नूपुर शर्मा को फांसी देने की मांग वाले बयान से ओवैसी ने किया किनारा और दिया यह बड़ा बयान
नूपुर को फांसी देने की मांग वाले बयान से ओवैसी ने किया किनाराSocial Media

नूपुर शर्मा को फांसी देने की मांग वाले बयान से ओवैसी ने किया किनारा और दिया यह बड़ा बयान

AIMIM के औरंगाबाद के सांसद इम्तियाज जलील की ओर से बीजेपी से निलंबित नूपुर शर्मा के पैगंबर मोहम्मद की विवादित टिप्पणी पर फांसी की मांग की। तो वहीं, ओवैसी ने जलील के बयान से किया किनारा और दिया यह बयान।

दिल्ली, भारत। पैगंबर मुहम्मद पर नूपुर शर्मा के विवादित बयान को लेकर मचे भूचाल पर सुलगी राजनीति थम ही नहीं रही है, भाजपा विपक्ष नेताओं की टिप्पणियों का सामना कर रहे हैं। नेताओं द्वारा रिएक्शन दिए जाने का दौर जारी है और अब नूपुर शर्मा को फांसी की मांग उठी है, जिस पर अब ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के चीफ असदुद्दीन ओवैसी का बयान आया है।

इम्तियाज जलील के बयान पर बोले असदुद्दीन ओवैसी :

दरअसल, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के औरंगाबाद के सांसद इम्तियाज जलील की ओर से बीजेपी से निलंबित की गई नूपुर शर्मा के पैगंबर मोहम्मद पर उनकी विवादित टिप्पणी के लिए फांसी की मांग की और कहा- नुपूर शर्मा को औरंगाबाद के चौक पर ‘फांसी’ दी जानी चाहिए। ऐसे में इम्तियाज जलील की इस टिप्पणी से एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने किनारा किया और यह बयान दिया है।

नुपुर शर्मा को पैगंबर मोहम्मद के बारे में उनकी विवादास्पद टिप्पणी के लिए गिरफ्तार किया जाना चाहिए। इस मुद्दे पर किसी को भी हिंसा में शामिल नहीं होना चाहिए और न ही पुलिस को कानून अपने हाथ में लेना चाहिए।

एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी

ओवैसी ने बीजेपी पर लगाया आरोप :

इतना ही नहीं असदुद्दीन ओवैसी ने आगे बीजेपी पर आरोप लगाते हुए यह बात भी कही कि, "एक टीवी बहस के दौरान शर्मा की टिप्पणियों के बाद बीजेपी ने उनके खिलाफ समय पर कार्रवाई नहीं की, जिससे एक बड़ा विवाद पैदा हो गया। उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए, उन्हें इतने दिनों से गिरफ्तार नहीं किया गया है। आप उन्हें गिरफ्तार क्यों नहीं करते और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं करते? आपको कौन रोक रहा है?’’

बता दें कि, इम्तियाज जलील ने कहा था, ''इस्लाम शांति का धर्म है। ये सच है कि लोग नाराज हैं। हम भी मांग करते हैं कि नूपुर शर्मा को फांसी की सजा दी जानी चाहिए। अगर उन्हें आसानी से छोड़ दिया जाता है, तो इससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचेगी। हम कहना चाहते हैं कि अगर कोई व्यक्ति किसी जाति, धर्म, धर्मगुरु या हमारे पैगंबर के खिलाफ ऐसी टिप्पणी कर रहा है, तो ऐसा कानून होना चाहिए, जो सख्त और तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करे, सिर्फ उन्हें पार्टी से हटाना ही काफी नहीं है।''

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