कोरोना वायरस : देश में कोरोना के 7000 से ज्यादा वैरिएंट मौजूद
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कोरोना वायरस : देश में कोरोना के 7000 से ज्यादा वैरिएंट मौजूद

देश के कई राज्यों में कोरोना का संक्रमण भले कम हो गया हो, मगर खतरा टला नहीं है। अब वैज्ञानिकों ने खुलासा किया है कि देश में कोरोना के सात हजार से ज्यादा वैरिएंट मौजूद हैं।

देश के भीतर भी चुनौतियां बरकरार हैं और दूसरे देशों में मिल रहे विषाणु के नए-नए रूपों से भी खतरा बढ़ रहा है। पिछले दिनों अंगोला, तंजानिया और दक्षिण अफ्रीका से भारत पहुंचे चार लोगों में कोरोना विषाणु का नया रूप मिला था। ब्राजील से आए एक शख्स में भी विषाणु का एक और नया स्वरूप पाया गया। इस बीच कोरोना वायरस को लेकर भारतीय वैज्ञानिकों ने बड़ा खुलासा किया है। हैदराबाद स्थित सीसीएमबी के वैज्ञानिकों का दावा है कि 6017 जीनोम सिवेंसिंग के आधार पर देश में 7684 तरह के कोरोना वायरस की मौजूदगी का पता चला है। इनमें सबसे ज्यादा दक्षिणी राज्यों में हैं। यहां एन440 के कोरोना वायरस का स्वरूप काफी तेजी से फैला है। तेलंगाना में 987 और आंध्र प्रदेश में 296 स्वरूप कोरोना वायरस के मिले हैं। देश के 22 राज्यों की 35 लैब से सैंपल एकत्रित करने के बाद वैज्ञानिकों ने जीनोम सिवेंसिंग की थी। इसमें एक दर्जन से ज्यादा कोरोना के लेड भी मिले हैं।

हैदराबाद स्थित सीएसआईआर-कोशिकीय एवं आणविक जीव विज्ञान केंद्र के निदेशक डॉ. राकेश मिश्रा का कहना है कि भारत में अब तक सात हजार से ज्यादा कोरोना के स्वरूप मिल चुके हैं। इनमें से कुछ ही स्वरुप ज्यादा तीव्र और घातक हैं। इसके लिए एक अलग से अध्ययन करने की जरूरत है। दक्षिणी राज्यों में कोरोना फैलने की वजह इन्हीं में से कुछ स्वरूप हो सकते हैं। देश में नए लेड और स्ट्रेन की कम मौजूदगी का एक कारण यह भी हो सकता है कि पर्याप्त सिवेंसिंग नहीं हुई है। अब तक केवल छह हजार सैंपल का ही जीनोम सिवेंसिंग हुआ है जबकि एक करोड़ से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं। वायरस के नए स्वरूप का सटीकता से पता लगाने के लिए देश में वायरस के जीनोम सिवेंसिंग को लेकर और भी ज्यादा काम करने की जरूरत है। इससे पहले दिसंबर में ब्रिटेन से आए लोगों में पहली बार कोरोना विषाणु के नए प्रकार के बारे में परदा उठा था। संकट तब गहराया जब भारत पहुंचे ये लोग बिना जांच के दूसरे शहरों में पहुंच गए। कहा नहीं जा सकता कि इन लोगों के जरिए कितने लोग संक्रमित हुए होंगे।

ब्रटेन से ऐसे करीब दो सौ लोग भारत पहुंचे थे। वैज्ञानिक और चिकित्सक पहले ही कह चुके हैं कि कोरोना का विषाणु अपने रूप बदलता रहता है और किसी भी देश में इसके नए रूप देखने को मिल जाएं तो इसमें आश्चर्य नहीं, साथ ही ये कम या ज्यादा खतरनाक साबित हो सकते हैं। ऐसे में सतर्कता और ज्यादा जरूरी हो जाती है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि कोरोना संक्रमण कब, कहां और किस रूप में आबादी को शिकार बना ले। महाराष्ट्र और केरल में जिस तेजी से मामले बढऩे लगे हैं, उससे तो लग रहा है कि जरा-सी लापरवाही भी देश को फिर गंभीर संकट में धकेल देगी। केरल और महाराष्ट्र समेत कुछ राज्यों को छोड़ दें तो ज्यादातर राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में हालात अब काबू में हैं।

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