कोरोना और लॉकडाउन की गंभीरता के बीच थोड़ा सा हंसाने का प्रयास
कोरोना और लॉकडाउन की गंभीरता के बीच थोड़ा सा हंसाने का प्रयास|Kavita Singh Rathore -RE
लाइफस्टाइल

कोरोना और लॉकडाउन की गंभीरता के बीच थोड़ा सा हंसाने का प्रयास

कोरोना संकट के बीच लोग डर में जी रहे हैं। जो जरूरी तौर पर घर के बाहर है उसे तो हर पल खतरा है। इस कोरोना जैसी बीमारी की गंभीरता के बीच हमने थोड़ा सा आप लोगों को हंसाने की कोशिश की है।

Seema Mehta

राज एक्सप्रेस। इस कोरोना संकट बीच लोग इस तरह डर रहे हैं। कोविड-19 पूरी कायनात पर संकट बनकर मंडरा रहा है और उनके पॉजिटिव और नेगेटिव आंकड़ों के बीच जिंदगी रोज झूला झूल रही है, लॉक डाउन चल रहा है और इस लॉक डाउन में शर्मा जी की शामत आ गई है। जो, नींद पहले पत्नी की मीठी आवाज से गरमा-गरम चाय के साथ खुलती थी, वह नींद आजकल झाड़ू की फटकाने की आवाज से खुल जाती है। लगता है मोदी जी ने लॉक डाउन विशेष तौर पर स्त्रियों को ध्यान में रखकर किया है।

शर्मा जी का डायलॉग :

शर्मा जी जो डायलॉग अपनी बीवी को कहते रहते थे कि, "तुम सारा दिन करती क्या हो वहीं, आज उन्हें सुनने को मिल रहा है कि, सारा दिन पड़े-पड़े करते क्या हो कम से कम चाय बनाने, कपड़े सुखाने जैसे कामों में तो मदद कर दो। शहर में लॉक डाउन है, घर के कामों का नहीं।"

मोदी जी की घर बंदी :

सच मानो तो इस कोविड-19 ने सारे नेत्रों को खोल दिया है, मोदी जी का GST फिर नोटबंदी और घरबंदी। यह जिंदगी शर्मा जी को न जाने क्या-क्या दिखाने वाली है। जिस पत्नी को शर्मा जी घर की मुर्गी दाल बराबर कहते रहते थे, वही मुर्गी सुबह-शाम ऐसी बाग देती रहती है कि, शर्मा जी सारा दिन अटेंशन की मुद्रा में खड़े रहते हैं, ऑफिस से निकलते समय पत्नी जो प्यार भरी आंखों से बाय बोलती थी, उन आंखों में चिंगारियां निकलती दिख रही है।

बाइयाँ सारी छुट्टी पर हैं और यह हमारे फिल्म स्टार जो घर के कामों का वीडियो बना कर डाल रहे हैं उन्हें उनसे श्रीमती जी को और प्रेरणा मिल रही है कि देखो वह कर रहे हैं और तुम क्यों नहीं? शर्मा जी के सारे दोस्त जिंदगी के इस भयानक दौर से गुजर रहे हैं।

हमारी एक कोशिश :

कोरोना जैसी बीमारी की गंभीरता के बीच थोड़ा सा आप लोगों को हंसाने की कोशिश की है। हां, पर इस वायरस ने एक कमाल तो कर ही दिया। घर के बंद दरवाजे को खोल दिया है। रिश्तो में धूप सी गर्माहट आने लगी जो, जिंदगी के लिए बहुत जरूरी थी। पड़ोसी एक दूसरे को पहचानने लगे, घरों में कैरम बोर्ड, गेम्स, क्रिकेट, बैडमिंटन पर पड़ी धूल छटने लगी। चिड़ियों की चहचहाहट सुनाई देने लगी। वायु, ध्वनि, प्रदूषण खत्म हो गया है घर के लोग एक दूसरे के साथ वक्त बिताने लगे हैं।

व्यवस्थाओं के बीच बहुत से लोगों की जिंदगी में बहुत कुछ पीछे छूट रहा था, बस उसी को जीने का, उन उन पलों को अपनी यादों में कैद करने की प्रकृति को जी भर के निहारने की और कोविड-19 को अपनी हिम्मत से हराने के समय को लॉक डाउन कहिए। सच मानिए इस नाम से प्यार हो जाएगा।

कोविड-19 का काउंटडाउन शुरू हो गया है, बस दुआ कीजिए अपनी पॉजिटिविटी को बढ़ाइए और कोविड-19 के रिजल्ट को नेगेटिव बनाने में अपना पूरा योगदान दीजिए।

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