पितृ पक्ष में क्यों खिलाया जाता है कौवों को खाना
पितृ पक्ष में क्यों खिलाया जाता है कौवों को खानाSyed Dabeer Hussain - RE

पितृ पक्ष में क्यों खिलाया जाता है कौवों को खाना? जानिए इसका धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व

पितृ पक्ष के दौरान कौवों को भोजन कराने का विशेष महत्व होता है। इसके पीछे धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ बड़ा वैज्ञानिक कारण भी छिपा हुआ है।

राज एक्सप्रेस। शनिवार 10 सितंबर को भाद्रपद पूर्णिमा है। इसी दिन से श्राद्ध पक्ष या पितृ पक्ष शुरू होगा। इस बार पितृ पक्ष 10 सितंबर से शुरू होकर 25 सितंबर को खत्म होगा। मान्यता है कि पितृ पक्ष के दौरान पितृ धरती पर आकर अपने परिवार को आशीर्वाद देते हैं। यही कारण है कि इन दिनों पितरों का श्राद्ध और तर्पण किया जाता है। इसके अलावा पितृ पक्ष के दौरान पितरों के नाम से दान करने और कौवों को भोजन कराने का भी विशेष महत्व है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पितृ पक्ष में कौवों को भोजन क्यों कराया जाता है? इसका धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व क्या है? चलिए जानते हैं।

धार्मिक मान्यता :

पौराणिक कथा के अनुसार एक बार भगवान इंद्र के पुत्र जयंत कौवे का रूप धारण करके पृथ्वी पर आए थे। इस दौरान उन्होंने माता सीता के पैरों में चोंच मार दी। इस पर भगवान श्री राम ने तिनके का बाण चलाकर कौवे की आंख फोड़ दी। इसके बाद जयंत को अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने भगवान श्री राम से माफी मांगी। भगवान श्री राम ने भी उन्हें माफ करके वरदान दिया कि पितृ पक्ष के दौरान कौवों को अर्पण किया गया भोजन पितरों को मिलेगा। मान्यता है कि उसके बाद से ही पितृ पक्ष में कौवों को भोजन कराने की परंपरा चली आ रही है।

वैज्ञानिक कारण :

भादो महीने में पितृ पक्ष आता है और यह ऐसा समय होता है जब मादा कौवा अंडे देती है। इस दौरान मादा कौवा बच्चों को छोड़कर ज्यादा दूर नहीं जा सकती और उसे बच्चों के लिए अतिरिक्त भोजन की जरूरत भी होती है। ऐसे में पितृ पक्ष के दौरान कौवों को भोजन कराकर कौवों की प्रजाति को संरक्षित किया जाता है।

क्यों जरूरी हैं कौवे?

दरअसल कौवा बरगद और पीपल के फल खाता नहीं बल्कि निगलता है। कौवे का शरीर फल के गुदे को तो पचा लेता है, लेकिन उसके बीज को अंकुरित करके बीट के रूप में बाहर निकाल देता है। ऐसे में कौवे जहां बीट करते हैं, वहां यह पेड़ उग जाते हैं। बरगद और पीपल के पेड़ हमारे वातावरण के लिए बहुत उपयोगी हैं। इसलिए कौवों का संरक्षण बहुत जरूरी है।

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