श्रमिकों के दुख-दर्द वाले वीडियो में हमदर्दी कम-नाटक ज्यादा: मायावती
श्रमिकों के दुख-दर्द वाले वीडियो में हमदर्दी कम-नाटक ज्यादा: मायावती|Priyanka Sahu -RE
पॉलिटिक्स

श्रमिकों के दुख-दर्द वाले वीडियो में हमदर्दी कम-नाटक ज्यादा: मायावती

मायावती ने कहा, लाॅकडाउन त्रासदी के शिकार करोड़ों प्रवासी श्रमिकों की जो दुर्दशा दिख रही है, उसकी असली कसूरवार कांग्रेस है और जो वीडियो दिखाया जा रहा वह हमदर्दी कम, नाटक ज्‍यादा है...

Priyanka Sahu

Priyanka Sahu

राज एक्‍सप्रेस। कोरोना काल के चलते देशव्‍यापी लॉकडाउन की मार सभी झेल रहे है, परंतु इस दौरान सबसे ज्यादा तकलीफ प्रवासी मजदूरों को उठानी पड़ी है और मजदूरों की परेशानी के चलते इस मामले पर सियासत भी हो रही है। इस दौरान बसपा कांग्रेस को निशाने पर लिए हुए हैं।

आज कांग्रेस के पूर्व अध्‍यक्ष राहुल गांधी द्वारा प्रवासी श्रमिकों के दुख दर्द वाला वीडियो जारी किया गया है, जिसको लेकर उत्‍तर प्रदेश की पूर्व मुख्‍यमंत्री व बहुजन समाजवादी पार्टी की मुखिया अध्‍यक्ष मयावती भड़की हैं और उन्‍होंने ट्वीट के जरिए अपनी प्रतिक्रिया साझा कर इस अंदाज में निशाना साधा।

मायावती ने लगातार 4 ट्वीट किए साझा :

पहले ट्वीट में मायावती ने लिखा- आज पूरे देश में कोरोना लाॅकडाउन के कारण करोड़ों प्रवासी श्रमिकों की जो दुर्दशा दिख रही है उसकी असली कसूरवार कांग्रेस है, क्योंकि आजादी के बाद इनके लम्बे शासनकाल के दौरान अगर रोजी-रोटी की सही व्यवस्था गाँव/शहरों में की होती तो इन्हें दूसरे राज्यों में क्यों पलायन करना पड़ता?

दूसरे ट्वीट में मायावती ने लिखा- वैसे ही वर्तमान में कांग्रेसी नेता द्वारा लाॅकडाउन त्रासदी के शिकार कुछ श्रमिकों के दुःख-दर्द बांटने सम्बंधी जो वीडियो दिखाया जा रहा है वह हमदर्दी वाला कम व नाटक ज्यादा लगता है। कांग्रेस अगर यह बताती कि उसने उनसे मिलते समय कितने लोगों की वास्तविक मदद की है तो यह बेहतर होता।

तीसरे ट्वीट में मायावती ने लिखा- साथ ही, बीजेपी की केन्द्र व राज्य सरकारें कांग्रेस के पदचिन्हों पर ना चलकर, इन बेहाल घर वापसी कर रहे मजदूरों को उनके गांवों/शहरों में ही रोजी-रोटी की सही व्यवस्था करके उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की नीति पर यदि अमल करती है तो फिर आगे ऐसी दुर्दशा इन्हें शायद कभी नहीं झेलनी पड़ेगी।

चौथे ट्वीट में मायावती ने लिखा- बीएसपी के लोगों से भी पुनः अपील है कि जिन प्रवासी मजदूरों को उनके घर लौटने पर उन्हें गाँवों से दूर अलग-थलग रखा गया है तथा उन्हें उचित सरकारी मदद नहीं मिल रही है तो ऐसे लोगों को भी अपना मानकर उनकी भरसक मानवीय मदद करने का प्रयास करें। मजलूम ही मजलूम की सही मदद कर सकता है।

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