यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर बीजेपी पर भड़के AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी, कही यह बात
यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर बीजेपी पर भड़के असदुद्दीन ओवैसीSocial Media

यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर बीजेपी पर भड़के AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी, कही यह बात

ऑल-इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल-मुस्लिमीन (AIMIM) चीफ असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (समान नागरिक संहिता) को लेकर विरोध जताया है।

राज एक्सप्रेस। ऑल-इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल-मुस्लिमीन (AIMIM) चीफ असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने अक्सर अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में रहते हैं। हाल ही में देशभर में यूनिफॉर्म सिविल कोड (समान नागरिक संहिता) को लेकर शुरू हुई चर्चाओं के बीच एआईएमआईएम के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने तीखा विरोध जताया है। ओवैसी ने कहा, इस देश में इसकी (समान नागरिक संहिता) आवश्यकता नहीं है... विधि आयोग का मानना ​​है कि यूसीसी की आवश्यकता नहीं है।

असदुद्दीन ओवैसी ने कही यह बात:

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने महाराष्ट्र के औरंगाबाद में कहा कि, "हम इसके (यूनिफॉर्म सिविल कोड) ख़िलाफ़ है। लॉ कमीशन ने खुद यह बोला है कि, भारत में 'यूनिफॉर्म सिविल कोड' की ज़रुरत नहीं है। अर्थव्यवस्था बैठ गई है, बेरोज़गारी, महंगाई बढ़ रही है और आपको 'यूनिफॉर्म सिविल कोड' की फिक्र है।"

असदुद्दीन ओवैसी ने इस दौरान गोवा के समान नागरिक संहिता के एक प्रावधान पर चुप रहने के लिए भाजपा की आलोचना की, जहां हिंदू पुरुषों को दो बार शादी करने की अनुमति है। उन्होंने कहा कि, "गोवा नागरिक संहिता के अनुसार, हिंदू पुरुषों को दूसरी शादी का अधिकार है, अगर पत्नी 30 साल की उम्र तक एक लड़का को जन्म देने में विफल रहती है। उस राज्य में भी भाजपा की सरकार है, लेकिन वे इस मामले पर चुप हैं।"

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वास ने कही यह बात:

वहीं, दूसरी तरफ असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वास सरमा ने यूनिफॉर्म सिविल कोड की वकालत की है। उन्होंने कहा कि, "देश में हर कोई यूसीसी के पक्ष में है। उन्होंने कहा कि, कोई भी मुस्लिम महिला यह नहीं चाहती कि उसका पति तीन अन्य पत्नियों को घर ले आए। इस बात की तस्दीक किसी भी मुस्लिम महिलाओं से पूछकर की जा सकती है।"

क्या है यूनिफॉर्म सिविल कोड:

वहीं अगर यूनिफॉर्म सिविल कोड की बात करे, तो समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड का अर्थ होता है देश के हर नागरिक के लिए एक समान कानून होना, चाहे वह किसी भी धर्म या जाति का हो। समान नागरिक संहिता में शादी, तलाक और जमीन-जायदाद के बंटवारे में सभी धर्मों के लिए एक ही कानून लागू होगा।

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