी का महत्व?

हिन्दू धर्म में देवउठनी एकादशी को विशेष महत्व दिया गया है। क्योंकि इस दिन से ही विवाह से लेकर गृह प्रवेश, सगाई, मुंडन आदि काम शुरू हो जाते हैं। मान्यता है कि देवशयनी एकादशी से लेकर देवउठनी एकादशी तक भगवान विष्णु योग निद्रा में रहते हैं इसलिए कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किया जाता।

विवाह का मुहूर्त :

प्रतिवर्ष इस खास तिथि से शुभ कार्य शुरू हो जाते हैं। लेकिन इस वर्ष ऐसा कोई मुहूर्त नहीं बन रहा है। दरअसल 30 सितम्बर को शुक्र तारा अस्त हो चुका है जो 20 नवम्बर को उदय होगा। इस स्थिति में विवाह और अन्य शुभ कार्य 21 नवम्बर से शुरू होंगे।

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