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सल्फास मिला हुआ अनाज खाने से गाय की मौत
सल्फास मिला हुआ अनाज खाने से गाय की मौत|Neha Srivastava - RE
मध्य प्रदेश

बीना के अनाज मंडी में सल्फास मिला हुआ अनाज खाने से गाय की मौत

जहरीला सल्फास मिलाये गये अनाज, कीटनाशक छिड़के हुए अनाज, पोलीथिन में रख कल फेंके गये खाने को बड़ी मात्रा में पालीथिन सहित निगल जाने से अक्सर बेजुबान, निर्दोष गायों की दर्दनाक मृत्यु हो जाती है।

Sudha Choubey

Rajesh Jain

राज एक्सप्रेस। बीते दिन रात्रि करीब 11 बजे बीना के सिविल अस्पताल के नजदीक स्थित कृषि उपज मंडी के पास, सल्फास की जहरीली दवा मिले हुए अनाज खाने से गाय की दर्दनाक मृत्यु हो गई। गाय को गंभीर अवस्था में बीना के सिविल अस्पताल ले जाया गया, अस्पताल के ओपीडी परिसर में जाने के बाद गाय तड़प कर गिर पड़ी और उसकी मौत हो गयी।

गौ-रक्षकों को किया गया सूचित :

इस मौके पर उपस्थित डॉ. वीरेन्द्र सिंह ठाकुर व अन्य अस्पताल कर्मचारियों नें बीना के गौ-रक्षकों को गाय की इस गंभीर हालत के बारे में सूचित किया। बीना के जानवरों के सरकारी डॉक्टर से मोबाईल पर संपर्क स्थापित नहीं किया जा सका। थोड़ी ही देर में बीना के कुछ दयालु गौ-रक्षक सिविल अस्पताल बीना पहुंच गये। लगभग 30 से 45 मिनिट तक बीना के गौ-रक्षकों एवं सिविल अस्पताल बीना के चिकित्सा अधिकारी डॉ. वीरेन्द्र सिंह ठाकुर द्वारा सल्फास जहर से पीड़ित इस गंभीर बीमार गाय को बचाने का प्रयास किया गया परंतु सल्फास जहर पूरे शरीर में फैल चुके होने के कारण दम घुटने एवं सांस रूक जाने से गाय के मुंह से झाग आ गया एवं उसकी दर्दनाक मृत्यु हो गई।

आस-पास के रहने वाले व्यक्तियों का कहना :

मंडी के आस-पास रहने वाले व्यक्तियों का कहना है कि, व्यापारी अपनी गोदामों में अनाज का भंडारण करते वक्त उसमें सल्फास की गोली मिलाते हैं। गोदाम खाली होने जाने पर सारा कचरा गोदाम के बाहर फेंक देते हैं। इस कचरे में अनाज के दाने भी होते हैं, जिसे मवेशी खा जाते है और उन्हें नुकसान झेलना पड़ता है।

जहरीले अनाज से बेजुबान जानवरों की हो रही है मृत्यु :

अनाज में जहरीला सल्फास मिलाये गये अनाज खाने, कीटनाशक छिड़के हुए अनाज, फल सब्जियां खाने व पोलीथिन में रख कल फेंके गये खाने को बड़ी मात्रा में पालीथिन सहित निगल कर खा लेने से आंतों में अवरोध आ जाने से अक्सर इन बेजुबान, निर्दोष गायों की तड़प-तड़प कर दर्दनाक मृत्यु हो जाती है। हमारे यह दयालु गौ-रक्षक इन पीड़ित गायों को अपने स्वयं के व्यय पर बचाने का पूरा प्रयास करते हैं, परंतु उचित प्रशिक्षण एवं उपकरणों, संसाधनों की कमी के कारण यह लोग इन गायों का पूर्ण उपचार करने में असमर्थ हो जाते हैं और परिणामस्वरूप इन निर्दोष पशुओं की मृत्यु हो जाती है।