विवाह योग्य युवक युवतियों के लिए चौंकाने वाली खबर

इस वर्ष विवाह के मात्र पांच ही मुहूर्त। 2021 में भी अप्रैल के अंतिम सप्ताह से गूंजेगी शहनाइयां।
विवाह योग्य युवक युवतियों के लिए चौंकाने वाली खबर
विवाह योग्य युवक युवतियों के लिए चोंकाने वाली खबरSocial Media

इंदौर, मध्य प्रदेश। साल 2020 देशवासियों के लिए सभी दृष्टिकोण से मनहूस साबित हुआ। विशेषकर विवाह योग्य युवक युवतियों के लिए। इस वर्ष विवाह के शुद्ध मुहूर्तों का अभाव है। अभी चालू वर्ष में 85 दिन शेष हैं और विवाह के मात्र 5 ही मुहूर्त देशभर के पंचांगकारों ने निर्धारित किये हैं,पंचांगों की मानें तो इस वर्ष नवम्बर में मात्र दो शुभ मुहूर्त 25 व 30 नवम्बर के हैं। वहीं साल के अंतिम माह दिसम्बर में तीन-7 दिसंबर, 9 दिसंबर व 11 दिसम्बर।

इस प्रकार वर्ष 2020 के शेष 85 दिनों में मात्र पांच ही दिन शहनाइयां बजेंगी। विवाह योग्य युवक युवतियों को आगे 21 अप्रैल तक इंतजार करना होगा। ऐसा क्यों? आचार्य पण्डित रामचन्द्र शर्मा वैदिक ने बताया कि शुद्ध विवाह के निर्धारण में अनेक ज्योतिषीय मुहूर्त निर्धारण मानकों पर विचार किया जाता है। गुरु शुक्रास्त व विविध समयशुद्धि विवेचना को ध्यान में रख पंचांग कार मुहूर्त रचना करते हैं। शेष बचे दिनों में मात्र 5 ही शुभमुहूर्त होने के मुख्य कारण 25 नवम्बर तक देव शयनकाल, आश्विन अधिकमास, धनु संक्रांति आदि हैं।

उपर्युक्त समय शुद्धि के साथ ही शुभ मुहूर्त की गणना वर वधू के चन्द्र,सूर्य व गुरु बल के साथ शुद्ध विवाह की तिथि बनती है, शुद्ध विवाह की तिथि निर्धारण सामान्य कार्य नहीं है। योग्य ज्योतिषी के मार्गदर्शन में ही यह किया जाना चाहिए। शेष बचे 85 दिनों में एक अबूझ मुहूर्त भी है, देवोत्थान एकादशी का। यह अबूझ संज्ञक मुहूर्त में सभी विवाह योग्य युवक युवती विवाह कर सकते हैं। आचार्य शर्मा ने बताया कि वैसे पूरे 2020 में शुद्ध विवाह के बहुत कम ही मुहूर्त होने से विवाह योग्य युवक-युवतियों के साथ इससे जुड़े पण्डित, हलवाई, बैंड बाजे (शहनाइयां वादक) होटल, धर्मशाला गार्डन्स, टेंट व्यवसायी भी आर्थिक संकट में है। आगे की बुकिंग अभी से फुल हो चुकी है। आचार्य पण्डित शर्मा वैदिक ने बताया कि आने वाला वर्ष 2021 भी विवाह योग्य युवक-युवतियों के लिए चुनौतियां ही चुनौतियां लेकर आ रहा है। 20 अप्रैल तक पंचांग कारों ने विवाह की तिथि निर्धारित नहीं की उसका प्रमुख कारण धनु मीन की संक्रांति, गुरु शुक्र का तारा अस्त होने व होलाष्टक बताए जाते हैं।

आचार्य पण्डित रामचंद्र शर्मा वैदिक ने बताया कि विवाह योग्य युवक युवतियों ने निराशा से बचने के लिए अबूझ मुहूर्त में विवाह करने का भी मन बनाया है। अबूझ मुहूर्त जैसे देव उठनी ग्यारस, बसन्त पंचमी आदि।

ताज़ा ख़बर पढ़ने के लिए आप हमारे टेलीग्राम चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। @rajexpresshindi के नाम से सर्च करें टेलीग्राम पर।

Related Stories

Raj Express
www.rajexpress.co