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America Gun Fire
America Gun Fire |Pankaj Baraiya - RE
राज ख़ास

अमेरिका में एक बार फिर गरजी बंदूक

अमेरिका में गोलीबारी की घटनाएं लगातार बढ़ रही है, अमेरिका ही नहीं समूची दुनिया के लिए यह एक खतरा है, आगे इस मसले पर ट्रंप क्या नीति अपनाते है, यह विचारणीय है?

राज एक्सप्रेस

राज एक्सप्रेस

राज एक्सप्रेस। अमेरिका में गोलीबारी की एक और घटना सामने आई है। वॉशिंगटन (डीसी) में स्थानीय समय के मुताबिक रात लगभग 10 बजे अंधाधुंध गोलीबारी हुई। घटना में हताहतों की संख्या तो ज्यादा नहीं रही, मगर इस तरह की घटनाओं पर अमेरिका लापरवाह न रहे।

अमेरिका में गोलीबारी की एक और घटना हुई है। अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन (डीसी) में स्थानीय समय के मुताबिक रात लगभग 10 बजे अंधाधुंध गोलीबारी हुई। इस हादसे में कई लोगों को गोलियां लगी हैं। इस हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई, और पांच लोग घायल हुए। गोलीबारी का स्थान व्हाइट हाउस से कुछ ही दूरी पर है, जो कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का निवास है। अमेरिका में इससे पहले भी कई बार गोलीबारी की घटनाएं आती रही हैं। अमेरिका में गन कल्चर को लेकर कई बार विरोध हुआ है लेकिन हर बार इस कल्चर को बंद करने के लिए कोई एक्शन नहीं हो पाया है। इस घटना में भले ही हताहत होने वालों की संख्या कम हो, मगर दो कारणों से इस घटना ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। पहला-घटना राष्ट्रपति निवास से कुछ दूरी पर हुई, दूसरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका के दौरे पर जाने वाले हैं। अमेरिकी समाज में बंदूक की संस्कृति गहरे तक जम चुकी है उसका इलाज जरूरी है। अमेरिका में बंदूक रखना उतना ही आसान है जैसे भारत में लाठी-डंडा रखना। यहां 88.8 फीसदी लोगों के पास बंदूकें हैं जो दुनिया के लिहाज से सबसे बड़ा आंकड़ा है।

अमेरिका में गोलीबारी की घटनाएं नियमित रूप से सुर्खियों का विषय बनती रहती हैं। फ्लोरिडा के एक हाईस्कूल में हुई गोलीबारी में कम से कम 17 लोग मारे गए थे। हमलावर स्कूल का ही एक पूर्व छात्र था। इससे पहले लास वेगास में हुई गोलीबारी की एक घटना में 58 लोगों की मौत हो गई थी। जून 2016 में ऑरलैंडो में हुई गोलीबारी में 50 लोग मारे गए थे। 19 साल के हमलावर ने एक गे नाइट क्लब में अंधाधुंध गोलियां चलाई थीं। लेकिन इतनी बड़ी घटनाओं के बाद भीअमेरिकी संसद में शस्त्र नियंत्रण के लिए लाए गए प्रस्ताव बुरी तरह गिर गए थे। सीनेट में इस संबंध में चार प्रस्ताव पेश किए गए थे, लेकिन चारों ही प्रस्ताव सीनेट में आगे बढ़ाए जाने के लिए जरूरी न्यूनतम 60 वोट हासिल नहीं कर पाए। इनमें से एक प्रस्ताव यह भी था कि किसी भी व्यक्ति को बंदूक बेचे जाने से पहले उसकी पृष्ठभूमि की गहराई से जांच की जाए।

इसके अलावा आए प्रस्तावों में पृष्ठभूमि जांच तंत्र के लिए वित्तीय कोष बढ़ाने, आतंकी या फिर अपराधिक प्रवृत्ति के लोगों की पृष्ठभूमि जांचने के लिए ज्यादा समय देने और आतंकी निरीक्षण सूचियों में दर्ज लोगों को बंदूकें न बेचे जाने की बात कही गई थी। अमेरिका में बंदूक संस्कृति की जड़ें औपनिवेशिक इतिहास, संवैधानिक प्रावधानों और यहां की राजनीति तक में देखी जा सकती हैं। कभी ब्रिटेन के उपनिवेश रहे अमेरिका का इतिहास आजादी के लिए लड़ने वाले सशस्त्र योद्धाओं की कहानी रहा है। बंदूक अमेरिका के आजादी के सेनानियों के लिए आंदोलन का सबसे बड़ा औजार रही। इसलिए यह नायकत्व और गौरव की निशानी बन गई। मगर आज यही बंदूक अमेरिका के लिए काला अध्याय लिखने का काम कर रही है।