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केवल युवाओं से कांग्रेस कैसे चलेगी

नई दिल्ली: कांग्रेस में ऐसे सैंकड़ों अनुभवी नेता हैं, जिनके कंधे पर पार्टी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती थी, अब बेशक हाशिए पर चले गए हों मगर इतने युवा भी नहीं कि,पार्टी को पूरी तरह से चला लें।

Priyanka Sahu

Sushil Dev

Priyanka Sahu

राज एक्‍सप्रेस। जितनी चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की होती है, उतनी ही चर्चा गांधी परिवार या कांग्रेस की भी हो जाती है। इन दिनों चौक-चौराहों से लेकर आफिस-दफ्तरों में जहां देखोंं वहां लोग ये कहते नजर आ जाएंगे कि, युवाओं को ही पार्टी की पूरी कमान दे दी जाए तो क्या कांग्रेस का कायाकल्प हो जाएगा? कांग्रेस में ऐसे सैंकड़ों अनुभवी नेता हैं, जिनके कंधे पर कभी पार्टी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती थी। अब बेशक हाशिए पर चले गए हों, मगर इतने युवा भी तो नहीं कि, पार्टी को पूरी तरह से चला लें। कोई कहता ये वक्त कांग्रेस का नहींं तो कोई कहता है भाजपा या मोदी के आगे अब पार्टी कहीं नहीं टिकती।

युवाओं की विफलता बने सवाल :

ज्ञात हो कि, सबसे अधिक चर्चा यह है की कांग्रेस में युवाओं को पार्टी की कमान दी जानी चाहिए। विभिन्न राज्यों में युवा अध्यक्षों को नियुक्त करने या प्रभारी बनाने की बात चल रही है। कुछ दिनों पहले इसके लिए राहुल गांधी नाम सबसे ऊपर था, वह कांग्रेस के युवा नेतृत्व का चेहरा थे। पर एक के बाद एक विफलता और जिम्मेदारी छोड़ कर भागने की उनकी प्रवृत्ति ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। बड़ा सवाल तो यह भी है कि, कांग्रेस में इतने युवा नेता कहां हैं, जो पार्टी को पूरी तरह संभाल सके। भले कांग्रेस में युवाओं को तरजीह दिए जाने की बात चल रही है, लेकिन सभी युवा इसके लायक नहीं हैं। अगर होते तो लोकसभा चुनाव से पहले दिल्ली में 81 साल की शीला दीक्षित और लोकसभा चुनाव के बाद हुई पहली नियुक्ति में झारखंड में 72 साल के रामेश्वर उरांव अध्यक्ष नहीं बनाए जाते।