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शराबबंदी से कतराती सरकारें
शराबबंदी से कतराती सरकारें|संपादित तस्वीर
राज ख़ास

शराबबंदी से कतराती सरकारें

सांसद-विधायक-मंत्री जिस संविधान की शपथ लेते हैं, उसकी धारा-47 में बहुत साफ लिखा है कि नशीले पदार्थो की रोकथाम सरकार की जिम्मेदारी है।

राज एक्सप्रेस

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राज एक्सप्रेस, भोपाल। अफसोस की बात यह है कि देश में कोई भी सरकार शराबबंदी पर गंभीर नहीं रही। संविधान की धारा 51 (ए) में भी कहा गया है कि आजादी की लड़ाई के जो मूल्य हैं, उन्हें हमें ही संरक्षित करना है।

दुनिया में हेपेटाइटिस-बी, सी और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां बढ़ती जा रही हैं। भारत ही नहीं अमेरिका और यूरोपीय देश भी इनकी चपेट में हैं। यह बात सही है कि किसी बीमारी का कोई एक कारण नहीं होता है, कई चीजों के एक होने से कोई बीमारी होती है। लेकिन कुछ मूल कारण होते हैं जो इन रोगों का कारण बनते हैं। कैंसर के मूल में जहां तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट व गुटखे के सेवन जैसे कारण हैं, वहीं लिवर संबंधी बीमारियों का कारण मद्यपान है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आकड़ों के अनुसार अल्कोहल की बढ़ती खपत सिर्फ रोग नहीं बल्कि कई अन्य समस्याओं का भी कारण है। शराब की वजह से दो सौ प्रकार के रोग होते हैं तो शराब पीकर वाहन चलाने से वैश्विक स्तर पर दुर्घटनाओं में मौतों की बाढ़ आ गई है। शराब के नशे में धुत होकर हत्या, बलात्कार और लूट जैसे अपराधों की घटनाओं को हम दिन-प्रतिदिन देख-सुन रहे हैं। जाहिर है, लोगों में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति समाज में अपराधों का एक बड़ा कारण तो है ही।