CM बोम्मई पर गंभीर आरोप, रणदीप सुरजेवाला ने की इस्तीफे की मांग
CM बोम्मई पर गंभीर आरोप, रणदीप सुरजेवाला ने की इस्तीफे की मांगSyed Dabeer Hussain - RE

कर्नाटक CM बोम्मई पर गंभीर आरोप, रणदीप सुरजेवाला ने की इस्तीफे की मांग

कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला का आरोप- कर्नाटक के मुख्यमंत्री सहित सत्ता के गढ़ में बैठे लोग मतदाता डाटा की चोरी, धोखाधड़ी और प्रतिरूपण के लिए जिम्मेदार हैं।

कर्नाटक, भारत। कर्नाटक में 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राज्‍य में आरोप-प्रत्यारोप के साथ अभी से सियासी हलचल शुरू हो गई है। आज गुरूवार को कांग्रेस महासचिव और पार्टी के कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला का बयान सामने आया, जिसमें उन्‍होंने कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई पर कई गंभीर आरोप लगाए है।

CM बसवराज बोम्मई के इस्तीफे की मांग :

दरअसल, कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई के इस्तीफे की मांग करते हुए आरोप लगाया जा रहा है। इस बारे में कांग्रेस महासचिव और पार्टी के कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने मीडिया को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि, ''वह घर-घर जाकर मतदाता जानकारी एकत्र करने के लिए एक निजी संस्था को नियुक्त करके भ्रष्ट चुनावी अभ्यास के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं।''

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सहित सत्ता के गढ़ में बैठे लोग मतदाता डाटा की चोरी, धोखाधड़ी और प्रतिरूपण के लिए जिम्मेदार हैं। सीएम बोम्मई, उनके अधिकारी, सरकारी अधिकारी,BBMP के लोग और राज्य चुनाव प्राधिकरण लोकतंत्र को रौंदने में भागीदार हैं।

रणदीप सिंह सुरजेवाला

ये सरकार जनमत खो चुकी है, इसलिए वोट चोरी कर रही है :

इतना ही नहीं, कांग्रेस पार्टी के कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने आगे यह भी कहा है कि, ''इन सबके खिलाफ FIR दर्ज हो और सीएम बोम्मई जी इस्तीफा दे और 30 दिन में कर्नाटक हाई कोर्ट के मुख्य न्यायधीश की अध्यक्षता में एक जांच हो ताकि सच्चाई सामने आए। ये सरकार जनमत खो चुकी है इसलिए वोट चोरी कर रही है। विपक्ष नेता इन सबके खिलाफ FIR दर्ज करवाने जाएंगे।''

उन्‍होंने कहा- डेटा के कैश को सरकार के गरुड़ एप्लिकेशन में फीड नहीं किया गया था, बल्कि निजी फर्म के 'डिजिटल समीक्षा' एप्लिकेशन में किया गया था। फर्म ने सैकड़ों बूथ स्तर के अधिकारी (बीएलओ) भी नियुक्त किए, जो तकनीकी रूप से सरकार द्वारा नियुक्त व्यक्ति होने चाहिए। इन बीएलओ को भी ऐसे पहचान पत्र दिए गए जैसे कि वे सरकारी कर्मचारी हों। हम जानना चाहते हैं कि बीबीएमपी की ओर से एक निजी संस्था को सर्वेक्षण करने की अनुमति किसने दी? किसने सरकार को एक निजी संस्था को ऐसा अनुबंध देने की सिफारिश की और ठेकेदार के पूर्ववृत्त की जाँच क्यों नहीं की गई?

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