राहुल गांधी का तंज- उनका मरना देखा जमाने ने, एक मोदी सरकार जिसे खबर ना हुई
राहुल गांधी का तंज- उनका मरना देखा जमाने ने, एक मोदी सरकार जिसे खबर ना हुई|Priyanka Sahu -RE
पॉलिटिक्स

राहुल गांधी का तंज- उनका मरना देखा जमाने ने, एक मोदी सरकार जिसे खबर ना हुई

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी बोले-मोदी सरकार नहीं जानती कि लॉकडाउन में कितने प्रवासी मज़दूर मरे और कितनी नौकरियाँ गयीं। तुमने ना गिना तो क्या मौत ना हुई? हाँ मगर दुख है सरकार पे असर ना हुई...

Priyanka Sahu

Priyanka Sahu

दिल्‍ली, भारत। कांग्रेस नेता राहुल गांधी केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ जबरदस्‍त मोर्चा खोले हुए है, हर दिन एक न एक मुद्देंं को लेकर सरकार की आलोचना कर रहे हैं। अब आज उन्‍होंने कोरोना वायरस को रोकने के लिए 25 मार्च से देशभर में लागू किए गए 68 दिनों के लॉकडाउन में प्रवासी मज़दूरों की तकलीफ को लेकर ये बात कही है कि, कितने प्रवासी मजदूरों की मौत हुई? इसका आंकड़ा मोदी सरकार के पास नहीं है।

राहुल गांधी ने ट्वीट में लिखा :

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी कोरोना वायरस से निपटने के तरीके को लेकर मोदी सरकार पर सवाल उठा ही रहे है। राहुल गांधी द्वारा आज अपने ट्विटर अकांउट से शेयर किए गए इस ट्वीट में लिखा- मोदी सरकार नहीं जानती कि लॉकडाउन में कितने प्रवासी मज़दूर मरे और कितनी नौकरियाँ गयीं। तुमने ना गिना तो क्या मौत ना हुई? हाँ मगर दुख है सरकार पे असर ना हुई, उनका मरना देखा ज़माने ने, एक मोदी सरकार है जिसे ख़बर ना हुई।

राहुल गांधी ने अपनी इस बात को शायराना अंदाज़ के ज़रिए कहने की कोशिश की है।

बता दें, राहुल गांधी ने प्रवासी मज़दूरों की मौत के आंकड़ेे के सहारे मोदी सरकार पर तंज उस वक्‍त कसा, जब सोमवार को केंद्र सरकार ने एक सवाल के जवाब में कहा था कि, इस बात कोई रिकॉर्ड नहीं रखा गया है कि लॉकडाउन में कितने प्रवासी मजदूर मारे गए और कितनों की नौकरियां गईं।

मोदी जी का एक और किसान-विरोधी षड्यंत्र :

बीते दिन यानी कल सोमवार को राहुल गांधी ने किसानों को लेकर ट्वीट किया था, जिसमें उन्‍होंने लिखा था- किसान ही हैं जो ख़रीद खुदरा में और अपने उत्पाद की बिक्री थोक के भाव करते हैं। मोदी सरकार के तीन 'काले' अध्यादेश किसान-खेतिहर मज़दूर पर घातक प्रहार हैं ताकि न तो उन्हें MSP व हक़ मिलें और मजबूरी में किसान अपनी ज़मीन पूँजीपतियों को बेच दें। मोदी जी का एक और किसान-विरोधी षड्यंत्र।

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