गाजियाबाद के मुरादनगर हादसे के बाद सरकार ने कड़ी कार्रवाई का इशारा किया
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गाजियाबाद के मुरादनगर हादसे के बाद सरकार ने कड़ी कार्रवाई का इशारा किया

गाजियाबाद के मुरादनगर हादसे के बाद सरकार ने कड़ी कार्रवाई का इशारा जरूर किया है, मगर जब तक इस तरह के मामलों में सख्त सजा का प्रावधान नहीं किया जाएगा, तब तक बदलाव नहीं दिखने वाला।

गाजियाबाद के मुरादनगर में रविवार दोपहर श्मशान घाट के प्रवेश द्वार के साथ बने गलियारे की छत गिरने से मलबे में दबकर 24 लोगों की मौत हो गई और 15 घायल हो गए। यह हादसा प्रथम दृष्टया लापरवाही का है और अब शासन-प्रशासन के हाथ से निकल चुका है। गाजियाबाद की यह घटना वैसे तो दूसरी घटनाओं जैसी ही है, मगर उसका जैसा आलम है वैसा कभी नहीं दिखा। एक मृतक को अंतिम विदाई देने श्मशान गए 24 लोगों और उनके परिवार ने सोचा भी नहीं था कि नियति उनके साथ कैसा कू्र मजाक करने वाली है। रविवार को जब घटना हुई, तब से लेकर अब तक का माजरा बेहद चिंतनीय है। यूपी सरकार को घटना की गंभीरता का अंदाजा तत्काल बाद हो गया था, सो उसने मुआवजा बांटने से लेकर बाकी सारे जतन किए, ताकि लोगों का गुस्सा कम किया जा सके। मगर ऐसा कुछ हुआ नहीं।

सोमवार की सुबह गाजियाबाद के लिए मातम जैसी थी, पूरा शहर श्मशान बना था। जहां-तहां रोने की आवाजें कलेजा चीर रही थीं, मगर सरकार अपने को बचाने में लगी रही। इस मामले में पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें ईओ निहारिका सिंह, जेई सीपी सिंह, सुपरवाइजर आशीष शामिल हैं। ठेकेदार अजय त्यागी व अन्य अज्ञात लोगों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। प्रशासन की इस कार्रवाई ने भी लोगों का भरोसा नहीं जीता। लिहाजा मृतकों के परिजनों पे शवों को सोमवार सुबह मुरादनगर में दो जगह शव रख जाम लगा दिया। मुरादनगर में मृतकों के परिजनों की भीड़ बढ़ते देख पुलिस प्रशासन ने आकर उन्हें समझाना चाहा। पुलिस ने कहा कि आप हमें शव ले जाने दें और रास्ता खाली करें। इस पर परिजन भडक़ गए और पुलिस से कहा कि पहले हमें गोली मार दो फिर शव ले जाओ। मुरादनगर में हुई घटना के बाद यूपी गेट पर किसानों ने सोमवार को मंच का संचालन नहीं करने का निर्णय लिया। घटिया सामग्री को ही हादसे का प्रमुख कारण बताया गया है। सही मायने में देखे यह घटिया सामग्री का मामला भी नहीं है। यह पूरी तरह से लापरवाही और काम के प्रति जिम्मेदारी न होने का मामला है। इससे भी ज्यादा भ्रष्टाचार की बढ़ती प्रवृत्ति का ताजा उदाहरण है।

यह घटना बताती है हमारे अफसर और ठेकेदारों के बीच किस तरह का गठजोड़ काम कर रहा है। पैसा दो और फाइल पास कराओ। किसी को यह देखने की फुर्सत नहीं कि जो काम हुआ है वह सही है भी या नहीं। काम की गुणवत्ता की बात ही अलग। मुरादनगर के जिस श्मशान में हादसा हुआ है, उसे रोकने की जिम्मेदारी नगर पालिका की थी, मगर वह सोता रहा। अभी उसके ईओ को गिरफ्तार जरूर किया गया है, मगर इतना भर काफी नहीं है। जब तक इस तरह के मामलों में दोषियों के प्रति सती नहीं बरती जाएगी तब तक हम विकास कार्यों या निर्माण कार्यों में पारदार्शिता नहीं ला पाएंगे। जरूरी है कि इस हादसे के जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

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