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Citizenship Amendment Bill 2019
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पॉलिटिक्स

ऐतिहासिक कदम! नागरिकता संशोधन विधेयक को मंजूरी

कैबिनेट ने नागरिकता संशोधन विधेयक को मंजूरी देते हुए इस फैसले को 370 जैसा ऐतिहासिक कदम बताया है, हालांकि अभी असली परीक्षा बाकी है, अब गृहमंत्री इस बिल को संसद में पेश करेेंगे...

Priyanka Sahu

Priyanka Sahu

राज एक्‍सप्रेस। केंद्र की मोदी सरकार द्वारा एक और बड़ा फैसला लेते हुए 'नागरिकता संशोधन बिल' (Citizenship Amendment Bill 2019) को मंजूरी दे दी है। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद अब इस बिल पर ऐतिहासिक कदम उठाया है, हालांकि मंजूरी मिलने के बाद अब असली परीक्षा संसद में होंगी और यह परीक्षा होनी अभी बाकी है।

अब अगली परीक्षा अमित शाह की :

जीं हांं! 'नागरिकता संशोधन बिल' को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद अब गृहमंत्री अमित शाह द्वारा संसद में पेश किया जाएगा, इस बिल को संसद में पेश किया और यह ही असली परीक्षा होगी।

विपक्षी दल का कड़ा विरोध :

यहां विपक्षी दल इस बिल को लेकर कड़ा विरोध कर रहे हैं, तो वहीं सरकार ने इसकी मंजूरी देते हुए आगे बढ़ने की मंशा जाहिर कर दी है और सरकार ने 'नागरिकता संशोधन विधेयक' को 370 जैसा ऐतिहासिक कदम बताया हैं। हालांकि इस पर विपक्ष का कहना हैै कि, संविधान की भावना के विपरीत, आस्था के आधार पर नागरिकों में भेद नहीं किया जाना चाहिए। आखिर जब संसद में यह इस बिल पेश होगा, तो इसपर हंगामा हो सकता है। वहीं कांग्रेस नेता का बयान भी सामने आया है, जिसमें कहा है कि-

वह नागरिकता संशोधन बिल का विरोध करने जा रहे हैं, क्योंकि नागरिकों को धर्म के आधार पर बांटा नहीं जा सकता है।
कांग्रेस नेता शशि थरूर

कांग्रेस के अलावा AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी भी इस बिल के विरोध में हैं। सीपीआई (एम) नेता सीताराम येचुरी ने भी ट्विटर के जरिए मोदी सरकार को घेरा है-

नागरिकों को धर्म के आधार पर नहीं बांटा जा सकता है, यही वजह है कि, इस बिल का समर्थन नहीं किया जा सकता है, ये बिल भारत के आधार को ही तोड़ता है। भारत के नागरिक, सिर्फ नागरिक हैं, उन्हें उनके धर्म, जाति के आधार पर नहीं बांटा जा सकता है।
सीपीआई (एम) नेता सीताराम येचुरी

क्या है नागरिकता संशोधन बिल?

नागरिकता संशोधन विधेयक वहीं बिल है, जिसपर पूरे देश में हंगामा मचा हुआ है, यह नागरिकता कानून के तहत 1955 के सिटिजनशिप ऐक्ट में बदलाव का प्रस्ताव है। इसके तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश व अफगानिस्तान से भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई शरणार्थियों को नागरिकता देने के नियमों का प्रस्ताव है, फिलहाल अभी तक भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए व्यक्ति को यहाँ कम से कम 11 साल रहना जरूरी होता था, लेकिन अब इस नियम को आसान बनाने व नागरिकता हासिल करने की अवधि कम यानी एक साल से 6 साल करने की कोशिश की जा रही है।

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