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सोनिया - शरद की मुलाकात
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पॉलिटिक्स

सोनिया - शरद की मुलाकात से बदलेगी महाराष्ट्र की राजनीति !

एक बार फिर नई दिल्ली में शरद पवार ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की। इस मुलाकात में दोनों नेताओं के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए सीटों के तालमेल के कई मायने निकल कर आ रहे हैं।

Sushil Dev

हाइलाइट्स :

  • महाराष्ट्र में विधानसभा या निकाय चुनाव की आहट

  • नई दिल्ली में शरद पवार-सोनिया गांधी की मुलाकात

  • नेताओं के बीच सीट बंटवारे पर हुआ मंथन

  • कांग्रेस मिल-जुलकर लड़ना चाहती है चुनाव

  • मुख्यमंत्री फडणवीस कांग्रेस विधायकों को भाजपा के मिल रहे ऑफर

  • राकांपा और कांग्रेस की घट रही दूरियां

राज एक्सप्रेस। राजनीति में कब क्या हो जाए, कुछ तय नहीं होता है, यह बिल्कुल तात्कालिक निर्णयों पर निर्भर करता है। जो लोग राजनीति पर पैनी नजर रखते हैं, उन्हें यह अच्छी तरह से पता है कि, कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के बीच कछुआ-खरगोश वाला खेल चलता रहता है। केंद्र की राजनीति में भले ही राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी उतनी सक्रिय नहीं हो, लेकिन जैसे ही महाराष्ट्र में विधानसभा या निकाय चुनाव की आहट होती है, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के प्रमुख शरद पवार सक्रिय हो जाते हैं। एक बार फिर नई दिल्ली में शरद पवार ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की। इस मुलाकात में दोनों नेताओं के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को लेकर सीटों के तालमेल के कई मायने निकल कर आ रहे हैं।

सीट बंटवारे पर हुआ मंथन :

दोनों नेताओं की मुलाकात उस वक्त हुई है जब दोनों दलों की राज्य इकाइयों के नेताओं के बीच हाल के हफ्तों में कई दौर की बातचीत हो चुकी है। माना जा रहा है कि राकांपा प्रमुख ने सोनिया गांधी से मुलाकात के दौरान सीटों के बंटवारे को अंतिम रूप देने के संदर्भ में बातचीत की है। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक राज्य की ज्यादातर सीटों को लेकर दोनों दलों के बीच सहमति बन चुकी है, लेकिन कुछ छोटे दलों के साथ तालमेल को लेकर अभी गतिरोध है। राज्य में विधानसभा की कुल 288 सीटें हैं। बता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव अक्टूबर-नवंबर में प्रस्तावित है।

कुछ कांग्रेसी नहीं मान रहे :

हालांकि, कुछ समय पहले कांग्रेस ने अपने दम पर पूरे राज्य में चुनाव लड़ने की बात कहनी शुरू कर दी थी। लेकिन अब ऐसा समय नहीं है। कांग्रेस भी मिल-जुलकर लड़ना चाहती है। पिछले दिनों कांग्रेस की मंथन बैठक में मराठवाडा और उत्तर महाराष्ट्र के पदाधिकारियों ने अपने तमाम बड़े नेताओं के समक्ष यह आवाज उठाई। कांग्रेस पदाधिकारियों का कहना था कि राकांपा के साथ गठबंधन करके कोई फायदा नहीं है, क्योंकि चुनाव में राकांपा कांग्रेस की मदद नहीं करती, उल्टे भाजपा की मदद करती है।

भाजपा के मिल रहे ऑफर:

पदाधिकारियों की बैठक के बाद महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अशोक चव्हाण ने आरोप लगाया कि, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस कांग्रेस विधायकों को फोन करके भाजपा में शामिल होने का ऑफर दे रहे हैं। कांग्रेस से भाजपा में गए कुछ नेताओं से भी विधायकों को फोन कराए जा रहे हैं। हालांकि चव्हाण ने यह भी कहा कि मैं भी कांग्रेस के विधायकों के संपर्क में हूं। कोई भी विधायक कांग्रेस छोड़कर कहीं नहीं जाने वाला। चव्हाण ने कहा कि माना कि भाजपा ने लोकसभा चुनाव में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन उसे ज्यादा खुश होने की जरूरत नहीं है। इस सबके बीच गौर करने योग्य यह भी है कि महाराष्ट्र की राजनीति में पवार एक बड़े और कददावर नेता हैं लेकिन इस समय संख्या बल के मामले में उनकी शक्ति काफी घट गई है। पिछले दिनों उनकी पार्टी के भी कुछ नेता इधर-उधर चले गए। कुछ और की भी आशंका है। हालांकि पवार का कहना है कि इस तरह के दल बदल से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता।

राकांपा-कांग्रेस की घट रही दूरियां:

लोकसभा चुनावों के बाद राकांपा के कांग्रेस में विलय की अफवाहें उड़ी थीं। इस मामले पर राहुल और शरद पवार की बातचीत हुई थी ताकि राकांपा का कांग्रेस में विलय कर कांग्रेस को नेता प्रतिपक्ष का पद दिलाया जा सके, लेकिन यह मामला सिरे नहीं चढ़ा। इसमें कोई संदेह नहीं कि राकांपा राजनीतिक तौर पर सिकुड़ रही है। हालांकि गत चुनावों में उसे 5 सीटें मिलीं लेकिन यह उसकी उम्मीदों से काफी कम थीं। 2019 के आम चुनावों से पहले टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू और राकांपा प्रमुख शरद पवार ने उन्हें विपक्ष के चेहरे के तौर पर प्रोजेक्ट करने की कोशिश की, लेकिन इसमें कामयाबी नहीं मिली। भाजपा और इसकी सहयोगी शिवसेना आगामी विधानसभा चुनावों के लिए पुख्ता तैयारियों में जुट गई हैं और दोनों के मिल कर चुनाव लड़ने की स्थिति में वे राकांपा और कांग्रेस के मुकाबले काफी बेहतर परिणाम हासिल कर सकती हैं।