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लाइफस्टाइल

कोविड-19: सोशल डिस्टेंसिंग और #FlattenTheCurve?

फिलाडेल्फिया में जहां सड़कों पर लोगों का हुजूम लगा रहा वहीं सेंट लुइस प्रसाशन ने व्यापक तैयारी करते हुए थियेटर, बार जैसी जमघट लगने वाली जगहों को बंद कराकर अस्पतालों को चाक चौबंद किया।

Neelesh Singh Thakur

हाइलाइट्स :

  • #FlattentheCurve क्या है?

  • अस्पतालों पर क्यों आ सकता है संकट?

  • WHO ने कोविड को क्यों बताया पैंडेमिक?

  • सेंट लुईस और फ्लोरिडा ने क्या किया था?

राज एक्सप्रेस। कोविड-19 के खतरों के कारण देश दुनिया में सोशल डिस्टेंसिंग की अपील की जा रही है। सोशल डिस्टेंसिंग के लाभ क्या हैं और कोविड-19 के क्या और कैसे खतरे हैं समझिये इस रिपोर्ट में।

WHO की अपील :

गौरतलब है कि, मार्च 11-2020 में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाईजेशन (WHO) ने एक घोषणा में कोविड 19 के खतरों के बारे में आगाह किया। अपील में बताया गया कि पिछले दिनों चाइना के बाहर कोविड 19 के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के डायरेक्टर जनरल डॉक्टर टैड्रोस ऐडरेनॉम ग़ैबरेयेसस ने कोविड-19 की पहचान पैंडेमिक यानी विश्वव्यापी महामारी के तौर पर घोषित की।

दुनिया जद में :

चाइना में पहचाना गया कोरोना वायरस (कोविड-19) नाम की यह बीमारी साउथ कोरिया, ईरान इटली होते हुए अब भारत तक पहुंच गई है। इसके अन्य दूसरे देशों में भी फैलने के खतरे के कारण संगठन ने वैश्विक स्तर पर सतर्कता बरतने के लिए आगाह किया है।

आंकड़ों पर नजर :

कोविड-19 जिस तेजी से दुनिया में फैल रहा है उसे रोकना फिलहाल रोगियों से दूरी बनाकर ही संभव है। कोविड-19 के बारे में फिलहाल जिन लक्षणों की पहचान हुई है उसमें बुखार 88%, कफ (सूखा) 88%, थकान 38%, कफ (बलगम सहित) 33%, सांसों की कमी 19%, लगातार दर्द 15%, गले में खराश 14%, सिर में दर्द 14%, ठंड लगना 11%, जी मिचलाना 5%, नाक में अवरोध 5% और डायरिया के 5% मामले सामने आने की जानकारी दी गई है।

सीनियर हेल्थ रिपोर्टर, जूलिया बेलुज़ के मुताबिक चाइना के आंकड़ों के अनुसार ज्यादातर केसों की संख्या जीवन के लिए चिंता करने वाले नहीं हैं। चाइना के डाटा के मुताबिक 80 प्रतिशत हल्की बीमारी है। जबकि 20 फीसद मामले गंभीर एवं चिंताजनक हैं।

इस उम्र वर्ग को खतरा :

उम्र के लिहाज से यदि बात की जाए तो 0-9 साल के 0.01%, 10-19 साल के 0.02%, 20-29 साल के 0.09%, 30-39 साल के 0.18%, 40-49 साल के 0.40% मामले सामने आए हैं। 50-59 साल के 1.3%, 60-69 साल के 4.6%, 70-79 साल के 9.8%, 80- साल पार के 18.0% मामले आए हैं। आंकड़ों से साफ है बच्चों-युवाओँ की तुलना में यह वायरस अधिक उम्र के लोगों पर ज्यादा असर कर रहा है। परंपरागत बीमारियों से ग्रसित लोगों को कोविड-19 से ज्यादा संकट होने की बात रिपोर्ट में कही गई है।

लक्षण समझें :

यह वायरस फ्लू यानी संक्रामक जुकाम के तौर पर तेजी से पनपता है। कफ और छींक के जरिए यह एक दूसरे में पहुंच जाता है। इतना ही नहीं ऐसी जगहों को छूने मात्र से जहां पर वायरस की संभावना है व्यक्ति कोविड-19 के असर में फंस सकता है। स्पर्श में आने के बाद हाथ या अंग को चेहरे या आंखों पर लगाने से भी व्यक्ति प्रभावित हो सकता है।

इतने दिन में असर :

इन्फेक्शन में आने के पांच से छह दिनों के भीतर इसके लक्षण समझ में आने लगते हैं लेकिन इस दौरान आसपास के लोग भी कोविड-9 की जद में आने से नहीं बच पाते। सबसे अधिक खतरा दूसरों में ट्रांसफर का हो जाता है। इसके इसी लक्षण के कारण कोविड-19 को दुनिया भर में पनपते देर नहीं लगी।

महामारी बताया :

इसका खतरा समझ में आते ही डब्ल्यूएचओ को इस बीमारी को महामारी तक करार देना पड़ा। साथ ही संगठन के डायरेक्टर जनरल ने सभी देशों से मिलकर इस त्रासदी से निपटने की अपील की। इस बारे में सर्वश्रेष्ठ उपाय जो अब तक निकलकर आया है वह है सबसे पहले तो संक्रमित से दूरी बरतने की। क्योंकि, बीमारी तब ज्यादा भयावह हो जाएगी जब एक साथ बहुत सारे लोग इसके प्रभाव में आ जाएंगे और स्वास्थ्य सेवाओं पर एकाएक दबाव बढ़ जाएगा।

जूलिया रिपोर्ट :

सीनियर हेल्थ रिपोर्टर, जूलिया बेलुज़ ने अपने अध्ययन में अस्पतालों में बिस्तरों की अनुमानित संख्या के लिहाज से पेश किए गए आंकड़ों के जरिए चिंता जताई है कि किस तरह अस्पतालों से यह बीमारी एक दूसरे से होकर खेल के मैदानों तक में लाखों लोगों को अपना शिकार बना सकती है। ऐसे में अस्पतालों पर एक साथ कई लोगों के इलाज का खतरा बढ़ने से बड़ी संख्या में लोगों की जान खतरे में पड़ सकती है।

जॉन हॉपकिंस विश्वविद्यालय के हवाले से जारी आंकड़ों में प्रदर्शित है कि साउथ कोरिया में पांच हजार, ईरान और इटली में लगभग इतने सारे लोग कोरोनावायरस संक्रमण पॉजिटिव पाए गए हैं। बीते हफ्तों में सैकड़ों की संख्या में एक साथ कई सारे मामले सामने आ रहे हैं। बहुत सारे लोगों ने इस कारण प्राण गवांए क्योंकि वो अस्पताल नहीं पहुंच पाए।

सोशल डिस्टेंसिंग :

सीनियर हेल्थ रिपोर्टर, जूलिया बेलुज़ की रिपोर्ट में सोशल डिस्टेंसिंग के जरिए इस महामारी से बचने की बात कही गई है। जिसके मुताबिक संक्रमित व्यक्ति खुद सार्वजनिक जगहों से अलग होकर अस्पताल में नियमित परीक्षण कराए तो संकट कम हो सकता है। क्योंकि प्रत्येक इंसान की यही सोशल जिम्मेदारी भी होती है। इस प्रक्रिया से अस्पतालों में कतार लगने का संकट भी पैदा होने से बच जाएगा।

यूएस सर्जन जनरल ने अस्पतालों और हेल्थकेयर सुविधाओँ के लिए संदेश जारी किया है “अस्पताल और स्वास्थ्य सेवा प्रणाली, कृपया जब तक हम #FlattenTheCurve नहीं कर सकते वैकल्पिक प्रक्रियाओं को रोकने पर विचार करें।”

जबकि कनाडा की डॉक्टर थेरेसा थैम ने भी सामूहिक आयोजनों से बचने की अपील अपने संदेश में की है।

“#COVID19 #coronavirus #pandemic को #FlattentheCurve करने के लिए आयोजकों के लिए बड़े पैमाने पर होने वाले सार्वजनिक कार्यक्रमों, आयोजनों को कैंसल या भविष्य में टालने के लिए कदम उठाने का वक्त है।”

डॉक्टर थेरेसा थैम, @CPHO_Canada

#FlattenTheCurve क्या है?

दरअसल सोशल डिस्टेंसिंग के जरिए अस्पतालों में बढ़ने वाली मरीजों की संख्या कम करने के लिए सोशल मीडिया में #FlattenTheCurve के जरिए विश्वव्यापी मुहिम चलाई जा रही है। इसमें सोशल मीडिया के जरिए सोशल डिस्टेंसिंग के फायदों पर राय रखने साथ ही कोरोना वायरस से निपटने सुलझने के बारे में राय रखी जा सकती है।

घर पर रहें :

दरअसल सोशल डिस्टेंसिंग की प्रक्रिया में यथा संभव लोगों को घरों पर रहने कहा जा रहा है। अमेरिका में 12 मार्च के बाद से वार्नरमीडिया, एनबीसीयू, एमेजन, नेटफ्लिक्स समेत तमाम छोटी-बड़ी कंपनियों ने तो कर्मचारियों से घरों से ही काम करने की अपील की है। ओरेकल, एप्पल, गूगल और अमेजन जैसी ग्लोबल कंपनियों ने भी अपने स्टाफ से यात्राओँ से बचने और सुरक्षित स्थान से काम करने की बात कही है। इसी तरह बड़े स्पोर्ट्स चैनल ईएसपीएन ने एनएचएल से जुड़े सेशन को तत्काल रूप से स्थगित करने की सूचना दी है।

तर्क ये भी :

सोशल डिस्टेंसिंग की बात को 1918 में सेंट लुइस और फिलाडेल्फिया की महामारी से समझा जा सकता है। दोनों देशों में इस संकट से निपटने अलग अलग रास्ता अख्तियार किया गया जिसके नतीजे भी वैसे ही निकले।

फिलाडेल्फिया में जहां सड़कों पर लोगों का हुजूम लगा रहा वहीं सेंट लुइस प्रसाशन ने व्यापक तैयारी करते हुए थियेटर, बार जैसी जमघट लगने वाली जगहों को बंद कराकर अस्पतालों को चाक चौबंद किया। नतीजा साफ था सेंट लुईस के अस्पतालों में मरीजों और मृतकों का ग्राफ फिलाडेल्फिया की तुलना में बहुत नीचे रहा। ठीक यही मकसद भी है #FlattenTheCurve मिशन में साथ देते हुए सोशल डिस्टेंसिंग के जरिए सभी नागरिकों के स्वास्थ्य रक्षा का।

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