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कमलनाथ सरकार का अनूठा प्रयास
कमलनाथ सरकार का अनूठा प्रयास|Neha Shrivastava - RE
पॉलिटिक्स

कमलनाथ सरकार का अनूठा प्रयास

कमलनाथ सरकार मध्यप्रदेश में अनूठा प्रयोग करने जा रही है। इसके तहत स्विट्जरलैंड की तर्ज पर प्रदेश में ‘टाइम बैंक’ बनाया जाएगा। जैसे बुरे दौर के लिए बैंक में पैसा रखा जाता है।

राज एक्सप्रेस

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राज एक्सप्रेस। कमलनाथ सरकार मध्यप्रदेश में अनूठा प्रयोग करने जा रही है। इसके तहत स्विट्जरलैंड की तर्ज पर प्रदेश में ‘टाइम बैंक’ बनाया जाएगा। जैसे बुरे दौर के लिए बैंक में पैसा रखा जाता है, उसी तरह इसमें आम आदमी अपने बुरे समय के लिए ‘टाइम ’ को रिजर्व में रख पाएगा। कमलनाथ सरकार ने जिस टाइम बैंक की स्थापना का विचार मध्यप्रदेश के लिए बनाया है, उसे पूरे देश में लागू करने की जरूरत है।

टाइम बैंक का सबसे बड़ा फायदा अकेले रहने वाले, बुजुर्ग और दूसरे जरूरतमंद लोगों को होगा, जिन्हें एक निश्चित समय के लिए किसी की मदद की जरूरत पड़ती है। अभी दुनिया में स्विट्जरलैंड में टाइम बैंक है। वहां की सोशल लाइफ काफी बेहतर मानी जाती है। कोई भी व्यक्ति वहां टाइम बैंकिंग करके बुरे वक्त में अपने लिए देख-रेख हासिल कर लेता है। इसी कारण मध्यप्रदेश में इस पर काम शुरू हो गया है।

टाइम बैंक की एक सरकारी बॉडी होगी, जिसमें ट्रस्ट की तरह गवर्निंग अथॉरिटी काम करेगी। इसका सॉफ्टवेयर तैयार होगा, जिसमें टाइम-मैनेजमेंट के डाटा अपडेट होंगे। हर व्यक्ति का सत्यापन करके उसका एक टाइम बैंक खाता होगा, जिसमें टाइम रिजर्व होता जाएगा। टाइम बैंकिंग में टाइम देने वालों को बाद में दूसरा व्यक्ति जाकर अपना टाइम देगा, इसलिए सत्यापन जरूरी रहेगा। यदि आप आज किसी व्यक्ति की सेवा में अपना समय देंगे तो उसे बाद में कभी भी निश्चित समय के लिए पा सकेंगे।

आप यदि तीन महीने तक एक घंटे रोज किसी व्यक्ति, संस्था या जगह पर समाजसेवा करते हैं या अन्य प्रकार से समय देते हैं तो तीन महीने में खर्च किए गए 90 घंटे टाइम बैंक में जमा हो जाएंगे। भविष्य में कभी बीमार होने या फिर अन्य प्रकार से किसी व्यक्ति की जरूरत पड़ने पर आप बैंक में जमा टाइम का इस्तेमाल कर सकेंगे। इसके लिए आपको टाइम बैंक को ई-मेल या फोन करना होगा। बैंक आपके खाते में जमा टाइम के अनुसार आपके लिए एक अन्य वॉलेंटियर को सेवा के लिए भेजेगा।

यह आप पर निर्भर करता है कि, आप बैंक में जमा टाइम एक साथ खर्च करना चाहते हैं या फिर किस्तों में। इतना ही नहीं, बैंक में जमा किए गए टाइम पर बैंक ब्याज के रूप में अतिरिक्त घंटे भी देगा, जिससे जरूरतमंद व्यक्ति आवश्यकता पड़ने पर बैंक में जमा टाइम से ज्यादा टाइम तक अपनी देखरेख या अन्य कार्य के लिए वॉलेंटियर की सेवा ले सकेगा। मध्य प्रदेश सरकार की यह पहल इसलिए खास है क्योंकि आज न सिर्फ भारत बल्कि दुनियाभर में अकेलेपन का चलन बढ़ता जा रहा है। भागमभाग भरी जिंदगी में किसी के पास किसी के लिए समय नहीं है।

अकेलापन ऐसी गंभीर समस्या बन चुकी है जो एक महामारी की तरह पूरी दुनिया में फैल रही है हैरानी की बात यह है कि भारत जैसे अध्यात्मिक देश के पास भी इस परेशानी से लड़ने का कोई कारगर उपाय नहीं है। आज हमारे पास संचार के सबसे बड़े-बड़े सबसे ज्यादा साधन हैं जितने संचार के साधन आज लोगों के पास है पूरी दुनिया में इतने कभी नहीं थे। सोशल मीडिया हमारे पास है, मोबाइल फोन आपके पास है, इंटरनेट आपके पास है आप जिससे चाहे पूरी दुनिया में जुड़े रह सकते हैं लेकिन फिर भी अकेले हैं।

जानकर हैरानी होगी कि अमेरिका, ब्रिटेन, चीन और जापान जैसे शक्तिशाली देश विकास की ऊंचाइयों तक पहुंचने के लिए अकेलेपन की समस्या से अब समझौता कर चुके हैं पिछले साल ब्रिटेन में किया गया जिसमें यह पाया गया कि वहां के 90 लाख लोग अकेलेपन के शिकार हैं। इस सर्वे में लोगों ने कहा कि परिवार के दूसरे सदस्य अपने काम में इतने व्यस्त हैं कि उन्हें न तो किसी से बात करने की इच्छा है न ही उनके पास समय। रिसर्च के मुताबिक अकेलेपन से होने वाला नुकसान दिन भर में 15 सिगरेट पीने के नुकसान के बराबर है।

अकेलेपन और इससे होने वाले तनाव की वजह से स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। अकेलापन अगर लंबे समय तक बना रहे तो एक गंभीर बीमारी में बदल जाता है, जिससे मौत की आशंका 26 फीसदी तक बढ़ जाती है। नौकरी करने वाले लोग अकेलेपन की समस्या की वजह से अपना काम ठीक से नहीं कर पाते जिसकी वजह से ब्रिटेन जैसे देश को प्रतिवर्ष 24 हजार करोड़ का नुकसान हुआ। वर्ष 2017 में जापान में करीब 45 हजार लोगों की मौत का कारण अकेलापन था।

अमेरिकन पब्लिक हेल्थ एसोसिएशन के एक रिसर्च के मुताबिक अकेलेपन की वजह से असमय मौत की संभावना बढ़ जाती है दुनिया भर के ज्यादातर डॉक्टर यह मानते हैं दिल की बीमारियों के 30 फीसदी मामलों में एकमात्र कारण अकेलापन बताया गया। दुख की बात यह है कि इस सब के बावजूद हमारे देश के लोग मानसिक समस्याओं पर बात ही नहीं करना चाहते। उन्हें लगता है कि अकेलापन व डिप्रेशन जैसी मानसिक समस्याओं पर बात करने से वह शायद मजाक का पात्र बन जाएंगे।

हमारा सिस्टम भी ऐसे लोगों की कोई मदद नहीं करता वह भी उन्हें इस समस्या को झेलने के लिए बिल्कुल अकेला छोड़ देते हैं। इस मामले में ब्रिटेन ने एक बहुत ही अच्छी शुरुआत की है। ब्रिटेन की सरकार ने अकेलेपन से पीड़ित लोगों की मदद करने के लिए पिछले साल अलग मंत्रलय बनाया है, जिसे मिनिस्ट्री ऑफ मिनिस्ट्री फॉर लोनलीनेस का नाम दिया गया है यानी अकेलेपन का अलग मंत्रलय, इस मंत्रालय ने पीड़ित लोगों के लिए एक हेल्पलाइन शुरू की गई है। इसमें ऐसे वालंटियर ग्रुप्स बनाए गए हैं जिसमें शामिल लोग अकेलेपन से जूझ रहे लोगों से बात करते हैं उनके लिए समय निकालते हैं। ऐसे इसके लिए उन्हें वहां की सरकार से पैसा मिलता है फीस मिलती है।

अगर आपने अपने परिवार के सदस्यों से बात करना छोड़ रखा है या बहुत कम बात करते हैं अपने दोस्तों से आप बात नहीं करते हैं तो आज तो आपके पास इतने साधने बात करने के लिए फोन उठाइए। उनसे बात कीजिए। अगर उन्हें आपकी जरूरत है तो तुरंत वहां पहुंचिए और उनकी मदद कीजिए और अगर आप उनकी जरूरत है तो निसंकोच उन्हें बताइए कि मुझे आपकी जरूरत है। हमारे देश में चौक चौराहों पर चाय की दुकानों पर भी इकट्ठा होकर देर तक बातें करने की परंपरा रही है, लेकिन अब यह परंपरा भी दूर होती जा रही है। कुल मिलाकर कमलनाथ सरकार ने जिस टाइम बैंक की स्थापना का विचार मध्यप्रदेश के लिए बनाया है, उसे पूरे देश में लागू करने की जरूरत है। बैंक बनाने के अलावा लोगों में यह संदेश पहुंचाना भी जरूरी है कि उन्हें अपने और अपनों के लिए समय हर हाल में निकालना जरूरी है।