असम में भाजपा के मुख्यमंत्री के पद पर हेमंत बिस्वा सरमा को बैठाने का फैसला
असम में भाजपा के मुख्यमंत्री के पद पर हेमंत बिस्वा सरमा को बैठाने का फैसलाSocial Media

असम में भाजपा के मुख्यमंत्री के पद पर हेमंत बिस्वा सरमा को बैठाने का फैसला

असम में भारी जीत हासिल करने के बाद भाजपा ने मुख्यमंत्री के पद पर हेमंत बिस्वा सरमा को बैठाने का फैसला किया है। उन्हें विधायक दल की बैठक में नेता चुना गया।

असम में ऐतिहासिक जीत पाने के छह दिन बाद भी राज्य में ‘कौन बनेगा मुख्यमंत्री’ की कशमकश से गुजर रही भाजपा की गुत्थी रविवार को सुलझ गई है। असम के अगले सीएम पद के चेहरे को लेकर लगाए जा रहे कयासों के बीच मौजूदा सीएम सर्बानंद सोनोवाल ने राज्यपाल जगदीश मुखी को इस्तीफा सौंप दिया। इसके बाद हेमंत बिस्वा सरमा को विधायक दल का नेता चुन लिया गया है। इससे तय हो गया कि वह ही अगले मुख्यमंत्री बनेंगे। इससे पहले शनिवार को दिल्ली में पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा के घर पर भी एक नाम तय करने को लेकर काफी मशक्कत हुई थी। खैर, अब बिस्वा सोमवार को सीएम पद ग्रहण करेंगे। बता दें कि वे सोनोवाल सरकार में स्वास्थ्य मंत्री थे। मुख्यमंत्री के पद पर खींचतान के पीछे की कहानी जानें तो पता चलेगा कि इस बार असम विधानसभा चुनाव में भाजपा ने मुख्यमंत्री चेहरे के तौर पर अपने किसी भी नेता को प्रोजेक्ट नहीं किया थाा। भाजपा गुटबाजी से बचने चुनाव में किसी चेहरे को आगे करने के बजाय सामूहिक नेतृत्व के साथ उतरी थी।

हालांकि, 2016 में असम विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी ने सोनोवाल को सीएम का चेहरा घोषित किया था, तब वह केंद्र की मोदी सरकार में मंत्री थे। वहीं, अब सर्बानंद के मुख्यमंत्री रहते हुए भाजपा दोबारा से सत्ता में वापसी करने में सफल रही है तो पार्टी के लिए मुख्यमंत्री का चुनाव आसान नहीं रहा, क्योंकि हेमंत बिस्वा सरमा भी बड़ा चेहरा बनकर उभरे हैं। असम की सियासत में कांग्रेस छोडक़र भाजपा में आए हेमंत बिस्वा सरमा का राजनीतिक कद पार्टी में काफी बढ़ा है। माना जाता है कि सरमा ने कांग्रेस भी केवल इसलिए छोड़ी थी क्योंकि तरुण गोगोई के आगे वे मुख्यमंत्री नहीं बन पा रहे थे। ऐसे में हेमंत बिस्वा सरमा की राजनीतिक महत्वाकांक्षा जगजाहिर है। सरमा ने पांच साल पहले भाजपा ज्वाइन की थी तब वो चाहते थे कि पार्टी उन्हें सीएम कैंडिडेट पेश करे, लेकिन ऐसा नहीं किया। वहीं, भाजपा बाहर से आए किसी नेता को मुख्यमंत्री बनाकर कलह को जन्म नहीं देना चाहती थी। इसीलिए सर्बानंद सोनोवाल को सीएम का चेहरा बनाकर बाद में सत्ता की कमान सौंपी गई।

पांच साल के बाद असम के सियासी हालात काफी बदल गए हैं। सोनोवाल के ऊपर आरोप लगता रहा है कि वो विधायकों और क्षेत्रीय नेताओं के साथ कोई समन्वय नहीं बना पा रहे हैं। वहीं, सरमा ने खुद को सोनोवाल में न केवल स्थापित किया है बल्कि शीर्ष नेतृत्व तक यह संदेश पहुंचाने में सफल रहे हैं कि असम के साथ-साथ पूर्वोत्तर के राज्यों में भाजपा की मजबूती के लिए वो ट्रंप कार्ड हैं। एग्जिट पोल में भी असम में मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर सबसे ज्यादा लोगों ने हेमंत बिस्वा सरमा के प्रति अपना विश्वास जताया था। साथ ही असम में पिछले और इस बार चुनाव में भाजपा के प्रदर्शन में हेमंत बिस्वा सरमा की भूमिका काफी अहम रही है। इसीलिए मुख्यमंत्री के नाम पर हेमंत बिस्वा सरमा की मुहर लगी।

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