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500 ट्राली रेत का अवैध खनन
500 ट्राली रेत का अवैध खनन|Ganesh Dange
मध्य प्रदेश

ताप्ती नदी से रोज 500 ट्राली का अवैध खनन, शासन को 5 लाख का नुकसान

बुरहानपुर: ताप्ती नदी से 500 ट्रालियां रोज का रेत अवैध खनन कर जिलेभर में रेत माफिया अवैध कमाई कर रहे हैं, इससे शासन का खजाना कैसे भरेगा, शासन को 5 लाख का नुकसान व लाखोंं के राजस्व की हानि हो रही है।

Ganesh Dunge
Priyanka Sahu

Ganesh Dunge

Priyanka Sahu

राज एक्‍सप्रेस। इस अवैध धंधे पर कार्रवाई तो की जाती है, लेकिन पूरी तरह नहीं रोक लग पा रही है। अवैध खनन लगातार जारी है, जिलेभर में एक दिन में लगभग 500 ट्राली रेत का अवैध खनन और परिवहन हो रहा है। एक ट्राली रेत का परिवहन 1000 रुपए की उगाही होती है, ये पूरा पैसा रेत माफियाओं की जेबों में जा रहा है।

शासन को 5 लाख का नुकसान :

मतलब एक दिन में शासन को पूरे 5 लाख रुपए राजस्व का नुकसान हो रहा है। अब अंदाजा लगाया जा सकता है कि, एक दिन में 5 लाख रुपए का अवैध खनन हो रहा हैं, तो एक माह में शासन को कितना नुकसान हो रहा है। यहींं सिलसिला चलता रहा तो शासन का खजाना कैसे भरेगा। शासन- प्रशासन को इस पर चिंतन करने की जरूरत है, क्योंकि शासन को नुकसान होना मतलब आम आदमी के अधिकारों और जरूरतों को भी नुकसान हो रहा है। शासन का खजाना ही नहीं भरेगा तो सरकार कैसे विकास करेगी।

खुले आम रेत का अवैध खनन :

ये अवैध खनन एक या दो जगह नहीं हो रहा है। जिले की 9 खदानें तो है ही, साथ ही कई ऐसे नदी- नाले हैं, जिन तक पहुंचान अफसरों के लिए भी संभव नहीं है। बुरहानपुर सहित नेपानगर क्षेत्र में हर दिन धड़ल्ले अवैध खनन चल रहा है। देड़तलाई क्षेत्र तो इसके लिए कुख्यात है। देड़तलाई और नेपानगर की बात करें, तो ये जिला मुख्यालय से काफी दूरी पर है, लेकिन शहर से सटकर बहने वाली ताप्ती नदी के राजघाट पर खुले आम रेत का अवैध खनन होते देखा जा सकता है। ऐसा भी नहीं है कि, रात के अंधेरे में अवैध खनन कर चोरी, छिपे रेत ले जाई जा रही है। सुबह से लेकर शाम तक खुलेआम रेत माफिया मजदूरों से रेत निकलवाकर जिलेभर में सप्लाय कर रहे हैं। रेत माफिया दिन में 10,000 कमा रहा, शासन को फूटी कौड़ी तक नहीं मिल रही, अवैध खनन में एक पूरी चैन काम करती है।

पूरी चैन ऐसे करती हैं काम :

ताप्ती नदी के राजघाट की बात करें, तो यहां पर मजदूर लगाकर रेत निकलवाई जाती है। मजदूर, नाव व ड्राइवर सहित अन्‍य को अलग-अलग रूपए दिए जाते हैं।

  • मजदूर को 200 रुपए देना पड़ते हैं।

  • नाव में भरकर रेत किनारे तक लाने वाले को 700 रुपए दिए जाते हैं।

  • ड्राइवर को 200 रुपए दिए जाते है, जो रेत से भरी ट्राली-ट्रेक्टर लेकर निकलता है। इसके अलावा 100 रुपए डीजल का खर्च आता है।

  • इस प्रकार से रेत माफिया के कुल 1200 रुपए खर्च होते हैं।

  • इसके बाद रेत माफिया एक ट्राली रेत पूरे 22 रुपए में बेचता हैं, मतलब एक ट्राली रेत पर 1000 रुपए कमाएं जाते हैं।

  • रेत माफिया दिन में 10 ट्राली रेत सप्लाय कर, पूरे 10,000 रुपए एक दिन में कमा रहा, सब रुपए रेत माफिया के हाते हैं, शासन को एक फूटी कौड़ी भी नहीं मिलती हैं।

नदी से रेत निकालते हुए
नदी से रेत निकालते हुए
Ganesh Dange

इन घाटों पर हो रहा सबसे ज्यादा अवैध खनन :

जिले में नागझिरी और बोहरा घाट पर सबसे ज्यादा अवैध खनन हो रहा है। एक दिन में सैकड़ो ट्राली रेत का परिवहन इन घाटों से हो रहा है। इसके बाद राजघाट का नंबर आता है, ये रेत से भरी ट्रेक्टर-ट्राली बीच शहर में से होकर निकलती है। सरपट दौड़ती है और डिमांड वाली जगह पर रेत डलवाकर वापस घाट पर पहुंच जाती है, इन पर कार्रवाई की जिम्मेदारी खनिज विभाग की है, लेकिन खनिज विभाग भी एक या दो कार्रवाई करता है, उसके बाद पलटकर नहीं देखता।

खदानों की नीलामी :

जिस घाट पर रेत नहीं निकलती उसे नालामी में शामिल कर दिया, जल्द ही खदानों की नीलामी होने वाली है, अब अवैध खनन कैसे किया जाएं तो इसकी प्लानिंग भी बहुत सोच समझकर बनाई गई है। सुखपुरी और रेहटा ऐसे घाट है, जिनसे रेत नहीं निकलती है और इन्हें नीलामी में शामिल किया है। मतलब ये दो नाम पोर्टल पर चढ़ा दिए गए है। अब दूसरे दो घाट है- हतनूर और जयसिंहपुरा। इन घाटों पर अच्छी, खासी रेत निकलती है, लेकिन इनका नाम पोर्टल पर नहीं चढ़ाया गया है। अब होगा ये कि, सुखपुरी और रेहटा घाट से रेत नहीं निकलेगी तो जयसिंहपुरा और हतनूर घाट से अवैध खनन होगा।

जिले में है ये घाट :

नीलामी के लिए पोर्टल पर बुरहानपुर नेपानगर के मिलाकर 9 घाट चढ़ाए गए है। इसमें बुरहानपुर के फतेहपुरए गव्हाना, सिरसोदा, नाचनखेड़ा, सुखपुरी, रेहटा घाट है। नेपा के दर्यापुर, रत्नापुर और रामाखेड़ा घाट है। ताप्ती खनिज ट्रेक्टर यूनियन के सचिव शेख मकसूद ने बताया बुरहानपुर और नेपा के घाटों को मिला दिया गया है। इस कारण गरीब ट्रेक्टर वालों को रोजगार नहीं मिलेगा, बुरहानपुर और नेपा के घाटों को अलग-अलग किया जाना चाहिए।