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राज ख़ास

दिल्ली : कच्चे तेल की कीमत में लगी आग पेट्रोल से महंगा हुआ डीजल

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच घरेलू बाजार में डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी जारी है।

राज एक्सप्रेस

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दिल्ली में पहली बार ऐसा हुआ कि डीजल की कीमत पेट्रोल से अधिक हो गई है। डीजल की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर महंगाई पर पड़ेगा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में मामूली तेजी के बीच घरेलू बाजार में डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी जारी है। दिल्ली में पहली बार ऐसा हुआ है कि डीजल की कीमत पेट्रोल से अधिक हो गई है। आज लगातार 18वें दिन डीजल की कीमत में बढ़ोतरी हुई जबकि पेट्रोल की कीमत मंगलवार के ही बराबर है। पिछले 18 दिनों में डीजल की कीमत में 10.48 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है जबकि पेट्रोल भी 8.50 रुपए महंगा हुआ है। बुधवार, 24 जून को भी सरकारी तेल कंपनियों ने ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी की। दिल्ली में पेट्रोल की कीमत तो मंगलवार के बराबर 79.76 रुपए पर टिकी रही लेकिन डीजल की कीमत 79.40 रुपए से बढ़कर 79.88 रुपए प्रति लीटर हो गई जो मंगलवार के मुकाबले 48 पैसे महंगा है। तेल पर लगने वाला टैक्स अप्रैल तक देश भर में सबसे कम हुआ करता था, जबकि मुंबई में ये सबसे अधिक था। जब से दिल्ली सरकार ने डीजल पर लगने वाला वैट 4 मई को 16.75 फीसदी से बढ़ाकर 30 फीसदी किया है, तब से दिल्ली में डीजल की कीमतें मुंबई से भी अधिक हो गई हैं।

पेट्रोल पर भी वैट बढ़ाया गया, जो पहले 27 फीसदी था और अब बढ़ाकर 30 फीसदी कर दिया गया है। इसकी वजह से पेट्रोल की कीमत में 1.67 रुपए की बढ़ोतरी हुई, जबकि डीजल की कीमत 7.10 रुपए बढ़ गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूं तो पिछले 18 दिनों में से अधिकतर दिन क्रूड आयल की कीमतों में नरमी का ही रुख रहा, लेकिन घरेलू बाजार में इसकी कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। अभी इंडियन बास्केट कच्चे तेल की कीमत 40 डॉलर प्रति बैरल के आसपास चल रही है। लेकिन कीमतों में उस हिसाब से कमी नहीं हुई है। इसी का असर है कि पिछले 18 दिनों में डीजल की कीमत में 10.48 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। इतने दिनों में पेट्रोल का दाम भी 8.50 रुपए प्रति लीटर चढ़ गया। भारत अपनी जरूरत या खपत का करीब अस्सी फीसद तेल आयात करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ती है तो इसका भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ता है।

हालांकि, अभी अंतरराष्ट्रीय बाजार में नरमी का दौर है, फिर भी तेल की कीमतों में आग लगी जा रही है। गौरतलब है कि दक्षिण एशियाई देशों में भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें सर्वाधिक हैं। इसलिए कि देश में पेट्रोल-डीजल की विपणन दरों में आधी हिस्सेदारी करों की है। इन करों में कटौती क्यों नहीं की जा सकती? जब पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों को नियंत्रण-मुक्त किया गया, तो यह तर्क दिया गया कि अंतत: इससे उपभोक्ताओं को लाभ ही होगा; अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत गिरेगी, तो पेट्रोल-डीजल का खुदरा मूल्य उन्हें कम चुकाना होगा। लेकिन हाल के कुछ महीनों को छोड़ दें, तो पिछले तीन साल में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत नीचे थी। पर उसका लाभ उपभोक्ताओं को नहीं मिल पाया।

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